8 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: एमएसएमई को राहत, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़, रिफंड 3 दिन में

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक: एमएसएमई को राहत, मुकदमे की सीमा ₹5 करोड़, रिफंड 3 दिन में

सारांश

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में इस बार दरों में कटौती नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की सफाई हुई। मुकदमे की सीमा पाँच गुना बढ़ाई, कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म और 90% रिफंड तीन दिन में — एमएसएमई के लिए यह राहत का बड़ा पैकेज है।

मुख्य बातें

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में 8 अक्टूबर 2026 को कई प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई।
मुकदमा चलाने की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ की गई, छोटे व्यापारियों को सीधी राहत।
90 प्रतिशत रिफंड अब 3 कामकाजी दिनों में; स्वीकृति अवधि 15 दिन से घटकर 10 दिन ।
कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति समाप्त; अब घोटालों पर BNS के तहत कार्रवाई।
पंजीकरण में सामान्य बदलावों को स्वतः अनुमति देने की व्यवस्था लागू होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा — इस वर्ष का फोकस दर कटौती नहीं, प्रक्रिया सरलीकरण है।

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में 8 अक्टूबर 2026 को कई अहम प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई, जिनसे देशभर के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद प्रेस वार्ता में इन सुधारों की विस्तृत जानकारी दी।

मुख्य घोषणाएँ

परिषद ने मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की है। इसका अर्थ है कि इस सीमा से नीचे के मामलों में अभियोजन की कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकेगी, जिससे छोटे व्यापारियों पर कानूनी दबाव कम होगा। साथ ही, कर अधिकारियों की गिरफ्तार करने की शक्ति को भी समाप्त करने की सिफारिश की गई है।

विशेषज्ञ अजय रोट्टी ने बताया कि अब कर से जुड़े घोटालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि पहले पुलिस और कर अधिकारी — दोनों को गिरफ्तार करने का अधिकार था, लेकिन अब कर अधिकारी की यह शक्ति वापस ले ली गई है।

रिफंड प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, 'पंजीकरण में सामान्य बदलावों को स्वतः अनुमति देने को जीएसटी परिषद ने मंजूरी दे दी है। अब रिफंड तेजी से जारी होंगे और स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटकर 10 दिन हो जाएगी। साथ ही, 90 प्रतिशत रिफंड 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।'

यह बदलाव एमएसएमई के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिफंड में देरी उनकी वर्किंग कैपिटल को प्रभावित करती थी। रिफंड पात्रता का दायरा बढ़ाने और वस्तुओं व सेवाओं के वर्गीकरण पर कई स्पष्टीकरण जारी करने की भी सिफारिश की गई है।

व्यापार सुगमता पर फोकस

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष जहाँ जीएसटी दरों में कटौती पर ध्यान केंद्रित किया गया था, वहीं इस वर्ष परिषद ने प्रक्रियाओं को सरल बनाने को प्राथमिकता दी है। पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने से नए व्यापारियों के लिए जीएसटी अनुपालन अधिक सुलभ होगा।

गौरतलब है कि भारत में 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ हैं जो देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 30 प्रतिशत का योगदान देती हैं। इन सुधारों से अनुपालन बोझ कम होने और नकदी प्रवाह सुधरने की उम्मीद है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

विशेषज्ञ अजय रोट्टी के अनुसार, ये सुधार एमएसएमई क्षेत्र के लिए अत्यंत सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि मुकदमे की बढ़ी हुई सीमा और रिफंड प्रक्रिया की गति से छोटे उद्यमियों की वर्किंग कैपिटल में सुधार होगा और व्यापार में सहजता आएगी।

आगे की दिशा में, परिषद द्वारा सुझाए गए इन सुधारों को औपचारिक रूप से अधिसूचित किए जाने के बाद ये लागू होंगे। उद्योग जगत इन बदलावों के क्रियान्वयन की गति पर नज़र रखेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन छोटे व्यापारियों के लिए मनोवैज्ञानिक राहत बड़ी है। असली सवाल यह है कि 3 कामकाजी दिनों में 90% रिफंड का वादा ज़मीन पर कैसे उतरेगा, जबकि जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खामियाँ आज भी व्यापारियों की शिकायत बनी हैं। प्रक्रिया सुधार की यह लहर स्वागत योग्य है, लेकिन क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता ही तय करेगी कि यह राहत कागजी रहती है या वास्तविक।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में क्या मुख्य फैसले हुए?
परिषद ने मुकदमे की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने, कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति खत्म करने और 90% रिफंड 3 कामकाजी दिनों में जारी करने की सिफारिश की। पंजीकरण प्रक्रिया को भी स्वचालित और सरल बनाया गया है।
एमएसएमई को इन जीएसटी सुधारों से क्या फायदा होगा?
एमएसएमई को रिफंड तेजी से मिलेगा, जिससे वर्किंग कैपिटल की समस्या कम होगी। मुकदमे की ऊँची सीमा से छोटे व्यापारियों पर कानूनी दबाव घटेगा और पंजीकरण सरल होने से नए उद्यमियों के लिए अनुपालन आसान होगा।
कर अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति क्यों खत्म की गई?
व्यापार में सहजता बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञ अजय रोट्टी के अनुसार, अब कर से जुड़े घोटालों पर BNS के तहत कार्यवाही होगी और पुलिस की शक्ति बरकरार रहेगी, केवल कर अधिकारी की गिरफ्तारी शक्ति समाप्त की गई है।
जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में क्या बदलाव आया है?
रिफंड स्वीकृति की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, 90 प्रतिशत रिफंड अब 3 कामकाजी दिनों के भीतर जारी किए जाएंगे, जो पहले की तुलना में बड़ा सुधार है।
इस वर्ष जीएसटी परिषद का मुख्य एजेंडा क्या रहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि पिछले साल जीएसटी दरों में कटौती की गई थी, जबकि इस साल का फोकस प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने पर रहा। यह बदलाव व्यापार सुगमता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 29 मिनट पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 4 घंटे पहले
  4. 5 घंटे पहले
  5. 8 घंटे पहले
  6. 12 घंटे पहले
  7. 2 दिन पहले
  8. 3 दिन पहले