क्या चंद्रबाबू नायडू ने कोनासीमा में गैस रिसाव से प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया और मुआवजे का निर्देश दिया?
सारांश
Key Takeaways
- गैस वेल ब्लोआउट की गंभीरता को समझना आवश्यक है।
- स्थानीय लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण का संरक्षण प्राथमिकता में होना चाहिए।
- सरकार की सहायता और मुआवजा प्रक्रिया का महत्व।
- विशेषज्ञ टीमों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया है।
- स्थानीय प्रशासन और सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता है।
अमरावती, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को कोनासीमा जिले में गैस वेल ब्लोआउट से प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। गैस वेल ब्लोआउट का अर्थ है कुएं से प्राकृतिक गैस या कच्चे तेल का अनियंत्रित रिसाव।
उन्होंने मलिकीपुरम मंडल के इरुसुमंडा क्षेत्र का हेलीकॉप्टर से दौरा किया, जहां ओएनजीसी की एक गैस वेल में ब्लोआउट के कारण आग लग गई है, जिससे आसपास के क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।
हवाई सर्वेक्षण के बाद, मुख्यमंत्री मंडपेटा विधानसभा क्षेत्र के रायवरम पहुंचे। वहां उन्होंने ओएनजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों, कोनासीमा के जिला कलेक्टर महेश कुमार, सांसद हरीश और स्थानीय विधायक वराप्रसाद के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में ब्लोआउट को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि आग को पूरी तरह बुझाने और ब्लोआउट रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जाए। साथ ही, आग की चपेट में आने वाले नारियल के पेड़ों के मालिकों को उचित मुआवजा देने के सख्त निर्देश दिए।
यह घटना स्थानीय किसानों और ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन चुकी है, क्योंकि नारियल के बागानों पर इसका सीधा असर पड़ा है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और जल्द ही राहत पहुंचाई जाएगी।
बैठक के दौरान ओएनजीसी अधिकारियों ने बताया कि विशेषज्ञ टीमों को लगाया गया है और स्थिति को शीघ्र नियंत्रित करने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि वे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
स्थानीय लोग इस घटना से हुए नुकसान की भरपाई और तुरंत राहत की उम्मीद कर रहे हैं।