क्या मनरेगा पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि योजनाओं के नाम सुधार के लिए बदले जाते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा योजना का नाम बदलने का उद्देश्य सुधार है।
- राहुल गांधी का महाराष्ट्र में अपमान भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।
- सरकार ने कांग्रेस को नकार दिया है।
- राजनीतिक बयानबाजी में कई रणनीतियाँ छिपी होती हैं।
- सुप्रिया सुले ने ईवीएम पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
नागपुर, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर 'विकसित भारत जी राम जी' करने से संबंधित बिल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि जब भी सरकार कोई नई योजना पेश करती है, तो वह कुछ मौजूदा योजनाओं में सुधार करती है और नए तत्व जोड़ती है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मैं सब कुछ विस्तार से नहीं बता सकता, लेकिन एक बात पक्की है। कुछ भी मनमाने ढंग से नहीं होता। हम रातों-रात किसी का नाम नहीं हटाते। क्या हमने संजय गांधी या इंदिरा गांधी के नाम पर रखी गई कई योजनाओं के नाम हटाए? नहीं, ऐसा नहीं हुआ। अगर कोई बदलाव किया गया है तो वह किसी नए विचार या उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया होगा।"
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "जब भी राहुल गांधी मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में आते हैं, तो लोग उनसे स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का अपमान करने के बारे में सवाल पूछते हैं। ऐसे कई मौके आए हैं जब राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में वीर सावरकर का अपमान किया है और राज्य के लोग उनसे जवाब मांगने के लिए तैयार हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि जब भी राहुल गांधी महाराष्ट्र में प्रचार करते हैं, तो भाजपा का वोट शेयर 5 से 7 प्रतिशत बढ़ जाता है, जिससे हमारी जीत का रास्ता आसान हो जाता है। उनका आना हमारे पक्ष में काम करता है।"
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कब क्या बोलते हैं, उन्हें खुद पता नहीं रहता है। जो मन में आता है, वह बोल देते हैं। महाराष्ट्र की सरकार ने भी कांग्रेस को नकार दिया है। इसमें अब कोई दो राय नहीं होने वाली है।
एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले द्वारा विपक्ष के EVM में धांधली के आरोपों को खारिज करने पर मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "राहुल गांधी को सुप्रिया सुले की बात सुननी चाहिए। अगर वह उनके साथ चाय पर बैठकर चर्चा करें और उनके नजरिए को समझें तो यह मुद्दा हल हो जाएगा।"
महाराष्ट्र के बारामती से चार बार की लोकसभा सदस्य और एनसीपी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने लोकसभा में चुनाव सुधारों पर हो रही बहस के दौरान यह बात कही थी। सुले ने सदन में कहा, “मैं इसी मशीन से चुनकर आई हूं, इसलिए मैं EVM या वीवीपैट पर सवाल नहीं उठाऊंगी।”