4 मई के बाद TMC के हर गुंडे का चुन-चुनकर हिसाब होगा: PM मोदी का आरामबाग में बड़ा ऐलान
सारांश
Key Takeaways
- PM मोदी ने 26 अप्रैल को आरामबाग, पश्चिम बंगाल में 'विजय संकल्प सभा' को संबोधित किया।
- 4 मई के बाद TMC के हर गुंडे, अत्याचारी और भ्रष्टाचारी का चुन-चुनकर हिसाब होगा — PM मोदी की कड़ी चेतावनी।
- शिक्षक भर्ती घोटाले और संदेशखाली कांड में न्यायालय की दखलंदाजी को TMC की शून्य विश्वसनीयता का प्रमाण बताया।
- BJP सरकार बनने पर बंगाल की 75 लाख बहनों को लखपति दीदी अभियान और 20 लाख रुपए तक मुद्रा लोन देने का वादा।
- आयुष्मान भारत योजना पहली कैबिनेट बैठक में लागू होगी — 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज का वादा।
- 23 अप्रैल के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान हुआ; मोदी ने 4 मई को इसे भी पार करने का आह्वान किया।
आरामबाग, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले रविवार, 26 अप्रैल को आरामबाग में आयोजित 'विजय संकल्प सभा' को संबोधित करते हुए कड़ी चेतावनी दी कि 4 मई के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के हर गुंडे, हर अत्याचारी और हर भ्रष्टाचारी का चुन-चुनकर हिसाब किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता का गुस्सा अब अपने चरम पर पहुंच चुका है और इस बार जनता मां दुर्गा का रूप धारण कर अन्याय का विसर्जन करने को तैयार है।
TMC पर मोदी का सीधा प्रहार — '15 साल की लूट का जवाब देना होगा'
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 15 वर्षों तक तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की जनता को बेरहमी से लूटा, लेकिन यह दल यह भूल गया कि जब अत्याचार की सीमा पार हो जाती है, तो जनशक्ति किसी भी सत्ता को उखाड़ फेंकती है। उन्होंने कहा कि TMC की सरकार नबन्ना सचिवालय से नहीं, बल्कि गुंडों के इशारे पर चलती है, और जब कोर्ट का आदेश आता है तभी यह सरकार हरकत में आती है।
उन्होंने शिक्षक भर्ती घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि TMC के मंत्रियों ने हजारों युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया। एक संवेदनशील सरकार स्वयं ईमानदारी से जांच करती, लेकिन इस मामले में न्यायालय को जांच के आदेश देने पड़े — यही इस सरकार की शून्य विश्वसनीयता का प्रमाण है।
न्यायालय की दखलंदाजी — TMC की विश्वसनीयता पर सवाल
प्रधानमंत्री ने 2023 के पंचायत चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था इतनी कमजोर थी कि न्यायालय को केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश देना पड़ा। इसी प्रकार संदेशखाली कांड की जांच में भी अदालत ने TMC सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय में दर्जनों मामले दायर हुए हैं — चाहे वह भर्ती घोटाला हो, संदेशखाली यौन उत्पीड़न मामला हो या पंचायत चुनावों में हिंसा। यह पैटर्न दर्शाता है कि संस्थागत विफलता कितनी गहरी है।
महिला सशक्तीकरण और BJP के वादे
PM मोदी ने कहा कि बंगाल की हर महिला आज TMC की क्रूर सरकार के खिलाफ खड़ी है। उन्होंने घोषणा की कि BJP सरकार बनने पर बंगाल की 75 लाख बहनों को लखपति दीदी अभियान के तहत सहायता दी जाएगी, जिससे वे प्रतिवर्ष एक लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित कर सकें।
इसके अलावा बंगाल की बेटियों को स्वरोजगार के लिए मुद्रा लोन के तहत 20 लाख रुपए तक की सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि BJP की पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना बंगाल में लागू करने का फैसला होगा, जिससे पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज संभव होगा।
मतदान रिकॉर्ड और जनता का मिजाज
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि बंगाल में मतदान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूटेंगे, और 23 अप्रैल को बंगाल की जनता ने इसे सच साबित कर दिखाया। अब उन्होंने दूसरे चरण के मतदाताओं से आग्रह किया कि वे 23 अप्रैल के मतदान रिकॉर्ड को भी पार करें।
उन्होंने कहा कि TMC नेता इतनी भारी संख्या में मतदाताओं के उमड़ने से हैरान और चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें इसकी उम्मीद ही नहीं थी। बंगाल के हर बूथ पर उमड़ता जनसैलाब एक ही संदेश दे रहा है — 'भय आउट, भरोसा इन।'
गहरा संदर्भ — बंगाल में सत्ता और जवाबदेही का संकट
यह उल्लेखनीय है कि बंगाल कभी भारत में महिला सशक्तीकरण और शिक्षा का अग्रणी राज्य माना जाता था। लेकिन हालिया वर्षों में राज्य में बलात्कार और हत्या की घटनाओं में वृद्धि, शिक्षा भर्ती में भ्रष्टाचार और पंचायत चुनावों में हिंसा ने इस छवि को गहरी चोट पहुंचाई है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल महिलाओं के खिलाफ अपराधों में देश के शीर्ष राज्यों में बना हुआ है।
यह भी विचारणीय है कि TMC सरकार ने केंद्र की आयुष्मान भारत योजना को वर्षों तक लागू नहीं किया, जिससे बंगाल के करोड़ों गरीब स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहे। यह राजनीतिक विरोधाभास — जनकल्याण की कीमत पर केंद्र-विरोध — अब चुनावी मुद्दा बन चुका है।
4 मई को दूसरे चरण का मतदान होना है, और उसके बाद के नतीजे तय करेंगे कि बंगाल की राजनीति में यह जनाक्रोश कितना निर्णायक साबित होता है।