चारधाम यात्रा 2025: 2 दिन के स्थगन के बाद गुरुवार सुबह 6 बजे से फिर शुरू, 45 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 28 और 29 जुलाई को भारी बारिश और भूस्खलन के कारण स्थगित रहने के बाद गुरुवार, 30 जुलाई को सुबह 6 बजे से पुनः सुचारु रूप से संचालित कर दी गई। यात्रा प्रशासन के विशेष कार्याधिकारी प्रजापति नौटियाल ने बताया कि गढ़वाल आयुक्त और शासन के निर्देश पर यात्रा बहाल की गई है।
यात्रा क्यों रोकी गई थी
चारधाम यात्रा मार्ग के कई स्थानों पर भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध हो गए थे और मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने 28 और 29 जुलाई के लिए यात्रा स्थगित करने का निर्णय लिया था। यह इस मौसम में यात्रा का दूसरा बड़ा व्यवधान रहा।
अब तक कितने श्रद्धालु पहुँचे
सरकारी आँकड़ों के अनुसार 25 जुलाई तक उत्तराखंड के चारों धामों में कुल 45,23,412 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। धामवार आँकड़े इस प्रकार हैं — बद्रीनाथ में सर्वाधिक 15,53,525, केदारनाथ में 14,14,590, गंगोत्री में 7,09,418 और यमुनोत्री में 6,49,957 श्रद्धालु पहुँचे। इस वर्ष लगातार बारिश और भूस्खलन के बावजूद यह संख्या उल्लेखनीय मानी जा रही है।
इस साल मौसम का असर
इस साल मानसून के दौरान लगातार बारिश और भूस्खलन ने चारधाम यात्रा को बाधित किया है, जिससे प्रतिदिन यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में मानसूनी आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है। गौरतलब है कि 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से यात्रा प्रशासन ने मौसम-आधारित स्थगन को सुरक्षा नीति का अनिवार्य हिस्सा बना लिया है।
चारधाम यात्रा: पृष्ठभूमि
चारधाम यात्रा हिमालय की ऊँचाई पर स्थित चार पवित्र स्थलों — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — की परिक्रमा है। परंपरा के अनुसार यात्रा दक्षिणावर्त दिशा में यमुनोत्री से आरंभ होकर बद्रीनाथ पर समाप्त होती है। ये मंदिर प्रत्येक वर्ष लगभग छह माह बंद रहते हैं — अप्रैल-मई में खुलते हैं और अक्टूबर-नवंबर में शीतकाल के साथ बंद हो जाते हैं।
आगे क्या
विशेष कार्याधिकारी प्रजापति नौटियाल ने स्पष्ट किया कि शासन और सरकार की ओर से कोई नया निर्देश आने पर श्रद्धालुओं को तत्काल सूचित किया जाएगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नज़र रखते हुए प्रशासन यात्रा की निरंतरता सुनिश्चित करने में जुटा है। यात्रा के शेष माह में श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है।