'सुंदर चीन' निर्माण अभियान: 15वीं पंचवर्षीय योजना में 2030 तक हरित और स्वच्छ चीन का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
चीनी स्टेट काउंसिल ने 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) के तहत 'सुंदर चीन' निर्माण की एक व्यापक योजना जारी की है, जिसका उद्देश्य 2030 तक देश की पारिस्थितिक और पर्यावरणीय गुणवत्ता में समग्र सुधार करना है। इस योजना में हरित उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन को निर्धारित समय-सीमा में अधिकतम स्तर तक सीमित करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
योजना की मुख्य रूपरेखा
चीनी स्टेट काउंसिल द्वारा जारी इस योजना में सात प्रमुख कार्यक्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। इनमें आकाश को नीला, जल को स्वच्छ और भूमि को प्रदूषण-मुक्त रखने की प्रतिबद्धता शामिल है। साथ ही, इकोसिस्टम पुनर्स्थापना, जलवायु परिवर्तन से सक्रिय मुकाबला और हरित जीवनशैली को व्यापक पैमाने पर अपनाने की गति तेज़ करना भी इसमें सम्मिलित है।
योजना के अंतर्गत वायु प्रदूषण नियंत्रण, जल एवं समुद्री पर्यावरण संरक्षण, मृदा प्रदूषण उपचार, औद्योगिक ठोस कचरा प्रबंधन और नए प्रदूषकों के समन्वित उपचार के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स का प्रस्ताव रखा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन वैश्विक स्तर पर अपनी 'हरित महाशक्ति' की छवि को मज़बूत करने में जुटा है।
प्रदूषण-रोधी अभियान के परिणाम
गौरतलब है कि चीन ने पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों और उपकरणों को बंद कर स्वच्छ ऊर्जा आधारित संसाधनों की ओर बड़े पैमाने पर रुख किया है। इसके परिणामस्वरूप, आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में राजधानी बीजिंग में 95 प्रतिशत दिनों में 'ब्लू स्काई' यानी नीला आकाश दर्ज किया गया। बड़े शहरों में स्मॉग की घटनाएँ पहले की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम हुई हैं।
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था को नीति के केंद्र में रखने पर बार-बार ज़ोर देते रहे हैं। उनके नेतृत्व में 'इकोलॉजिकल सिविलाइज़ेशन' की अवधारणा को राष्ट्रीय विकास नीति में प्रमुख स्थान दिया गया है।
2030 तक के प्रमुख लक्ष्य
2030 तक चीन का लक्ष्य समग्र पारिस्थितिक गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ कार्बन पीकिंग — यानी कार्बन उत्सर्जन को उसके उच्चतम स्तर पर सीमित करना — हासिल करना है। हरित उत्पादन प्रणाली और टिकाऊ जीवनशैली को समाज के हर स्तर पर स्थापित करना इस योजना की प्राथमिकता है। योजना में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना गया है।
व्यापक संदर्भ और महत्त्व
यह योजना चीन की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह 2060 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करना चाहता है। आलोचकों का कहना है कि चीन के कोयला उत्पादन और उपभोग के आँकड़े अभी भी ऊँचे हैं, और 'सुंदर चीन' के लक्ष्यों की स्वतंत्र जाँच की व्यवस्था स्पष्ट नहीं है। बहरहाल, यह पहल वैश्विक जलवायु चर्चाओं में चीन की सक्रिय भागीदारी का संकेत देती है।
आने वाले चार-पाँच वर्षों में इस योजना के क्रियान्वयन की गति और परिणाम यह तय करेंगे कि 'सुंदर चीन' का सपना कितना साकार हो पाता है।