12 जुलाई 2026
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दिल्ली में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के तीन शूटर गिरफ्तार, टारगेटेड किलिंग की साजिश नाकाम

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दिल्ली में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के तीन शूटर गिरफ्तार, टारगेटेड किलिंग की साजिश नाकाम

सारांश

दिल्ली पुलिस ने रोहिणी में तीन संदिग्ध शूटरों को पकड़कर एक टारगेटेड किलिंग की साजिश नाकाम कर दी। आरोपी कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई-हरी बॉक्सर गैंग से जुड़े थे और विदेश में बैठे नेटवर्क से निर्देश ले रहे थे — यह गिरफ्तारी FBI के 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के बाद इस नेटवर्क पर कसते शिकंजे की कड़ी है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ ने 12 जुलाई 2026 को तीन संदिग्ध शूटर गिरफ्तार किए।
गिरफ्तार आरोपी हैं — रणदीप मलिक , हरी बॉक्सर और अनिल पंडित ; तीनों पर टारगेटेड किलिंग की साजिश का आरोप।
आरोपियों ने कथित तौर पर ₹1 करोड़ से अधिक की रंगदारी माँगी थी और विदेशी नेटवर्क से निर्देश ले रहे थे।
एक आरोपी को 2024 में हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह जेल से रिहा होने के बाद फिर सक्रिय हो गया था।
FBI के 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' में 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया; लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क को निशाना बनाया गया।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोपियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से सीधा संबंध जाँच का विषय है।

दिल्ली पुलिस के रोहिणी जिला स्पेशल स्टाफ ने 12 जुलाई 2026 को तीन संदिग्ध शूटरों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई-हरी बॉक्सर गैंग के इशारे पर राजधानी में एक टारगेटेड किलिंग को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी नई दिल्ली में कई संवेदनशील स्थानों की रेकी कर रहे थे और उन्हें विदेश में बैठे नेटवर्क से निर्देश मिल रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार तीनों आरोपियों की पहचान रणदीप मलिक, हरी बॉक्सर और अनिल पंडित के रूप में हुई है। रोहिणी के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस शशांक जायसवाल ने बताया, "रणदीप मलिक, हरी बॉक्सर और अनिल पंडित गैंगस्टरों के कहने पर काम कर रहे थे और उनके लिए रेकी भी करते थे।" उन्होंने यह भी खुलासा किया कि तीनों में से एक आरोपी को 2024 में हत्या के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो बाद में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो गया था।

रंगदारी और विदेशी नेटवर्क का कनेक्शन

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने रंगदारी की माँग भी की थी। डीसीपी जायसवाल ने बताया कि "रणदीप मलिक ने शुरू में ₹1 करोड़ की माँग की थी, जिसे बाद में हरी बॉक्सर ने और बढ़ा दिया।" अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों को विदेश में सक्रिय एक नेटवर्क से जानकारी और निर्देश मिल रहे थे। हालाँकि, डीसीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि "आरोपियों के लॉरेंस बिश्नोई गैंग से सीधे संबंध हैं या नहीं, यह जाँच का विषय है।" गौरतलब है कि आरोपी दिल्ली में पहले से कई मामलों में वांछित थे।

ऑपरेशन हार्ड बॉल: अमेरिकी कार्रवाई का संदर्भ

इस गिरफ्तारी से कुछ समय पहले, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अमेरिका की अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' चलाया था, जिसमें 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क था, जो कथित तौर पर उत्तरी अमेरिका और भारत में आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त था।

यह ऐसे समय में आया है जब इस नेटवर्क से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आयाम एक बार फिर चर्चा में हैं। उल्लेखनीय है कि इस ऑपरेशन में खालिस्तानी ऑपरेटिव हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। एक अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई उस आरोप को कमज़ोर करती है जो 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने लगाया था कि निज्जर की हत्या में भारत की भूमिका थी।

आगे की जाँच

फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और रोहिणी स्पेशल स्टाफ मामले की गहन जाँच कर रहा है। जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेश में बैठे किन ऑपरेटरों ने इन्हें निर्देशित किया और राजधानी में किसे निशाना बनाने की योजना थी। यह मामला दिल्ली में संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय गैंग नेटवर्क के बढ़ते खतरे की ओर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समस्या बन चुका है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि जेल से रिहा होने के बाद भी आरोपियों की गैंग तक पहुँच बनी रहती है — यह जेल प्रशासन और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठाता है। निज्जर प्रकरण में भारत की संलिप्तता के साक्ष्य न मिलना एक राजनयिक राहत है, लेकिन इस नेटवर्क की आपराधिक जड़ें काटने का काम अभी बाकी है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शूटरों को क्यों गिरफ्तार किया गया?
दिल्ली पुलिस के रोहिणी स्पेशल स्टाफ ने तीन संदिग्धों को इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि वे कथित तौर पर राजधानी में एक टारगेटेड किलिंग की साजिश रच रहे थे और कई स्थानों की रेकी कर चुके थे। पुलिस के अनुसार, उन्हें विदेश में बैठे नेटवर्क से निर्देश मिल रहे थे।
गिरफ्तार तीन शूटर कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रणदीप मलिक, हरी बॉक्सर और अनिल पंडित के रूप में हुई है। डीसीपी शशांक जायसवाल के अनुसार, तीनों गैंगस्टरों के इशारे पर काम करते थे और रेकी भी करते थे।
क्या इन आरोपियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से सीधा संबंध साबित हुआ है?
अभी नहीं। डीसीपी शशांक जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से सीधा संबंध है या नहीं, यह जाँच का विषय है। पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर 'लॉरेंस बिश्नोई-हरी बॉक्सर गैंग' से जुड़ा बताया है।
'ऑपरेशन हार्ड बॉल' क्या था और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
'ऑपरेशन हार्ड बॉल' FBI और अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों का संयुक्त अभियान था, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क को निशाना बनाते हुए 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। यह ऑपरेशन उत्तरी अमेरिका और भारत में सक्रिय इस आपराधिक सिंडिकेट की गतिविधियों पर केंद्रित था।
निज्जर हत्याकांड में भारत की भूमिका के बारे में ऑपरेशन हार्ड बॉल से क्या सामने आया?
ऑपरेशन हार्ड बॉल में खालिस्तानी ऑपरेटिव हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। एक अधिकारी के अनुसार, यह 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा लगाए गए आरोपों को कमज़ोर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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