9 अगस्त 2026
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चीन का खतरा अमेरिकी रक्षा बहस पर हावी, सीनेट में $1.5 ट्रिलियन बजट पर सुनवाई

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चीन का खतरा अमेरिकी रक्षा बहस पर हावी, सीनेट में $1.5 ट्रिलियन बजट पर सुनवाई

सारांश

अमेरिकी सीनेट की रक्षा सुनवाई में चीन सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरा — रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ उसकी 'आक्रामकों की धुरी' पर गंभीर चिंता जताई गई। $1.5 ट्रिलियन के प्रस्तावित रक्षा बजट और AI सैन्यीकरण की बहस ने इंडो-पैसिफिक में भारत-अमेरिका रणनीतिक तालमेल को नई अहमियत दे दी है।

मुख्य बातें

सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दीर्घकालिक सुरक्षा खतरा बताया गया।
कमेटी अध्यक्ष रोजर विकर ने कहा कि अमेरिका "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे खतरनाक सुरक्षा माहौल" में है।
युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने $1.5 ट्रिलियन के रक्षा बजट को चीन-केंद्रित खतरों से निपटने के लिए ज़रूरी बताया।
जॉइंट चीफ्स के अध्यक्ष डैन केन ने चेतावनी दी कि चीन अपनी सेना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को आक्रामक तरीके से शामिल कर रहा है।
चीन को रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ "आक्रामकों की धुरी" का हिस्सा बताया गया।
इस घटनाक्रम से इंडो-पैसिफिक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और मज़बूत होने की संभावना है।

वॉशिंगटन में 1 मई को आयोजित एक अहम सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता और रूस, ईरान व उत्तर कोरिया के साथ उसकी गहरी होती नजदीकी केंद्रीय मुद्दे के रूप में उभरी। अमेरिका के प्रस्तावित $1.5 ट्रिलियन के रक्षा बजट को लेकर हुई इस सुनवाई के निहितार्थ भारत की रणनीतिक गणनाओं पर भी असर डाल सकते हैं।

सबसे खतरनाक सुरक्षा माहौल की चेतावनी

सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष रोजर विकर ने सुनवाई में कहा कि अमेरिका इस समय

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी गौर करने वाली बात है कि $1.5 ट्रिलियन के विशाल रक्षा बजट के बीच अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला में चीन पर निर्भरता की स्वीकारोक्ति एक गहरी संरचनात्मक विरोधाभास को उजागर करती है। भारत के लिए यह समय है कि वह इस रणनीतिक तालमेल का लाभ उठाते हुए अपनी स्वायत्त रक्षा क्षमताओं को भी मज़बूत करे, न कि केवल किसी एक शक्ति पर निर्भर रहे।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी सीनेट की रक्षा सुनवाई में चीन को लेकर क्या कहा गया?
सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई में चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दीर्घकालिक सुरक्षा खतरा बताया गया। कमेटी अध्यक्ष रोजर विकर ने कहा कि अमेरिका 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे खतरनाक सुरक्षा माहौल' में है और इसके लिए बीजिंग की बढ़ती आक्रामकता को जिम्मेदार ठहराया।
अमेरिका का प्रस्तावित रक्षा बजट कितना है और इसका उद्देश्य क्या है?
युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने $1.5 ट्रिलियन के प्रस्तावित रक्षा बजट को 'कई मोर्चों पर जटिल खतरे के माहौल' से निपटने के लिए ज़रूरी बताया, जिसका केंद्र चीन है। इस बजट में ड्रोन, मिसाइल रक्षा और उन्नत तकनीकों में निवेश पर विशेष जोर दिया गया है।
चीन की AI सैन्य क्षमता को लेकर अमेरिका की क्या चिंता है?
जॉइंट चीफ्स के अध्यक्ष डैन केन ने चेतावनी दी कि चीन अपने युद्ध संचालन के सभी पहलुओं — कमांड, खुफिया और युद्ध अभियानों — में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आक्रामक तरीके से शामिल कर रहा है। केन ने कहा कि अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखना बेहद ज़रूरी है, अन्यथा यह देश को 'जोखिम में डाल सकता है।'
इस रक्षा बहस का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
चीन को मुख्य दीर्घकालिक खतरे के रूप में देखने की वाशिंगटन की नीति इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक तालमेल को और मज़बूत करती है। यह भारत की रणनीतिक गणनाओं और रक्षा साझेदारियों को नई दिशा दे सकती है।
चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया की 'धुरी' क्या है?
सीनेट अध्यक्ष रोजर विकर ने इन चार देशों को 'आक्रामकों की एक धुरी' बताया, जो अमेरिका और उसके लोकतांत्रिक सहयोगियों के हितों का विरोध करने के साझे लक्ष्य से एकजुट हैं। उनके अनुसार चीन इस धुरी का नेतृत्वकर्ता है।
राष्ट्र प्रेस
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