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पश्चिम बंगाल: बिरजू केओट की हिरासत में मौत की जांच अब सीआईडी के हाथ, CM ने परिवार को ₹10 लाख और नौकरी का वादा

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पश्चिम बंगाल: बिरजू केओट की हिरासत में मौत की जांच अब सीआईडी के हाथ, CM ने परिवार को ₹10 लाख और नौकरी का वादा

सारांश

कांचरापाड़ा की पूर्व TMC पार्षद के पति बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में मौत अब सीआईडी जांच के दायरे में है। मुख्यमंत्री ने परिवार से मुलाकात कर ₹10 लाख, मासिक सहायता और सरकारी नौकरी का ऐलान किया। जांच अधिकारी निलंबित, इंस्पेक्टर-इन-चार्ज हटाए गए।

मुख्य बातें

सीआईडी ने बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच अपने हाथ में ली।
बिरजू केओट को 6 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था; 8 अगस्त की तड़के बेहोशी की हालत में जेल से निकाला गया और रास्ते में मौत हो गई।
संबंधित थाने के जांच अधिकारी निलंबित, इंस्पेक्टर-इन-चार्ज पद से हटाए गए।
मजिस्ट्रेट स्तर की जांच की जिम्मेदारी जिलाधिकारी शिल्पी गौरिसारिया को सौंपी गई।
मृतक के परिवार को ₹10 लाख एकमुश्त सहायता, ₹15,000 प्रति माह एक वर्ष तक, और बाद में ग्रुप-डी सरकारी नौकरी देने का वादा।

पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने कांचरापाड़ा नगर पालिका की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद जेनी शर्मा केओट के पति बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच अपने हाथ में ले ली है। 18 अगस्त 2026 को यह कदम उठाया गया, जब राज्य सरकार ने माना कि इस मामले में पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई।

मुख्य घटनाक्रम

बिरजू केओट को 6 अगस्त को जबरन वसूली और मारपीट सहित कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। 8 अगस्त की तड़के उन्हें जेल से बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया और तत्काल कल्याणी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। यह घटना तब से पश्चिम बंगाल में पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

पुलिस पर कार्रवाई

घटना के बाद संबंधित थाने के जांच अधिकारी (आईओ) को निलंबित कर दिया गया है। थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (आईसी) को भी पद से हटाया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य सरकार के निर्देश पर की गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया

10 अगस्त को मुख्यमंत्री स्वयं मृतक के घर पहुँचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने उसी दिन घोषणा की कि हिरासत में मौत के इस मामले की जांच तय नियमों के तहत मजिस्ट्रेट स्तर पर होगी। यह जिम्मेदारी उत्तर 24 परगना जिले की जिलाधिकारी शिल्पी गौरिसारिया को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जांच की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से सीएमओ और मृतक के परिवार को दी जाएगी।

आम जनता और परिवार पर असर

मुख्यमंत्री ने मृतक के दो बच्चों को देखते हुए परिवार को ₹10 लाख की एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की — भले ही परिवार ने इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इसके अलावा मृतक की पत्नी को एक वर्ष तक ₹15,000 प्रति माह की सहायता दी जाएगी, और इसके बाद उन्हें ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। मृतक के एक परिजन को गृह विभाग में अटेंडेंट के पद पर भी नियुक्त करने का वादा किया गया है।

क्या होगा आगे

अब जबकि सीआईडी ने जांच की बागडोर संभाल ली है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मजिस्ट्रेट जांच और सीआईडी की समानांतर जांच मिलकर पारदर्शी नतीजे दे पाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस हिरासत में मौतों को लेकर मानवाधिकार संगठनों की चिंताएँ बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या मजिस्ट्रेट जांच की तरह यह भी कार्यपालिका के दायरे में ही रहेगी। पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना जवाबदेही का पहला कदम है, लेकिन हिरासत में मौतों के मामलों में न्यायिक जांच की माँग अक्सर अनसुनी रह जाती है। परिवार को दी गई राहत राशि और नौकरी का वादा सहानुभूति से अधिक, राजनीतिक क्षति-नियंत्रण की तरह दिखता है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिरजू केओट की मौत कैसे हुई?
बिरजू केओट को 6 अगस्त को जबरन वसूली और मारपीट के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। 8 अगस्त की तड़के उन्हें बेहोशी की हालत में जेल से निकाला गया और कल्याणी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई।
सीआईडी को जांच क्यों सौंपी गई?
राज्य सरकार ने माना कि मामले में पुलिस की ओर से लापरवाही हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर सीआईडी ने जांच अपने हाथ में ली, ताकि मामले की निष्पक्ष और गहन पड़ताल हो सके।
मृतक के परिवार को क्या सहायता दी जाएगी?
मुख्यमंत्री ने ₹10 लाख की एकमुश्त आर्थिक सहायता, एक वर्ष तक ₹15,000 प्रति माह, और इसके बाद मृतक की पत्नी को ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। एक परिजन को गृह विभाग में अटेंडेंट पद पर भी नियुक्त किया जाएगा।
इस मामले में किन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
संबंधित थाने के जांच अधिकारी (आईओ) को निलंबित कर दिया गया है और थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (आईसी) को पद से हटाया गया है।
मजिस्ट्रेट जांच की जिम्मेदारी किसे दी गई है?
हिरासत में मौत की मजिस्ट्रेट स्तर की जांच उत्तर 24 परगना जिले की जिलाधिकारी शिल्पी गौरिसारिया को सौंपी गई है। जांच की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से सीएमओ और मृतक के परिवार को दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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