पश्चिम बंगाल: बिरजू केओट की हिरासत में मौत की जांच अब सीआईडी के हाथ, CM ने परिवार को ₹10 लाख और नौकरी का वादा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने कांचरापाड़ा नगर पालिका की पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद जेनी शर्मा केओट के पति बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच अपने हाथ में ले ली है। 18 अगस्त 2026 को यह कदम उठाया गया, जब राज्य सरकार ने माना कि इस मामले में पुलिस की ओर से लापरवाही बरती गई।
मुख्य घटनाक्रम
बिरजू केओट को 6 अगस्त को जबरन वसूली और मारपीट सहित कई आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। 8 अगस्त की तड़के उन्हें जेल से बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया और तत्काल कल्याणी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। यह घटना तब से पश्चिम बंगाल में पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
पुलिस पर कार्रवाई
घटना के बाद संबंधित थाने के जांच अधिकारी (आईओ) को निलंबित कर दिया गया है। थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज (आईसी) को भी पद से हटाया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य सरकार के निर्देश पर की गई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
10 अगस्त को मुख्यमंत्री स्वयं मृतक के घर पहुँचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने उसी दिन घोषणा की कि हिरासत में मौत के इस मामले की जांच तय नियमों के तहत मजिस्ट्रेट स्तर पर होगी। यह जिम्मेदारी उत्तर 24 परगना जिले की जिलाधिकारी शिल्पी गौरिसारिया को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जांच की प्रगति की जानकारी नियमित रूप से सीएमओ और मृतक के परिवार को दी जाएगी।
आम जनता और परिवार पर असर
मुख्यमंत्री ने मृतक के दो बच्चों को देखते हुए परिवार को ₹10 लाख की एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की घोषणा की — भले ही परिवार ने इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था। इसके अलावा मृतक की पत्नी को एक वर्ष तक ₹15,000 प्रति माह की सहायता दी जाएगी, और इसके बाद उन्हें ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। मृतक के एक परिजन को गृह विभाग में अटेंडेंट के पद पर भी नियुक्त करने का वादा किया गया है।
क्या होगा आगे
अब जबकि सीआईडी ने जांच की बागडोर संभाल ली है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मजिस्ट्रेट जांच और सीआईडी की समानांतर जांच मिलकर पारदर्शी नतीजे दे पाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस हिरासत में मौतों को लेकर मानवाधिकार संगठनों की चिंताएँ बढ़ रही हैं।