सीआईएसएफ आईएचबीएएस एमओयू: जवानों की साइकोमेट्रिक प्रोफाइलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ अब तीन साल के समझौते से
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (आईएचबीएएस) के साथ तीन साल का समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया, जिसका उद्देश्य बल के जवानों के मानसिक स्वास्थ्य को व्यवस्थित ढंग से मज़बूत करना है। इस साझेदारी के तहत संसद भवन परिसर समेत अन्य अति संवेदनशील इकाइयों में तैनात जवानों की विशेष साइकोमेट्रिक प्रोफाइलिंग की जाएगी। यह समझौता सशस्त्र सुरक्षा बलों में मानसिक स्वास्थ्य को संस्थागत ढाँचे में शामिल करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
समझौते का विवरण और हस्ताक्षरकर्ता
एमओयू पर हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन (आईपीएस) ने की। सीआईएसएफ की ओर से आईजी (प्रशासन) प्रतिभा अग्रवाल और आईएचबीएएस की ओर से क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. विभा शर्मा ने दस्तावेज़ों पर दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए। आईएचबीएएस के निदेशक डॉ. राजिंदर के. धमीजा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए इस कार्यक्रम से जुड़े, जबकि एडीजी (मुख्यालय) विजय प्रकाश, डॉ. दीपक कुमार और डॉ. प्रतिभा गहलावत व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।
एमओयू के तहत प्रमुख प्रावधान
इस तीन वर्षीय समझौते के अंतर्गत कई स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। संसद भवन परिसर और अन्य अति संवेदनशील प्रतिष्ठानों में तैनाती से पूर्व जवानों की साइकोमेट्रिक प्रोफाइलिंग की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो कि वे मानसिक रूप से उस ज़िम्मेदारी के लिए तैयार हैं।
मेडिकल और सुपरवाइज़री अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे जवानों में तनाव या व्यवहार परिवर्तन के शुरुआती संकेत समय रहते पहचान सकें। जिन कर्मियों को विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होगी, उन्हें आईएचबीएएस की ओपीडी और आईपीडी सेवाओं के माध्यम से पेशेवर काउंसलिंग तथा नशामुक्ति उपचार, विशेष रूप से शराब की लत से जुड़ी समस्याओं के लिए, उपलब्ध कराया जाएगा।
ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स और हेल्पलाइन
एमओयू में एक 'ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स' (टीओटी) कार्यक्रम भी शामिल है, जिसके ज़रिए सीआईएसएफ के मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे। ये प्रशिक्षित ट्रेनर बल की विभिन्न इकाइयों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता और सहयोगात्मक माहौल विकसित करेंगे। इसके अलावा, तत्काल सहायता के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 'टेली मानस' (14416) के उपयोग को व्यापक रूप से प्रचारित किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया
महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा, "सीआईएसएफ के जवान बेहद चुनौतीपूर्ण और अहम जिम्मेदारी वाले माहौल में काम करते हैं। आईएचबीएएस के साथ यह साझेदारी जवानों की मानसिक परेशानियों की जल्द पहचान, पेशेवर काउंसलिंग और समय पर इलाज की दिशा में हमारे प्रयासों को और मज़बूत करेगी। हमारा मुख्य लक्ष्य एक ऐसा माहौल तैयार करना है जहाँ कोई भी जवान बिना किसी झिझक या डर के मानसिक स्वास्थ्य के लिए मदद माँग सके।"
आईएचबीएएस के निदेशक डॉ. राजिंदर के. धमीजा ने कहा, "विशेषज्ञ मूल्यांकन, पेशेवर काउंसलिंग और उचित क्लिनिकल केयर के ज़रिए हमारा उद्देश्य सीआईएसएफ के बहादुर जवानों को समय पर मदद पहुँचाना और उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मज़बूत बनाना है।"
व्यापक पहल का हिस्सा
गौरतलब है कि सीआईएसएफ पहले से ही हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट (एचएफआई) और एमपॉवर (प्रोजेक्ट मन) के साथ जवानों के मानसिक कल्याण और तनाव प्रबंधन पर कार्य कर रहा है। आईएचबीएएस के साथ यह नया एमओयू उन मौजूदा प्रयासों में एक क्लिनिकल आयाम जोड़ता है — यानी अब केवल जागरूकता तक सीमित नहीं, बल्कि नैदानिक परीक्षण, उपचार और पुनर्वास भी इस ढाँचे का हिस्सा बनेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। आने वाले तीन वर्षों में इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्लिनिकल सेवाएँ ज़मीनी स्तर तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुँचती हैं।