8 अगस्त 2026
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सीआईएसएफ-आईआईटी रोपड़ साझेदारी: हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा के लिए 6 सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग

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सीआईएसएफ-आईआईटी रोपड़ साझेदारी: हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा के लिए 6 सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग

सारांश

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ की यह साझेदारी महज एक प्रशिक्षण समझौता नहीं — यह भारत के सबसे संवेदनशील बुनियादी ढाँचे को डिजिटल कवच देने की रणनीतिक पहल है। छह सप्ताह की निःशुल्क आवासीय ट्रेनिंग से तैयार होगा एक विशेष साइबर कैडर, जो हवाई अड्डों को साइबर हमलों से बचाने में अग्रिम मोर्चे पर खड़ा रहेगा।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ ने 7 अगस्त 2026 को हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा के लिए संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर किए।
जवानों को छह सप्ताह की विशेष आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी, जो पूर्णतः निःशुल्क होगी।
प्रशिक्षण में डिजिटल फोरेंसिक , क्राइसिस सिमुलेशन , आपदा रिकवरी और उभरते साइबर खतरे शामिल हैं।
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के नेतृत्व में त्वरित साइबर प्रतिक्रिया के लिए विशेष कैडर तैयार किया जाएगा।
यह पहल राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूती देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 7 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के साथ एक संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए जवानों को छह सप्ताह की विशेष आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी। यह कदम नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ते साइबर खतरों के मद्देनज़र उठाया गया है, जहाँ किसी भी डिजिटल व्यवधान का असर सुरक्षा, संचालन और अर्थव्यवस्था — तीनों पर एक साथ पड़ सकता है।

समझौते का स्वरूप और उद्देश्य

आईआईटी रोपड़ एससीएएलई फाउंडेशन और सीआईएसएफ के बीच हुई इस साझेदारी के अंतर्गत छह सप्ताह का पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के एयरपोर्ट सेक्टर के जवानों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता प्रदान करना है। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के नेतृत्व में त्वरित साइबर प्रतिक्रिया देने में सक्षम एक विशेष कैडर तैयार किया जाएगा।

प्रशिक्षण में क्या-क्या शामिल

इस कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक — दोनों आयामों को समान महत्व दिया गया है। जवानों को निम्नलिखित विषयों में प्रशिक्षित किया जाएगा:

साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और घटनाओं का पता लगाना, आपदा रिकवरी एवं व्यापार निरंतरता योजना, नए और उभरते साइबर खतरे, तथा मल्टी-सेक्टर क्राइसिस सिमुलेशन। यह पाठ्यक्रम जमीनी चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि जवान वास्तविक परिस्थितियों में भी सक्षमता से कार्य कर सकें।

हवाई अड्डे क्यों हैं सर्वाधिक संवेदनशील

हवाई अड्डे देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना का अभिन्न हिस्सा हैं। यहाँ यात्री प्रबंधन, उड़ान नियंत्रण, सीमा शुल्क और आव्रजन प्रणाली — सभी डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर हाल के वर्षों में विमानन क्षेत्र पर साइबर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में किसी एक प्रणाली में सेंध लगने से पूरे हवाई अड्डे का संचालन ठप हो सकता है।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। इस विशेष 'साइबर सुरक्षा कैडर' के तैयार होने से न केवल विमानन सुरक्षा की नींव मजबूत होगी, बल्कि यह व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढाँचे को भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि छह सप्ताह की ट्रेनिंग उन जवानों के लिए कितनी पर्याप्त होगी जो रोज़ाना परिचालन सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी निभाते हैं। वैश्विक अनुभव बताता है कि साइबर कैडर की प्रभावशीलता एकमुश्त प्रशिक्षण से नहीं, बल्कि निरंतर अपस्किलिंग और लाइव थ्रेट इंटेलिजेंस से आती है। भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्री संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और डिजिटल निर्भरता भी — ऐसे में यह पहल ज़रूरी तो है, पर पर्याप्त तभी होगी जब यह एकबारगी प्रयोग न रहकर एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था बने।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईएसएफ और आईआईटी रोपड़ के बीच क्या समझौता हुआ है?
7 अगस्त 2026 को सीआईएसएफ के एयरपोर्ट सेक्टर और आईआईटी रोपड़ एससीएएलई फाउंडेशन के बीच एक संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत जवानों को छह सप्ताह की निःशुल्क आवासीय साइबर सुरक्षा ट्रेनिंग दी जाएगी। इस साझेदारी का उद्देश्य हवाई अड्डों की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक विशेष कैडर तैयार करना है।
इस साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया जाएगा?
प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, घटनाओं का पता लगाना, आपदा रिकवरी, व्यापार निरंतरता और मल्टी-सेक्टर क्राइसिस सिमुलेशन शामिल हैं। पाठ्यक्रम को जमीनी चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया गया है।
हवाई अड्डों को साइबर सुरक्षा की इतनी ज़रूरत क्यों है?
हवाई अड्डे देश की सबसे संवेदनशील राष्ट्रीय अवसंरचना में से एक हैं, जहाँ उड़ान नियंत्रण, यात्री प्रबंधन और सीमा शुल्क प्रणाली सभी डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर हैं। किसी भी साइबर व्यवधान से सुरक्षा, संचालन और अर्थव्यवस्था — तीनों को एक साथ नुकसान पहुँच सकता है।
यह ट्रेनिंग कार्यक्रम किसके नेतृत्व में चलाया जाएगा?
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के नेतृत्व में यह विशेष साइबर कैडर तैयार किया जाएगा। आईआईटी रोपड़ एससीएएलई फाउंडेशन प्रशिक्षण का शैक्षणिक संचालन करेगा और पूरा कार्यक्रम निःशुल्क आयोजित होगा।
इस पहल का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा पर क्या असर होगा?
इस विशेष साइबर कैडर के तैयार होने से विमानन सुरक्षा के साथ-साथ व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढाँचे को भी मजबूती मिलेगी। भविष्य में इस मॉडल को अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू किए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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