सीआईएसएफ-आईआईटी रोपड़ साझेदारी: हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा के लिए 6 सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 7 अगस्त 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ के साथ एक संस्थागत समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत हवाई अड्डों की साइबर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए जवानों को छह सप्ताह की विशेष आवासीय ट्रेनिंग दी जाएगी। यह कदम नागरिक उड्डयन क्षेत्र में बढ़ते साइबर खतरों के मद्देनज़र उठाया गया है, जहाँ किसी भी डिजिटल व्यवधान का असर सुरक्षा, संचालन और अर्थव्यवस्था — तीनों पर एक साथ पड़ सकता है।
समझौते का स्वरूप और उद्देश्य
आईआईटी रोपड़ एससीएएलई फाउंडेशन और सीआईएसएफ के बीच हुई इस साझेदारी के अंतर्गत छह सप्ताह का पूरा प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ के एयरपोर्ट सेक्टर के जवानों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक और तकनीकी दक्षता प्रदान करना है। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन के नेतृत्व में त्वरित साइबर प्रतिक्रिया देने में सक्षम एक विशेष कैडर तैयार किया जाएगा।
प्रशिक्षण में क्या-क्या शामिल
इस कार्यक्रम में सैद्धांतिक और व्यावहारिक — दोनों आयामों को समान महत्व दिया गया है। जवानों को निम्नलिखित विषयों में प्रशिक्षित किया जाएगा:
साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure) की सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और घटनाओं का पता लगाना, आपदा रिकवरी एवं व्यापार निरंतरता योजना, नए और उभरते साइबर खतरे, तथा मल्टी-सेक्टर क्राइसिस सिमुलेशन। यह पाठ्यक्रम जमीनी चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि जवान वास्तविक परिस्थितियों में भी सक्षमता से कार्य कर सकें।
हवाई अड्डे क्यों हैं सर्वाधिक संवेदनशील
हवाई अड्डे देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना का अभिन्न हिस्सा हैं। यहाँ यात्री प्रबंधन, उड़ान नियंत्रण, सीमा शुल्क और आव्रजन प्रणाली — सभी डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर हैं। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर हाल के वर्षों में विमानन क्षेत्र पर साइबर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में किसी एक प्रणाली में सेंध लगने से पूरे हवाई अड्डे का संचालन ठप हो सकता है।
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा नीति को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। इस विशेष 'साइबर सुरक्षा कैडर' के तैयार होने से न केवल विमानन सुरक्षा की नींव मजबूत होगी, बल्कि यह व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढाँचे को भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।