16 जुलाई 2026
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सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने चंडीगढ़ में सुरक्षा समीक्षा बैठक की, ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण पर जोर

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सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने चंडीगढ़ में सुरक्षा समीक्षा बैठक की, ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण पर जोर

सारांश

सीआईएसएफ प्रमुख प्रवीर रंजन की चंडीगढ़ समीक्षा बैठक महज़ रूटीन नहीं थी — यह सीमावर्ती तनाव के बीच बल की तैयारियों का व्यापक मूल्यांकन था। ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण से लेकर 72 हवाई अड्डों पर क्यूआरटी सुदृढ़ीकरण तक, सीआईएसएफ अपनी सुरक्षा क्षमता को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश में है।

मुख्य बातें

सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 29 मई 2026 को चंडीगढ़ में उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर की परिचालन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है, जो यूएवी का पता लगाने और निष्क्रिय करने पर केंद्रित है।
49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कर्मियों ने सैन्य-स्तरीय 'युद्धकालीन प्रशिक्षण' पूरा किया।
बल का लक्ष्य 2026 के अंत तक 72 हवाई अड्डों पर तैनात सभी क्यूआरटी कर्मियों को यह प्रशिक्षण देना है।
सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी (सीएएसए) की स्थापना का प्रस्ताव गृह मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 29 मई 2026 को चंडीगढ़ में उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर की परिचालन तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न इकाइयों के कमांडरों ने भाग लिया, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और उभरते खतरों से निपटने की रणनीतियों पर विस्तृत मंथन हुआ।

बैठक में क्या हुई चर्चा

बैठक में अंतर-एजेंसी समन्वय को बेहतर बनाने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे और नागरिक उड्डयन प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियाँ अपनाने तथा प्रतिक्रिया क्षमताओं को मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया गया। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र यह समीक्षा विशेष महत्व रखती है।

ड्रोन से जुड़ी चुनौतियों, तोड़फोड़-रोधी उपायों और आपदा प्रतिक्रिया क्षमताओं को लेकर भी गहन विचार-विमर्श हुआ। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों में मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) के ज़रिये सुरक्षा को चुनौती देने की घटनाएँ बढ़ी हैं।

ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण अभियान

निम्न ऊँचाई वाले हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से अपने कर्मियों के लिए एक चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत कर्मियों को शत्रुतापूर्ण यूएवी का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमताएँ प्रदान की जा रही हैं।

बैठक में आतंकवाद-विरोधी, त्वरित प्रतिक्रिया और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में भारतीय सेना तथा अन्य एजेंसियों के साथ जारी संयुक्त प्रशिक्षण पहलों की भी समीक्षा की गई। सीआईएसएफ कर्मियों ने सामरिक प्रतिक्रिया और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की क्षमताएँ बढ़ाने के लिए विभिन्न सेना प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के साथ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए हैं।

विमानन सुरक्षा में तकनीकी उन्नयन

विमानन क्षेत्र में सीआईएसएफ ने अपने सुरक्षा दायरे में आने वाले वाणिज्यिक हवाई अड्डों पर प्रमुख तकनीकी और परिचालन उन्नयन की प्रगति की समीक्षा की। परिधि सुरक्षा को मज़बूत करने, निगरानी नेटवर्क को उन्नत करने और विश्व स्तरीय विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप अगली पीढ़ी के स्क्रीनिंग उपकरण अपनाने पर विचार-विमर्श हुआ।

सीआईएसएफ अपनी हवाई अड्डा क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) को मज़बूत करने के लिए एक समर्पित अभियान चला रही है। अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कर्मियों ने कठोर सैन्य-स्तरीय 'युद्धकालीन प्रशिक्षण' सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। बल का लक्ष्य 2026 के अंत तक अपने सुरक्षा दायरे में शामिल सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात क्यूआरटी कर्मियों को यह प्रशिक्षण देना है।

सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी का प्रस्ताव

विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी (सीएएसए) की स्थापना का प्रस्ताव गृह मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह संस्था देश में विमानन सुरक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।

यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा तंत्र को और अधिक चुस्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। आने वाले महीनों में सीआईएसएफ की तैयारियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति पर सभी की नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर 72 हवाई अड्डों की ज़रूरत के सामने यह अभी शुरुआत भर है। सीएएसए अकादमी का प्रस्ताव दीर्घकालिक सोच दर्शाता है, परंतु गृह मंत्रालय की मंज़ूरी और फिर क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना ही असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईएसएफ की चंडीगढ़ समीक्षा बैठक का उद्देश्य क्या था?
यह बैठक उत्तरी सेक्टर और हवाई अड्डा सेक्टर में परिचालन तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए बुलाई गई थी। इसमें ड्रोन खतरों, तोड़फोड़-रोधी उपायों और अंतर-एजेंसी समन्वय पर विशेष ध्यान दिया गया।
सीआईएसएफ का ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या है?
सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से एक चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें कर्मियों को शत्रुतापूर्ण यूएवी का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने की उन्नत क्षमताएँ दी जाती हैं। यह कार्यक्रम कई विशेष स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है।
सीआईएसएफ क्यूआरटी प्रशिक्षण का लक्ष्य क्या है?
सीआईएसएफ का लक्ष्य 2026 के अंत तक अपने सुरक्षा दायरे में आने वाले सभी 72 हवाई अड्डों पर तैनात क्यूआरटी कर्मियों को सैन्य-स्तरीय युद्धकालीन प्रशिक्षण से लैस करना है। अब तक 49 विमानन सुरक्षा समूहों के 659 कर्मी यह प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
सीआईएसएफ विमानन सुरक्षा अकादमी (सीएएसए) क्या है?
सीएएसए विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान और प्रशिक्षण के लिए प्रस्तावित एक समर्पित संस्था है। इसकी स्थापना का प्रस्ताव वर्तमान में गृह मंत्रालय के समक्ष विचाराधीन है।
किन राज्यों की सुरक्षा चुनौतियाँ इस समीक्षा का आधार बनीं?
जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में उभरती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह समीक्षा बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ये सभी सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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