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सीआईएसएफ को साइबर योद्धा बनाएगा आईआईटी कानपुर, 6 हफ्ते के विशेष कोर्स के लिए एमओयू साइन

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सीआईएसएफ को साइबर योद्धा बनाएगा आईआईटी कानपुर, 6 हफ्ते के विशेष कोर्स के लिए एमओयू साइन

सारांश

देश के हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और बंदरगाहों की रखवाली करने वाले सीआईएसएफ जवानों को अब आईआईटी कानपुर बनाएगा 'साइबर योद्धा'। 6 हफ्ते के इस निःशुल्क आवासीय कोर्स में एआई, डीपफेक और लाइव साइबर रेंज पर ट्रेनिंग — भौतिक सुरक्षा बल के डिजिटल कवच की नई शुरुआत।

मुख्य बातें

आईआईटी कानपुर के सी3आईहब और सीआईएसएफ के बीच 16 सितंबर 2026 को साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
प्रशिक्षण 6 हफ्ते का आवासीय कोर्स होगा, जिसमें हर बैच में 40 सीआईएसएफ कर्मी शामिल होंगे।
यह प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क (गैर-व्यावसायिक) आधार पर दिया जाएगा।
पाठ्यक्रम में डिजिटल फॉरेंसिक , एआई खतरे , डीपफेक , क्लाउड सुरक्षा और सिम्युलेटेड साइबर अटैक शामिल हैं।
सीआईएसएफ हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, बंदरगाहों और अंतरिक्ष संस्थानों की सुरक्षा करता है — इन सभी पर साइबर खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और आईआईटी कानपुर के बीच 16 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत सीआईएसएफ कर्मियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईआईटी कानपुर के साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र सी3आईहब की ओर से आयोजित यह 6 हफ्ते का आवासीय कार्यक्रम देश के सबसे संवेदनशील प्रतिष्ठानों की डिजिटल सुरक्षा को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की संरचना

आईआईटी कानपुर परिसर में आयोजित इस आवासीय प्रशिक्षण के हर बैच में 40 सीआईएसएफ कर्मी शामिल होंगे। उल्लेखनीय बात यह है कि यह पूरा प्रशिक्षण गैर-व्यावसायिक आधार पर होगा और प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आईआईटी कानपुर मीडिया सेल के अनुसार, पाठ्यक्रम को व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

पाठ्यक्रम में क्या-क्या शामिल

प्रशिक्षण में आईटी और नेटवर्किंग की बुनियादी जानकारी से शुरुआत होगी और धीरे-धीरे साइबर घटना प्रबंधन, डिजिटल फॉरेंसिक, सुरक्षा कमजोरियों की पहचान, सिस्टम रिकवरी और बिजनेस कंटीन्यूटी जैसे उन्नत विषयों तक पहुँचा जाएगा। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जनरेटिव एआई, डीपफेक, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी से जुड़े साइबर खतरों पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

सप्लाई चेन अटैक, पहचान की चोरी और एआई के दुरुपयोग जैसे उभरते खतरों से निपटने की रणनीतियाँ भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगी। इस प्रकार यह कोर्स मौजूदा और भविष्य के साइबर खतरों दोनों को संबोधित करता है।

सिम्युलेटेड साइबर अटैक — असली परीक्षा

प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिम्युलेटेड साइबर अटैक अभ्यास होगा, जिसमें सीआईएसएफ कर्मी वास्तविक हमले जैसी परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने और टीमवर्क का अभ्यास करेंगे। लाइव साइबर रेंज पर उन्हें हैकिंग के प्रयासों को रोकने और सिस्टम को पुनः सुरक्षित करने की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। यह अनुभव उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक संकट में सक्षम बनाएगा।

क्यों जरूरी है यह पहल

सी3आईहब के अनुसार, देश के हवाई अड्डे, परमाणु संयंत्र, बंदरगाह, अंतरिक्ष संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा सीआईएसएफ के जिम्मे है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत समेत दुनिया भर में महत्वपूर्ण सरकारी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर साइबर हमलों की आवृत्ति और परिष्कार दोनों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। गौरतलब है कि डिजिटल अवसंरचना पर बढ़ती निर्भरता ने भौतिक सुरक्षा बलों के लिए साइबर दक्षता को उतनी ही आवश्यक बना दिया है, जितनी परंपरागत सुरक्षा प्रशिक्षण।

आगे की राह

इस एमओयू के तहत प्रशिक्षण बैचों का क्रमिक संचालन किया जाएगा। इस साझेदारी से सीआईएसएफ को देश की रक्षा पंक्ति में साइबर सुरक्षा को एकीकृत करने में मदद मिलेगी, जो भविष्य में अन्य केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल स्केल का है — प्रति बैच 40 जवान और देश भर में हजारों संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ की विशाल संख्या के बीच का अंतर बताता है कि यह पहल अभी शुरुआत भर है। गौरतलब है कि भारत में महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे पर साइबर हमलों की रिपोर्टें लगातार बढ़ रही हैं, फिर भी सुरक्षा बलों की साइबर क्षमता निर्माण पर निवेश परंपरागत रूप से सीमित रहा है। निःशुल्क प्रशिक्षण का मॉडल सराहनीय है, किंतु इसे टिकाऊ बनाने के लिए व्यापक नीतिगत ढाँचे और बजट आवंटन की जरूरत होगी — अन्यथा यह एक प्रतीकात्मक पहल बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईआईटी कानपुर और सीआईएसएफ के बीच क्या समझौता हुआ है?
आईआईटी कानपुर के सी3आईहब और सीआईएसएफ के बीच 16 सितंबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत सीआईएसएफ कर्मियों को आईआईटी कानपुर परिसर में 6 हफ्ते का विशेष साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क होगा।
इस साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण में क्या सिखाया जाएगा?
प्रशिक्षण में आईटी-नेटवर्किंग की बुनियादी जानकारी, साइबर घटना प्रबंधन, डिजिटल फॉरेंसिक, सिस्टम रिकवरी, एआई खतरे, डीपफेक, क्लाउड कंप्यूटिंग और लाइव साइबर रेंज पर सिम्युलेटेड साइबर अटैक अभ्यास शामिल हैं। सप्लाई चेन अटैक और पहचान की चोरी जैसे उभरते खतरों से निपटने की रणनीतियाँ भी सिखाई जाएंगी।
इस प्रशिक्षण के लिए सीआईएसएफ को क्यों चुना गया?
सीआईएसएफ देश के हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों, बंदरगाहों और अंतरिक्ष संस्थानों जैसे अत्यंत संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है। इन प्रतिष्ठानों पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, इसलिए सीआईएसएफ जवानों को 'साइबर योद्धा' के रूप में तैयार करना जरूरी समझा गया।
एक बैच में कितने सीआईएसएफ जवान प्रशिक्षण लेंगे और क्या यह मुफ्त है?
हर बैच में 40 सीआईएसएफ कर्मी शामिल होंगे और यह प्रशिक्षण पूरी तरह गैर-व्यावसायिक आधार पर होगा — प्रतिभागियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्रशिक्षण आईआईटी कानपुर के परिसर में आवासीय रूप से आयोजित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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