पश्चिम बंगाल में बाल विवाह पर CM सुवेंदु अधिकारी का जीरो टॉलरेंस, POCSO के तहत होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को राज्य में बाल विवाह और 18 वर्ष से कम उम्र में लड़कियों के मां बनने की उच्च दर पर गहरी चिंता व्यक्त की और स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस सामाजिक समस्या के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर चलेगी। यह संबोधन पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बीरसिंह गांव में प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर की बंगाली कैलेंडर के अनुसार 2027वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दिया गया।
मुख्यमंत्री का बयान और आँकड़ों की चिंता
मुख्यमंत्री अधिकारी ने कार्यक्रम में कहा, 'पश्चिम बंगाल दो मामलों में जम्मू-कश्मीर के साथ शीर्ष स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है — पहला, 18 साल की उम्र पूरी करने से पहले लड़कियों की शादी और दूसरा, 18 साल से पहले लड़कियों का गर्भवती होना और मां बनना। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। राज्य को इस सामाजिक बुराई से पूरी तरह मुक्त करना होगा और हमारी सरकार इसे हर हाल में खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बताई जाती है।
POCSO के तहत सख्त कार्रवाई
इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि अब ऐसे मामलों में पतियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा, जिनमें उनकी पत्नी 18 वर्ष की आयु पूरी करने से पहले मां बन जाती है। इस घोषणा के बाद राज्य पुलिस ने उन नाबालिग लड़कियों के परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है जो 18 साल की उम्र से पहले गर्भवती होती हैं। बुधवार को अपनी चेतावनी दोहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन इस दिशा में कोई ढील नहीं देगा।
पिछली सरकार की आलोचना
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की गलत नीतियों की वजह से पश्चिम बंगाल शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अन्य राज्यों से पिछड़ गया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा संचालित पुस्तकालयों में ममता बनर्जी की लिखी किताबें रखे जाने की कथित प्रथा पर भी सवाल उठाए।
विद्यासागर की विरासत से जोड़ा संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा, 'मैं राज्य के पुस्तकालयों के अधिकारियों से कहूंगा कि वे उन किताबों को रखना बंद करें और उनकी जगह ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा लिखी गई किताबें रखें।' गौरतलब है कि विद्यासागर स्वयं 19वीं सदी में बाल विवाह और विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर क्रांतिकारी सुधारों के अग्रदूत थे — उनकी जयंती पर यह संकल्प प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा
राज्य प्रशासन की ओर से POCSO अधिनियम के तहत प्रवर्तन तेज होने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा, 'हमें हर हाल में स्थिति में सुधार करना होगा और नई सरकार इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।' बाल अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान और आर्थिक सशक्तिकरण कार्यक्रम भी इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक हैं।