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क्या सीएम एमके स्टालिन की पहल संघीय ढांचे को सशक्त करेगी?

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क्या सीएम एमके स्टालिन की पहल संघीय ढांचे को सशक्त करेगी?

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने संघ-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए एक दृष्टिपत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने अन्य मुख्यमंत्रियों से सहयोग की अपील की है। क्या यह पहल देश की संघीयता को एक नई दिशा देगी? जानें इसके पीछे की सोच और योजना।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री ने संघ-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने का आग्रह किया है।
एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट जनवरी 2026 तक प्रस्तुत की जाएगी।
संविधान के मूल सिद्धांतों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
राज्यों की स्वायत्तता को मजबूत करना आवश्यक है।

चेन्नई, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक महत्वपूर्ण दृष्टिपत्र जारी करते हुए देश के अन्य मुख्यमंत्रियों और राजनीतिक दलों के नेताओं से संघ-राज्य संबंधों पर व्यापक सहयोग की अपील की है।

उन्होंने इस पत्र के माध्यम से संविधान में निहित असली संघीय ढांचे को मजबूत करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने पत्र की शुरुआत में लिखा कि भारतीय संविधान ने (1935 के इंडियन गवर्नमेंट एक्ट से प्रेरित) स्वतः ही एक संघीय संरचना स्थापित की थी, जहां केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का संतुलन बना हुआ था, लेकिन समय के साथ यह संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ गया है। उनका कहना है कि मजबूत केंद्र और मजबूत राज्य एक-दूसरे के पूरक हैं, न कि विरोधी।

उन्होंने वर्ष 1967 में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सीएन अन्नादुरई का उदाहरण देते हुए लिखा कि उनका मानना था कि देश की अखंडता की रक्षा के लिए केंद्र को शक्तिशाली होना चाहिए, लेकिन शिक्षा या स्वास्थ्य जैसी जिम्मेदारियां राज्यों को निभानी चाहिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने एम. करुणानिधि द्वारा स्थापित 1969 में गठित राजामन्नार समिति (1971 की रिपोर्ट) का जिक्र किया, जिसे संघ-राज्य संबंधों पर पहला व्यापक अध्ययन माना जाता है। 1974 में तमिलनाडु की विधानसभा ने इस पर आधारित संविधान संशोधन की मांग भी की थी।

उनके अनुसार, पिछले वर्षों में केंद्र से राज्य की शक्तियों का न्यूनीकरण, केंद्रीय नीतियों और वित्तीय निर्भरताओं जैसे मुद्दों ने यह संतुलन खोखला कर दिया है। इन चुनौतियों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ करेंगे। इसमें पूर्व आईएएस अशोक वर्धन शेट्टी और पूर्व राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष प्रो. एम नागनाथन सदस्य होंगे।

इस समिति का उद्देश्य है संविधान, मौजूदा कानूनों, नीतियों और आदेशों की समीक्षा करना और जब्त हुई राज्य-शक्तियों को वापस लौटाने के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है। प्रारंभिक रिपोर्ट जनवरी 2026 तक और अंतिम रिपोर्ट दो वर्षों में प्रस्तुत की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को राजनीति से ऊपर बताते हुए सभी राज्यों से अनुरोध किया है कि वे मानवतावाद और संविधान के मूल स्पिरिट (राज्य स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद) को पुनर्जीवित करें। उन्होंने इस दिशा में तमिलनाडु के वेब पोर्टल पर तैयार प्रश्नावली पर सभी राज्यों द्वारा व्यावहारिक और विचारशील प्रतिक्रियाएं देने को कहा है।

मुख्यमंत्री स्टालिन का कहना है कि राज्य मजबूत हों तभी राष्ट्र मजबूत होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम एमके स्टालिन ने क्या घोषणा की है?
सीएम एमके स्टालिन ने संघ-राज्य संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए एक दृष्टिपत्र जारी किया है।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य संविधान में निहित संघीय ढांचे को मजबूत करना है।
क्या यह पहल राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देगी?
जी हां, यह पहल विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती है।
समिति का गठन क्यों किया गया है?
समिति का गठन राज्य शक्तियों की समीक्षा और ठोस सुझाव तैयार करने के लिए किया गया है।
इस पहल का अंतिम लक्ष्य क्या है?
अंतिम लक्ष्य राज्यों को उनकी शक्तियों को वापस लौटाना और संघीयता को सशक्त करना है।
राष्ट्र प्रेस
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