मसुरियादीन पासी प्रतिमा अनावरण: CM योगी का राहुल गांधी पर तंज — 'सिर्फ नेहरू नहीं, पासी जी भी गए थे जेल'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अक्टूबर 2026 को प्रयागराज के तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य एवं पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे नोट कर लें — देश की आज़ादी के लिए केवल जवाहरलाल नेहरू ही नहीं, बल्कि मसुरियादीन पासी ने भी 9 वर्ष (1932–1944) जेल में बिताए।
मसुरियादीन पासी: संक्षिप्त परिचय
महाशय मसुरियादीन पासी का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था। उनकी आयु 66–67 वर्ष रही, जिसमें से 9 वर्ष उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन में जेल में गुज़ारे। रिहाई के बाद भी वे जन-जागरण में लगे रहे। वे 1946 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने और स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। उल्लेखनीय है कि 1952 में जब एक सीट पर दो सांसद चुने जाते थे, तब पंडित नेहरू और मसुरियादीन पासी एक साथ चुनाव जीतकर संसद पहुँचे थे।
जरायम पेशा कानून के खिलाफ लड़ाई
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में अंग्रेज़ों ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाकर पासी समेत कई जातियों को कथित तौर पर अपमानित किया था। बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मसुरियादीन पासी ने इस काले कानून के विरुद्ध संगठित संघर्ष किया और अंततः इसे समाप्त कराने में सफलता पाई। इस ऐतिहासिक संघर्ष ने पासी, सोनकर, वंचित और दलित समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पासी समाज की वीरगाथा और सरकारी सम्मान
योगी आदित्यनाथ ने पासी समाज के ऐतिहासिक शौर्य को रेखांकित करते हुए कहा कि महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ और आसपास के क्षेत्र में 12 किले बनाए थे, जो विदेशी आक्रांताओं से रक्षा की रणनीतिक कड़ी थे। वीर मक्का पासी आज़ादी की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए, और उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी ने मोर्चा संभालते हुए अंग्रेज़ों से लोहा लिया और बलिदान दिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने लखनऊ स्थित महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार किया है और वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित की जा रही है, जहाँ उनकी अश्वारोही भव्य प्रतिमा भी लगाई जाएगी।
चौराहे और संस्था का नामकरण
मुख्यमंत्री योगी ने महापौर से औपचारिक प्रस्ताव माँगते हुए घोषणा की कि तेलियरगंज चौराहे का नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखा जाएगा। इसके अलावा प्रयागराज की किसी एक प्रमुख संस्था का नाम भी उनके नाम पर किया जाएगा और वहाँ भी भव्य प्रतिमा स्थापित होगी। उन्होंने कहा, 'महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है।'
राजनीतिक संदर्भ और भाजपा का संदेश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि 'सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है।' यह टिप्पणी कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार की ओर स्पष्ट इशारा थी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार विकास और विरासत दोनों पर विश्वास करती है और ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित महापुरुषों को स्मरण में लाती है। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ जब भाजपा और कांग्रेस के बीच दलित-वंचित समाज को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ है। आगामी दिनों में तेलियरगंज चौराहे के नामकरण की औपचारिक प्रक्रिया और संस्था चयन पर प्रशासनिक निर्णय अपेक्षित है।