कांग्रेस की चिंता: झामुमो के असम चुनाव में अकेले उतरने से आदिवासी वोटों का बंटवारा

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कांग्रेस की चिंता: झामुमो के असम चुनाव में अकेले उतरने से आदिवासी वोटों का बंटवारा

सारांश

असम विधानसभा चुनाव में झामुमो के अकेले उतरने के निर्णय पर कांग्रेस ने चिंता जताई है। इससे आदिवासी वोटों में बंटवारे की संभावना है, जो चुनावी परिणामों पर असर डाल सकता है।

मुख्य बातें

झामुमो ने असम चुनाव में 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।
कांग्रेस ने आदिवासी वोटों के बंटवारे की चिंता जताई है।
गठबंधन की कोई सहमति नहीं बनने पर झामुमो ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
झामुमो की रणनीति चाय बागान क्षेत्रों में केंद्रित है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रैलियों में भीड़ को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

रांची, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के निर्णय पर कांग्रेस ने चिंता व्यक्त की है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि झामुमो का यह कदम आदिवासी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है, जिससे उनकी एकजुटता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

कांग्रेस अध्यक्ष के बयान के अनुसार, पार्टी ने असम चुनाव में झामुमो के साथ गठबंधन के लिए गंभीर प्रयास किए थे और 5 से 7 सीटों का प्रस्ताव भी दिया था। इसके साथ ही, जिन सीटों पर झामुमो चुनाव लड़ता, वहां कांग्रेस ने संगठनात्मक समर्थन देने का आश्वासन भी दिया था। कांग्रेस का उद्देश्य झामुमो के प्रतिनिधियों को असम विधानसभा में पहुँचाना था, लेकिन झामुमो ने स्थानीय दलों के समर्थन के आधार पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। वास्तव में, सीट बंटवारे को लेकर सहमति न बनने के बाद झामुमो ने सोमवार को असम विधानसभा के लिए 21 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी।

पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय द्वारा जारी सूची के अनुसार, सभी प्रत्याशी अपने नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। असम में झामुमो की सक्रियता हाल के समय में बढ़ी है। पार्टी को वहां उसका पारंपरिक ‘तीर-धनुष’ चुनाव चिह्न मिल चुका है, जिसे वह एक रणनीतिक लाभ के रूप में देख रही है। झामुमो की चुनावी रणनीति खासकर चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे आदिवासी समुदाय को अब तक अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसी आधार पर झामुमो वहां अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हालिया जनसभाओं में उमड़ी भीड़ को भी पार्टी अपने पक्ष में सकारात्मक संकेत के रूप में देख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन झामुमो ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। यह राजनीतिक स्थिति को और अधिक जटिल बना सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झामुमो ने असम चुनाव में कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है?
झामुमो ने असम विधानसभा चुनाव में 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस ने झामुमो के निर्णय पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
कांग्रेस ने चिंता जताई है कि झामुमो का यह निर्णय आदिवासी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है।
क्या कांग्रेस और झामुमो के बीच गठबंधन की कोई संभावना थी?
हां, कांग्रेस ने झामुमो के साथ गठबंधन के लिए गंभीर पहल की थी और 5 से 7 सीटों का प्रस्ताव दिया था।
झामुमो की चुनावी रणनीति क्या है?
झामुमो की चुनावी रणनीति चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है।
झामुमो ने उम्मीदवारों की सूची कब जारी की?
झामुमो ने सोमवार को असम विधानसभा के लिए 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की।
राष्ट्र प्रेस