झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव में 21 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए, कांग्रेस से नहीं बनी सहमति
सारांश
Key Takeaways
- झामुमो ने असम चुनाव के लिए 21 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए।
- कांग्रेस के साथ सहमति नहीं बनी।
- चुनावी रणनीति टी ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित।
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सक्रियता बढ़ी।
- आदिवासी राजनीति में नया आयाम।
रांची/गुवाहाटी, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव के लिए 21 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सीटों के बंटवारे पर झामुमो और कांग्रेस के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके परिणामस्वरूप, पार्टी ने सोमवार को प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक कर दी।
पार्टी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, सभी उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय द्वारा जारी सूची के अनुसार, झामुमो ने मजबाट सीट से प्रीति रेखा बारला, बिश्वनाथ से तेहारु गौर, खुमताई से अमित नाग, चबुआ से भुबेन मुरारी और गोसाईगांव से फेड्रिक्सन हासदा को मैदान में उतारा है।
सोनारी से बलदेव तेली, दुलियाजान से पीटर मिंज, रंगोनाडी से पाबन साउतल, डिग्बोई से भारत नायक और भेरगांव से प्रभात दास पनिका को भी टिकट दिया गया है। इसी तरह, टिंगखोंग से महाबीर बास्के, बरचल्ला से अब्दुल मजान, रंगापारा से मैथ्यू टोपनो, मारघेरिटा से जरनल मिंज, नाहरकटिया से संजय बाघ, माकुम से मुना कर्माकर और डूमडूमा से रत्नाकर ताती को प्रत्याशी बनाया गया है। सरुपथार से साहिल मुंडा, तिताबोर से सुश्री सोनिया, बोकाजन (एसटी) से प्रतापचिंग रंगफर और खोवांग से प्रभाकर दास को भी टिकट मिला है।
असम में झामुमो की सक्रियता हाल के समय में लगातार बढ़ रही है। पार्टी को चुनाव आयोग से असम में अपना पारंपरिक 'तीर-धनुष' चुनाव चिह्न मिल चुका है, जिसे संगठन अपनी रणनीतिक बढ़त के रूप में देखता है। झामुमो की चुनावी रणनीति विशेष रूप से चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले टी ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आए लाखों आदिवासी समुदाय अब तक मुख्यधारा की राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रहे हैं। इसी सामाजिक आधार पर झामुमो वहां अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है।
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की असम में बढ़ती सक्रियता ने भी इस रणनीति को मजबूती दी है। उन्होंने तिनसुकिया और बिश्वनाथ समेत कई क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करते हुए आदिवासी समुदाय के अधिकार, पहचान और सम्मान के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। इन सभाओं में उमड़ी भीड़ को पार्टी अपने पक्ष में सकारात्मक संकेत के रूप में देखती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो की यह पहल असम में आदिवासी राजनीति के समीकरणों को नया आयाम दे सकती है।