असम चुनाव की तैयारी: गौरव गोगोई और हेमंत सोरेन की मुलाकात के मायने

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असम चुनाव की तैयारी: गौरव गोगोई और हेमंत सोरेन की मुलाकात के मायने

सारांश

असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के बीच हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। यह बैठक संभावित चुनावी तालमेल और रणनीतिक समन्वय पर केंद्रित रही।

Key Takeaways

  • असम विधानसभा चुनाव की तैयारी में विपक्षी दलों का तालमेल आवश्यक है।
  • हेमंत सोरेन ने आदिवासी मुद्दों को उठाया है।
  • गौरव गोगोई की भूमिका कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है।
  • राजनीतिक समन्वय से भाजपा को चुनौती दी जा सकती है।
  • झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे की चर्चा चल रही है।

रांची, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन की गतिविधियों ने पूर्वोत्तर की राजनीति में हलचल मचा दी है।

इसी संदर्भ में, गुरुवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास पर असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने उनसे मुलाकात की। इस बैठक को असम चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों के संभावित तालमेल और रणनीतिक समन्वय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह तथा झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू भी उपस्थित थे। इसे आधिकारिक तौर पर शिष्टाचार मुलाकात कहा गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे असम चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में आगामी असम विधानसभा चुनाव, झारखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं के कार्यान्वयन और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही असम में झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल पर भी प्रारंभिक बातचीत की गई।

पिछले डेढ़ महीने में, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में दो बड़े जनसभाओं को संबोधित किया है। फरवरी में तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा की रैली और विश्वनाथ जिले में हुई सभा में उमड़ी भीड़ ने वहां की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल दिया है।

इन सभाओं में, उन्होंने विशेष रूप से चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और अधिकारों का मुद्दा उठाया। झामुमो का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे लाखों आदिवासी समुदाय राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण शक्ति हैं, जिनकी आवाज अभी तक मुख्यधारा की राजनीति में अपेक्षित रूप से नहीं उठाई गई है। इसी सामाजिक आधार पर पार्टी वहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।

झामुमो के महासचिव और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासियों की मजबूत आवाज बनना है। उनके अनुसार, असम में मिल रहे जनसमर्थन से यह संकेत मिलता है कि वहां के आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो रही हैं।

इस बीच, रांची पहुंचने पर मीडिया से बातचीत करते हुए गौरव गोगोई ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने असम विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की को वरीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति तैयार की जा रही है और इसी सिलसिले में झारखंड के नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। रांची में कांग्रेस नेताओं और हेमंत सोरेन की यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर असम चुनाव की संभावित रणनीति के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है।

Point of View

बल्कि आदिवासी समुदाय के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
NationPress
13/03/2026

Frequently Asked Questions

असम चुनाव में विपक्षी दलों का तालमेल क्यों महत्वपूर्ण है?
यह तालमेल भाजपा को चुनौती देने और चुनावी सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हेमंत सोरेन की असम में क्या भूमिका है?
वे झामुमो के अध्यक्ष हैं और आदिवासी मुद्दों पर जोर देकर राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं।
गौरव गोगोई का असम चुनाव में क्या योगदान है?
वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और विपक्षी रणनीति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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