31 जुलाई 2026
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विश्व स्तनपान सप्ताह 2026: कोलोस्ट्रम से लेकर कार्यस्थल नीति तक, जानें क्यों ज़रूरी है माँ का दूध

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विश्व स्तनपान सप्ताह 2026: कोलोस्ट्रम से लेकर कार्यस्थल नीति तक, जानें क्यों ज़रूरी है माँ का दूध

सारांश

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की थीम 'जो कारगर है उसे मज़बूत करो' सिर्फ नारा नहीं — यह उस खाई को पाटने का आह्वान है जहाँ दुनिया के आधे से भी कम शिशुओं को छह महीने तक केवल माँ का दूध मिल पाता है। कोलोस्ट्रम से लेकर कार्यस्थल नीति तक, हर कड़ी मायने रखती है।

मुख्य बातें

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 का आयोजन 1 से 7 अगस्त तक, WHO और UNICEF के नेतृत्व में।
इस वर्ष की थीम: 'जीवन की सस्टेनेबल शुरुआत के लिए स्तनपान: जो तरीका कारगर है, उसे और मजबूत करें।' जन्म के एक घंटे के भीतर कोलोस्ट्रम पिलाना आवश्यक; यह नवजात के लिए प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है।
आँकड़ों के अनुसार दुनिया में छह महीने से कम उम्र के आधे से भी कम बच्चों को विशेष स्तनपान मिलता है।
सामुदायिक परामर्श से स्तनपान दर में 58% , BFHI अपनाने वाले अस्पतालों में 45% और जागरूकता अभियानों से 17% तक वृद्धि दर्ज।
पर्याप्त सवैतनिक मातृत्व अवकाश पाने वाली महिलाओं में विशेष स्तनपान की संभावना 52% अधिक।

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 इस वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) के नेतृत्व में यह वैश्विक अभियान न केवल माताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करता है, बल्कि ऐसी सामाजिक और संस्थागत व्यवस्था बनाने पर भी ज़ोर देता है जिसमें हर महिला निर्बाध रूप से अपने शिशु को स्तनपान करा सके।

इस वर्ष की थीम

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की थीम है — 'जीवन की सस्टेनेबल शुरुआत के लिए स्तनपान: जो तरीका कारगर है, उसे और मजबूत करें।' यह थीम उन साक्ष्य-आधारित उपायों को और सुदृढ़ करने का आह्वान करती है जो पहले से प्रभावी सिद्ध हो चुके हैं। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्तनपान दरें अभी भी अपेक्षित लक्ष्यों से पीछे हैं।

कोलोस्ट्रम: नवजात की पहली प्राकृतिक सुरक्षा

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को माँ का पहला दूध — जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है — अवश्य पिलाया जाना चाहिए। यह गाढ़ा, पीले रंग का दूध एंटीबॉडी और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शिशु को संक्रमण और बीमारियों से बचाने में किसी प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है।

WHO की सिफारिश है कि जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध ही दिया जाए, क्योंकि यह उसके स्वस्थ शारीरिक विकास और मज़बूत रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए सर्वाधिक उपयुक्त आहार है। बावजूद इसके, आँकड़ों के अनुसार दुनिया में छह महीने से कम उम्र के आधे से भी कम बच्चों को विशेष स्तनपान मिल पाता है — यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

क्या कहते हैं शोध और आँकड़े

कई अध्ययनों के निष्कर्ष बताते हैं कि अस्पताल, घर और समुदाय स्तर पर उचित परामर्श मिलने पर विशेष स्तनपान की दर में करीब 58 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी क्रम में बेबी-फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव (BFHI) भी उल्लेखनीय रूप से प्रभावी साबित हुआ है — इस पहल को अपनाने वाले अस्पतालों में छह महीने तक विशेष स्तनपान की दर में 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई।

जागरूकता अभियानों की भूमिका भी कम नहीं है। जब टेलीविज़न, रेडियो, सोशल मीडिया और सामुदायिक कार्यक्रमों को स्वास्थ्य परामर्श के साथ जोड़ा गया, तो स्तनपान दर में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

नीति और कार्यस्थल का अहम योगदान

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नीतियाँ इस दिशा में निर्णायक बदलाव ला सकती हैं। जिन देशों में माँ के दूध के विकल्पों के प्रचार पर कड़े नियम लागू हैं, वहाँ स्तनपान की दर बेहतर पाई गई है। इसके अलावा, शोध बताते हैं कि पर्याप्त सवैतनिक मातृत्व अवकाश (Paid Maternity Leave) मिलने वाली महिलाओं में विशेष स्तनपान की संभावना 52 प्रतिशत तक अधिक होती है।

आज बड़ी संख्या में महिलाएँ कार्यरत हैं, इसलिए कार्यस्थल पर स्तनपान के अनुकूल माहौल — जैसे दूध निकालकर सुरक्षित रखने की सुविधा और पर्याप्त विराम — की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। जिन संस्थानों में ये सुविधाएँ हैं, वहाँ माताएँ अधिक समय तक शिशु को स्तनपान करा पाती हैं।

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि माताओं को सही जानकारी, परिवार का सहयोग और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच एक साथ मिले, तो स्तनपान दर में उल्लेखनीय सुधार संभव है। विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 इसी समग्र दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का अवसर है — जहाँ व्यक्तिगत जागरूकता के साथ-साथ संस्थागत और नीतिगत समर्थन को भी समान महत्व दिया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वैश्विक स्तनपान दरें एक दशक से सुस्त गति से ही बढ़ी हैं — यह सवाल उठाता है कि जागरूकता अभियान अकेले पर्याप्त हैं या नहीं। असली अंतर नीतिगत हस्तक्षेप से आता है: जहाँ सवैतनिक मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल सुविधाएँ मज़बूत हैं, वहाँ दरें बेहतर हैं — यह संयोग नहीं, कारण-कार्य संबंध है। भारत में जहाँ असंगठित क्षेत्र में करोड़ों महिलाएँ काम करती हैं और मातृत्व लाभ की पहुँच सीमित है, वहाँ 'थीम' से आगे बढ़कर संरचनात्मक बदलाव की ज़रूरत है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 कब है और इसकी थीम क्या है?
विश्व स्तनपान सप्ताह 2026, 1 अगस्त से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है — 'जीवन की सस्टेनेबल शुरुआत के लिए स्तनपान: जो तरीका कारगर है, उसे और मजबूत करें।'
कोलोस्ट्रम क्या है और यह नवजात के लिए क्यों ज़रूरी है?
कोलोस्ट्रम माँ का पहला दूध होता है — गाढ़ा, पीले रंग का — जो जन्म के तुरंत बाद उत्पन्न होता है। इसमें एंटीबॉडी और पोषक तत्व होते हैं जो नवजात को संक्रमण से बचाते हैं, इसीलिए इसे प्राकृतिक टीका कहा जाता है। विशेषज्ञ जन्म के एक घंटे के भीतर इसे पिलाने की सलाह देते हैं।
WHO के अनुसार कितने समय तक केवल माँ का दूध पिलाना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिश है कि जन्म के बाद शुरुआती छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध दिया जाए। इस अवधि में कोई अन्य आहार या पानी देने की आवश्यकता नहीं होती।
स्तनपान दर बढ़ाने में कौन-से उपाय सबसे प्रभावी पाए गए हैं?
अध्ययनों के अनुसार सामुदायिक परामर्श से स्तनपान दर में 58% तक, बेबी-फ्रेंडली हॉस्पिटल इनिशिएटिव (BFHI) से 45% तक और मीडिया-आधारित जागरूकता अभियानों से 17% तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्याप्त सवैतनिक मातृत्व अवकाश पाने वाली महिलाओं में विशेष स्तनपान की संभावना 52% अधिक होती है।
कामकाजी महिलाएँ स्तनपान कैसे जारी रख सकती हैं?
कार्यस्थल पर स्तनपान के अनुकूल माहौल — जैसे दूध निकालकर सुरक्षित रखने की सुविधा, पर्याप्त विराम और सवैतनिक मातृत्व अवकाश — से कामकाजी माताएँ लंबे समय तक स्तनपान जारी रख सकती हैं। जिन संस्थानों में ये सुविधाएँ उपलब्ध हैं, वहाँ स्तनपान की अवधि उल्लेखनीय रूप से अधिक पाई गई है।
राष्ट्र प्रेस
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