प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026: नामांकन की अंतिम तिथि बढ़कर 15 अगस्त हुई
सारांश
मुख्य बातें
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) 2026 के लिए ऑनलाइन नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 15 अगस्त 2026 कर दी है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। यह विस्तार उन बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक अतिरिक्त अवसर है जो समय पर नामांकन नहीं कर पाए थे।
नामांकन प्रक्रिया और पात्रता
आधिकारिक बयान के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल के माध्यम से शुरू हुई थी। स्व-नामांकन और किसी भी नागरिक द्वारा सिफारिश — दोनों ही केवल इसी पोर्टल के ज़रिए स्वीकार किए जाएंगे।
पात्रता की शर्तों के अनुसार, आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए, भारत में निवासरत होना चाहिए, और 31 जुलाई 2026 तक उसकी आयु 5 वर्ष से अधिक और 18 वर्ष से कम होनी चाहिए।
किन क्षेत्रों में उपलब्धि पर मिलता है पुरस्कार
यह पुरस्कार उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने बहादुरी, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला और संस्कृति, तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। यह पुरस्कार बाल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का सबसे प्रतिष्ठित माध्यम माना जाता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 का भी ऐलान
इसी के साथ मंत्रालय ने 1 से 7 अगस्त 2026 तक देशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 मनाने की घोषणा की है। इस वर्ष की थीम है — 'जीवन की सतत शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें।'
इस सप्ताह भर चलने वाले अभियान का उद्देश्य परिवारों, समुदायों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करने, पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराने, और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के साथ-साथ उचित पूरक आहार के बारे में जागरूकता फैलाना है।
स्तनपान पर मंत्रालय की अपील
मंत्रालय ने परिवारों से आग्रह किया है कि हर नवजात को जन्म के पहले घंटे के भीतर माँ का दूध मिले — इसे 'गोल्डन आवर' कहा जाता है। पहला दूध यानी कोलोस्ट्रम, जिसे बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका भी कहते हैं, एंटीबॉडी और आवश्यक पोषण से भरपूर होता है और इसे कभी नहीं फेंकना चाहिए।
बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि पहले छह महीने तक केवल स्तनपान का अर्थ है बच्चे को सिर्फ माँ का दूध देना — कोई पानी, शहद, घुट्टी, ग्लूकोज या फॉर्मूला नहीं। इस अवधि में बच्चे की पोषण और जलयोजन की सभी ज़रूरतें केवल माँ का दूध ही पूरी करता है।
आगे क्या
जो बच्चे या उनके अभिभावक अब तक नामांकन नहीं कर पाए हैं, वे 15 अगस्त 2026 तक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। मंत्रालय ने इस विस्तार को अधिक से अधिक प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।