असम में चुनाव से पहले पूर्व एजीपी नेता जयंत खौंड ने कांग्रेस का हाथ थामा
सारांश
Key Takeaways
- जयंत खौंड का कांग्रेस में शामिल होना राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
- यह कदम असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ जन असंतोष को दर्शाता है।
- भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाए गए हैं।
- राजनीतिक परिदृश्य में संभावित बदलाव की संभावना है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विधानसभा चुनावों के नजदीक आने पर सोमवार को असम कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा। असम गण परिषद (एजीपी) के पूर्व राष्ट्रीय वित्त सचिव जयंत खौंड ने कई अन्य नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया है।
जयंत खौंड का कांग्रेस में औपचारिक स्वागत नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में किया गया। इस मौके पर असम प्रभारी और एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और असम के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक डीके शिवकुमार, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई और राष्ट्रीय सचिव मनोज चौहान सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे।
खौंड का पार्टी में स्वागत करते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि उनके जैसे जमीनी नेता का कांग्रेस में शामिल होना मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व के खिलाफ असम में बढ़ते जन असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि सत्ताधारी खेमे के कई नेता मौजूद नेतृत्व में असहज महसूस कर रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री सक्रिय और ईमानदार कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करते हुए भ्रष्ट तत्वों को बढ़ावा दे रहे हैं।
गोगोई ने कहा कि खौंड का कांग्रेस में शामिल होना असम में राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
भाजपा पर निशाना साधते हुए असम कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी की रणनीति क्षेत्रीय पहचान को कमजोर करना और धीरे-धीरे क्षेत्रीय दलों का अंत करना है। ओडिशा और बिहार का उदाहरण देते हुए सिंह ने बताया कि भाजपा पहले गठबंधन बनाती है और फिर अपने सहयोगियों को राजनीतिक रूप से खत्म करने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि असम में भी एजीपी को कमजोर करने के लिए इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं और खौंड के कांग्रेस में शामिल होने से असम की संस्कृति और मूल्यों की रक्षा के संघर्ष को मजबूती मिलेगी।