31 जुलाई 2026
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बीआरएस नेता और नरसमपेट के पूर्व विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी का 52 वर्ष की आयु में निधन

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बीआरएस नेता और नरसमपेट के पूर्व विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी का 52 वर्ष की आयु में निधन

सारांश

तेलंगाना आंदोलन के सक्रिय सहभागी और बीआरएस नेता पेड्डी सुदर्शन रेड्डी का 52 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पल्मोनरी एम्बोलिज्म से हुए कार्डियक अरेस्ट के बाद पाँच दिन वेंटिलेटर पर रहे। केसीआर, रेवंत रेड्डी और केटीआर ने उन्हें अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्य बातें

पेड्डी सुदर्शन रेड्डी का 31 जुलाई 2026 को हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में 52 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
26 जुलाई को पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ; 45 मिनट सीपीआर के बाद होश लाया गया, परंतु मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुँची।
वे 2018 में नरसमपेट विधानसभा क्षेत्र से बीआरएस (तत्कालीन टीआरएस) विधायक चुने गए थे।
2018-2023 के बीच तेलंगाना राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और लोक लेखा समिति के सदस्य रहे।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी , बीआरएस अध्यक्ष केसीआर और कार्यकारी अध्यक्ष के.
रामा राव ने गहरा शोक व्यक्त किया।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के वरिष्ठ नेता और नरसमपेट के पूर्व विधायक पेड्डी सुदर्शन रेड्डी का 31 जुलाई 2026 को हैदराबाद के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 52 वर्ष के थे। 26 जुलाई को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए सुदर्शन रेड्डी वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे और अंततः शुक्रवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री हैं।

बीमारी और उपचार का क्रम

हनमकोंडा स्थित अपने आवास पर सुदर्शन रेड्डी अचानक गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल में आपातकालीन उपचार दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म — अर्थात फेफड़ों में रक्त का थक्का जमने — के कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ था।

चिकित्सकों ने लगभग 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें होश में लाया, परंतु न्यूरोलॉजिकल रिस्पॉन्स न मिलने के कारण स्थिति गंभीर बनी रही। मेडिकल जाँच में पुष्टि हुई कि लंबे समय तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित रहने से उनके मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुँची थी। इसके बाद उन्हें हैदराबाद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहाँ वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहे।

राजनीतिक सफर और तेलंगाना आंदोलन में भूमिका

6 अगस्त 1974 को वारंगल जिले के एक किसान परिवार में जन्मे सुदर्शन रेड्डी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की। 2001 में जब के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की स्थापना की, तो सुदर्शन रेड्डी उनके साथ जुड़ गए और तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

उन्होंने नल्लाबेल्ली मंडल से जिला परिषद क्षेत्रीय समिति (जेडपीटीसी) सदस्य के रूप में कार्य किया और जिला परिषद फ्लोर लीडर का दायित्व भी संभाला। अविभाजित वारंगल जिले के पार्टी अध्यक्ष और राज्य पोलित ब्यूरो के सदस्य के रूप में उन्होंने वारंगल में आयोजित बड़ी जनसभाओं और रैलियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

2014 के विधानसभा चुनाव में नरसमपेट से टीआरएस उम्मीदवार के रूप में वे जीत हासिल नहीं कर पाए, लेकिन 2018 में दूसरे प्रयास में उन्होंने नरसमपेट विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की। 2018 से 2023 के बीच उन्होंने तेलंगाना राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और विधानसभा की लोक लेखा समिति के सदस्य के रूप में उल्लेखनीय योगदान दिया।

नेताओं की श्रद्धांजलि

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सुदर्शन रेड्डी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तेलंगाना आंदोलन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उन्होंने परिजनों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदनाएँ प्रकट कीं।

बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर ने इस निधन को तेलंगाना के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उन्होंने एक करीबी मित्र एवं भरोसेमंद साथी को खो दिया है। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने कहा कि यह खबर दिल तोड़ने वाली है और तेलंगाना राज्य गठन आंदोलन में सुदर्शन रेड्डी की भूमिका सदा स्मरणीय रहेगी।

आगे क्या

सुदर्शन रेड्डी के निधन के साथ बीआरएस ने एक जमीनी स्तर के संगठनकर्ता और केसीआर परिवार के विश्वस्त सहयोगी को खो दिया है। तेलंगाना की राजनीति में उनके योगदान और आंदोलन की विरासत को पार्टी आने वाले समय में याद करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह स्मृति-राजनीति तक सिमट जाएगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेड्डी सुदर्शन रेड्डी कौन थे?
पेड्डी सुदर्शन रेड्डी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के वरिष्ठ नेता और नरसमपेट विधानसभा क्षेत्र से 2018 में निर्वाचित पूर्व विधायक थे। वे तेलंगाना आंदोलन के सक्रिय सहभागी और केसीआर के करीबी सहयोगी माने जाते थे।
सुदर्शन रेड्डी का निधन कैसे हुआ?
डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म — फेफड़ों में रक्त का थक्का जमने — के कारण 26 जुलाई को उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। 45 मिनट सीपीआर के बाद होश आया, लेकिन मस्तिष्क को ऑक्सीजन न मिलने से गंभीर क्षति हुई और 31 जुलाई को हैदराबाद के निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।
सुदर्शन रेड्डी ने तेलंगाना आंदोलन में क्या भूमिका निभाई?
सुदर्शन रेड्डी 2001 में टीआरएस की स्थापना के समय से ही केसीआर के साथ जुड़े और तेलंगाना को अलग राज्य दिलाने के आंदोलन में वारंगल क्षेत्र में जनसभाओं व रैलियों का नेतृत्व किया। वे अविभाजित वारंगल जिले के पार्टी अध्यक्ष और राज्य पोलित ब्यूरो के सदस्य भी रहे।
सुदर्शन रेड्डी के निधन पर किन नेताओं ने शोक जताया?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर, तथा बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामा राव ने गहरा शोक व्यक्त किया। केसीआर ने इसे तेलंगाना के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
सुदर्शन रेड्डी ने विधायक के अलावा और कौन-से पद संभाले?
2018 से 2023 के बीच उन्होंने तेलंगाना राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष और विधानसभा की लोक लेखा समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। इससे पहले वे नल्लाबेल्ली मंडल से जेडपीटीसी सदस्य और जिला परिषद फ्लोर लीडर भी रहे।
राष्ट्र प्रेस
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