क्या मनरेगा का नाम बदलने से गरीबों को मिलेगा रोजगार?
सारांश
Key Takeaways
- मनरेगा का नाम परिवर्तन विवादित है।
- संदीप दीक्षित ने सरकार के निर्णय का विरोध किया।
- यह योजना गरीबों के लिए महत्वपूर्ण है।
- कांग्रेस का अभियान चल रहा है।
- मनरेगा एक अधिकार है, ना कि केवल योजना।
नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत–जी राम जी’ करने और उसमें किए गए संशोधनों के खिलाफ कांग्रेस ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ चला रही है। इसी संदर्भ में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के निर्णय पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मनरेगा की उपयोगिता और आवश्यकता को साबित करने की अब कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह योजना वर्षों से गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए सहारा बनी है।
संदीप दीक्षित ने कहा कि मनरेगा कोई नया प्रयोग नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसने देश के करोड़ों लोगों को सम्मान के साथ रोजगार दिया है। विशेष रूप से कोरोना काल में यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं थी। जब चारों ओर बेरोजगारी और अनिश्चितता का माहौल था, तब मनरेगा ने लाखों परिवारों को भूखे मरने से बचाया। उन्होंने कहा कि गरीब, खेत मजदूर और भूमिहीन किसान के मन में मनरेगा ने एक अधिकार की तरह अपनी जगह बना ली है।
उन्होंने बताया कि जब से सरकार ने मनरेगा में बदलाव किए हैं और एक नया कानून लाया है, कांग्रेस हर स्तर पर इसका विरोध कर रही है। यह विरोध केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि उन लोगों की आवाज है, जिनका जीवन इस योजना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार जिन बदलावों को विकास के नाम पर पेश कर रही है, वे वास्तव में गरीबों से उनका हक छीनने की कोशिश हैं।
संदीप दीक्षित ने कहा कि पिछले करीब 20-25 दिनों से देश के विभिन्न राज्यों, जिलों और पंचायत स्तर पर मनरेगा के लिए अभियान चल रहा है। कांग्रेस के कार्यकर्ता, मनरेगा से जुड़े मजदूर, यूनियन और सामाजिक संगठन मिलकर लोगों के बीच जा रहे हैं और उन्हें बता रहे हैं कि यह योजना उनके लिए कितनी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस दौरान यह स्पष्ट दिखा कि केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि कई स्वतंत्र संगठन, मजदूर यूनियन और छोटे व भूमिहीन किसानों के साथ काम करने वाले लोग भी इस बदलाव के खिलाफ हैं।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सालों तक मनरेगा में काम किया है, उन्होंने इसकी ताकत को नजदीक से देखा है। चाहे गांव की सड़कें हों, तालाब हों या ग्रामीण ढांचा, मनरेगा ने हर जगह अपनी भूमिका निभाई है। खासकर गरीब तबके के लोगों के लिए यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का जरिया बनी है।
संदीप दीक्षित ने यह भी कहा कि सरकार यह भूल रही है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि लोगों का अधिकार है। कांग्रेस और अन्य संगठनों का मानना है कि वर्तमान सरकार इस अधिकार को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। इसी कारण से कई संगठनों से बातचीत की गई और तय किया गया कि इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसी सिलसिले में गुरुवार को जवाहर भवन में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 300-400 मनरेगा कार्यकर्ता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि ये लोग किसी बुलावे पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से आ रहे हैं ताकि आपस में बातचीत कर सकें और आगे की रणनीति तय कर सकें।
संदीप दीक्षित ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर संघर्ष की दिशा तय करना है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस एक नया मंच है, जो ऐसे ही सामाजिक मुद्दों को लेकर लोगों को जोड़ने का काम करेगा। इसके उद्देश्यों और भविष्य की योजनाओं पर आगे विस्तार से चर्चा की जाएगी।