क्या कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के लिए समिति का गठन किया है, अजय माकन संभालेंगे कमान?

Click to start listening
क्या कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के लिए समिति का गठन किया है, अजय माकन संभालेंगे कमान?

सारांश

कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया है। अजय माकन के नेतृत्व में, यह समिति मनरेगा के अधिकारों की रक्षा करेगी। यह कदम ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। जानिए इस आंदोलन की महत्ता और इसके प्रभावों के बारे में।

Key Takeaways

  • समिति का गठन अजय माकन के नेतृत्व में हुआ है।
  • समिति में 9 सदस्य शामिल हैं।
  • यह आंदोलन ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए है।
  • कांग्रेस का यह कदम केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ है।
  • मनरेगा ग्रामीण विकास की रीढ़ है।

नई दिल्ली, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) आंदोलन को तेज़ी देने के लिए एक समन्वय समिति का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व वरिष्ठ नेता अजय माकन को सौंपा गया है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के लिए 9 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया है जिसके संयोजक अजय माकन होंगे। यह समिति मनरेगा बचाओ संग्राम की निगरानी, मार्गदर्शन और देखरेख का कार्य करेगी। समिति तुरंत अपने कार्य आरंभ करेगी।

समिति में अजय माकन के अलावा जयराम रमेश, संदीप दीक्षित, डॉ. उदित राज, प्रियांक खड़गे, डी. अनसूया सीताक्का, दीपिका पांडे सिंह, डॉ. सुनील पंवार और मनीष शर्मा शामिल हैं।

वेणुगोपाल ने बताया कि सभी फ्रंटल संगठनों के प्रमुख, एआईसीसी ओबीसी, एससी, अल्पसंख्यक, आदिवासी कांग्रेस विभागों और किसान कांग्रेस के अध्यक्ष भी इस समन्वय समिति के सदस्य होंगे।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा के अधिकार आधारित स्वरूप की रक्षा के लिए पूरे देश में एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। वेणुगोपाल ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों (पीसीसी) को पत्र लिखकर 'मनरेगा बचाओ संग्राम' की राष्ट्रव्यापी शुरुआत की जानकारी दी है।

यह आंदोलन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के खिलाफ शुरू किया जा रहा है, जिसे कांग्रेस ने ग्रामीण रोजगार और आजीविका पर सीधा हमला बताया है।

उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया मनरेगा एक अधिकार-आधारित कानून है। यह कानून ग्रामीण परिवारों को मजदूरी रोजगार की मांग करने का कानूनी अधिकार देता है। इसके अंतर्गत राज्य सरकारों को 15 दिनों के भीतर काम प्रदान करना अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की सबसे बड़ी पहचान है।

कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण आजीविका की रीढ़ रहा है, जिससे हर साल 5 से 6 करोड़ परिवारों को रोजगार मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप पलायन कम हुआ है, ग्रामीण मजदूरी में वृद्धि हुई है और गांवों में टिकाऊ सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण हुआ है। इस योजना से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित वर्गों को विशेष लाभ मिला है। कुल कार्यदिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बताई गई है।

Point of View

बल्कि यह ग्रामीण विकास और समाज के वंचित वर्गों की भलाई के लिए भी आवश्यक है।
NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

मनरेगा क्या है?
मनरेगा, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार देता है।
कांग्रेस ने समिति का गठन क्यों किया?
कांग्रेस ने मनरेगा के अधिकारों की सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के लिए समिति का गठन किया है।
इस समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में अजय माकन, जयराम रमेश, संदीप दीक्षित, और अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं।
यह आंदोलन कब शुरू होगा?
यह आंदोलन तुरंत प्रभाव से शुरू होगा।
मनरेगा का मुख्य लाभ क्या है?
मनरेगा ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
Nation Press