टीएमसी नेता शशि पांजा ने कहा—चुनाव आयोग की मनमानी को रोकने के लिए न्यायिक निगरानी आवश्यक
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कोलकाता, २४ फ़रवरी (राष्ट्र प्रेस)। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा शासित पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में गहन पुनरीक्षण पर विवाद जारी है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की प्रक्रिया को न्यायिक अधिकारी की निगरानी में कराने का निर्देश दिया। टीएमसी नेता डॉ. शशि पांजा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का समर्थन किया।
डॉ. शशि पांजा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "सुप्रीम कोर्ट की नजर पूरी प्रक्रिया पर है। पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में एसआईआर का जो कार्य चल रहा है, वह सही तरीके से नहीं हो रहा है। यही कारण है कि कोर्ट ने आदेश दिया है कि न्यायिक अधिकारी इस एसआईआर की देख-रेख करेंगे। इस प्रक्रिया में कई मतदाताओं को संदेह में रखा गया है कि क्या वे असली देश के नागरिक हैं? यह सब चुनाव आयोग की चाल है।"
उन्होंने आगे कहा, "चुनाव आयोग अपनी शक्ति का दुरूपयोग कर रहा है। आयोग की इस मनमानी को रोकने के लिए न्यायिक अधिकारी उन्हें निगरानी में रखेंगे। जब यह देखा गया कि २५० न्यायिक अधिकारियों को काम में लगाया जाएगा, तो पाया गया कि वे समय पर इस कार्य को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसलिए सुझाव दिया गया है कि झारखंड और ओडिशा के रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी इस कार्य को पूरा करें।"
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा डर रही है और खुद को असुरक्षित मान रही है। वे यह आरोप किसी और पर डालने की कोशिश कर रहे हैं। यह समय की बर्बादी है, और उनके पास कोई ठोस कार्य या एजेंडा नहीं है। वे बंगाल में लोगों के मन में जहर घोलने का प्रयास कर रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया को इतनी जल्दबाजी में कराना गलत था। हमारी लड़ाई एसआईआर के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी जल्दबाजी के खिलाफ थी, जिसका उद्देश्य है कि बहुत से मतदाताओं के नाम हटाए जाएं और किसी तरह भाजपा को जीत दिलाई जाए।