पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 17-18 अगस्त: निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 125 बैंक अधिकारी जनकेंद्रित बैंकिंग रणनीति पर करेंगे मंथन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार 17 और 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में 'पीएसबी कॉन्फ्लुएंस' नामक दो दिवसीय आइडियेशन कॉन्क्लेव का आयोजन करने जा रही है, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) और प्रमुख वित्तीय संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व एक मंच पर आएंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य देश की आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस, समयबद्ध और जनकेंद्रित बैंकिंग रणनीतियाँ तैयार करना है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह कॉन्क्लेव केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं होगा, बल्कि बैंकिंग तंत्र में लागू किए जा सकने वाले व्यावहारिक उपायों पर सहमति बनाने का अवसर भी होगा।
कौन होंगे शामिल
इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की उपस्थिति में लगभग 125 वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक (MD) और कार्यकारी निदेशक (ED) शामिल होंगे।
इसके अतिरिक्त, नाबार्ड, एक्सिम बैंक, सिडबी, एनएचबी, आईआईएफसीएल, आईएफसीआई और नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) जैसे प्रमुख सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (PFI) के अधिकारी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे।
चर्चा के प्रमुख विषय
वित्त मंत्रालय के अनुसार, कॉन्क्लेव में चुने गए विषय सीधे तौर पर नागरिक कल्याण और समावेशी आर्थिक विकास से जुड़े हैं। इनमें सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए संसाधन आधार को मजबूत बनाना, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन हेतु निवेश चक्र को गति देना और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम को बढ़ावा देना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
कृषि और बागवानी क्षेत्र की वैल्यू-चेन अवसंरचना, फसल कटाई के बाद की आवश्यकताएँ, बाज़ार संपर्क (मार्केट लिंकिंग), प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और बैंकिंग सेवाओं से वंचित वर्गों तक औपचारिक ऋण पहुँचाना भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। गौरतलब है कि युवा आबादी की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को देखते हुए उनके लिए विशेष बैंकिंग उत्पाद विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा।
थीमैटिक ट्रैक्स की संरचना
कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न विषयों पर अलग-अलग थीमैटिक ट्रैक बनाए जाएंगे, जिनका समन्वय चुनिंदा बैंक और वित्तीय संस्थान करेंगे। इन ट्रैक्स में डिपॉजिट मोबिलाइजेशन, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन, GCC को बढ़ावा, कृषि एवं बागवानी वैल्यू-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, क्रेडिट कार्ड कारोबार की नई कल्पना और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
सम्मेलन का व्यापक महत्व
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब सरकार सार्वजनिक बैंकों की भूमिका को केवल वित्तीय मध्यस्थता से आगे बढ़ाकर समावेशी विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने पर जोर दे रही है। मंत्रालय का मानना है कि इन विषयों के माध्यम से नीतिगत और संस्थागत हस्तक्षेपों को आम लोगों के जीवन में ठोस और मापनीय परिणामों में बदला जा सकता है। यह मंच विभिन्न संस्थानों को अपने सफल अनुभव साझा करने और उन व्यावहारिक उपायों पर सहमति बनाने का अवसर देगा जिन्हें पूरे बैंकिंग क्षेत्र में अपनाया जा सके।