सीतारमण-जू जियायी बैठक: AIIB साझेदारी मजबूत करने पर सहमति, ब्रिक्स 2026 के दौरान चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) की अध्यक्ष जू जियायी के साथ अहम बैठक की, जिसमें भारत और AIIB के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के रास्तों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हुई, जिसके लिए जू जियायी भारत की राजधानी पहुँची हैं।
बैठक के प्रमुख बिंदु
वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत की अवसंरचना और परिवहन कनेक्टिविटी प्राथमिकताओं को AIIB से अधिक समर्थन दिलाने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण का दायरा बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने तथा AIIB की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त बनाने जैसे मुद्दों पर सहमति व्यक्त की। विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सतत विकास परियोजनाओं में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई।
भारत के लिए AIIB की बढ़ती भूमिका
गौरतलब है कि भारत AIIB का दूसरा सबसे बड़ा शेयरधारक है और बैंक से सर्वाधिक ऋण प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है। दोनों पक्षों ने माना कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अवसंरचना ज़रूरतों और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को हासिल करने में AIIB की भूमिका और अधिक निर्णायक हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को तेज़ी से बढ़ा रहा है और बहुपक्षीय विकास बैंकों से रियायती वित्तपोषण की माँग लगातार बनी हुई है।
रूस के साथ भी हुई आर्थिक वार्ता
इससे पहले वित्त मंत्री सीतारमण ने रूसी संघ के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत-रूस आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर विचार हुआ। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसका उद्देश्य निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक ढाँचा तैयार करना है। वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग की नई दिशाओं पर भी ज़ोर दिया गया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 'नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026'
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026' को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने' विषय पर आयोजित सत्र के समापन संबोधन में मोदी ने कहा — 'आज अपनाया गया नई दिल्ली घोषणा पत्र हमारे साझा संकल्प को स्पष्ट दिशा देता है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदला जाए।'
वैश्विक व्यवस्था पर मोदी का संदेश
मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को 'सार्थक और रचनात्मक' बताते हुए कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था को पुरानी संस्थाओं के ज़रिए प्रभावी ढंग से संचालित नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी उस व्यापक माँग को रेखांकित करती है जो उभरती अर्थव्यवस्थाएँ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं में सुधार के लिए लगातार उठा रही हैं। आने वाले दिनों में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ठोस परिणामों और AIIB साझेदारी के क्रियान्वयन पर सबकी नज़र रहेगी।