ब्रिक्स वित्त बैठक जयपुर में शुरू: सीतारमण और RBI गवर्नर मल्होत्रा 11 देशों के प्रतिनिधियों संग वैश्विक अर्थव्यवस्था पर करेंगे मंथन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा 12 अगस्त 2026 को जयपुर के होटल रामबाग पैलेस में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भाग ले रहे हैं। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से बुलाई गई है।
बैठक का एजेंडा और स्वरूप
बैठक की औपचारिक शुरुआत बुधवार सुबह 11:15 बजे हुई, जिसमें ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर उपस्थित हैं। चर्चा के प्रमुख विषयों में आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता शामिल हैं। उद्घाटन सत्र में वित्त मंत्री सीतारमण और RBI गवर्नर मल्होत्रा ने ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं और केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी।
स्वागत और राजनयिक उपस्थिति
जयपुर पहुँचने पर वित्त मंत्री सीतारमण का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। RBI गवर्नर मल्होत्रा मंगलवार देर रात ही जयपुर पहुँच गए थे। यह बैठक केवल आर्थिक विमर्श तक सीमित नहीं है — बुधवार शाम 5 बजे सभी विदेशी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे, जहाँ राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
ऐतिहासिक संदर्भ और जयपुर की भूमिका
गौरतलब है कि ब्रिक्स वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की यह वार्षिक बैठक लगभग 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में शुरू हुई थी, और समय के साथ यह मंच वैश्विक आर्थिक चर्चा का एक प्रमुख माध्यम बन गया है। यह दूसरी बार है जब जयपुर इस बैठक की मेज़बानी कर रहा है। इससे पहले 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी यहाँ बैठक हुई थी, जिसमें आर्थिक पुनरुद्धार, डिजिटल स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म जैसे विषय केंद्र में रहे थे।
आम जनता और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर असर
इस बैठक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद निवेश अवसरों और वित्तीय जोखिमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक GDP का एक बड़ा हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए इन चर्चाओं के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों, मुद्रा स्थिरता और विकासशील देशों के वित्तीय ढाँचे को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या
बैठक के समापन पर एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की संभावना है, जिसमें सदस्य देशों के बीच वित्तीय सहयोग की रूपरेखा तय की जा सकती है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाएँ और भू-राजनीतिक तनाव बहुपक्षीय आर्थिक सहयोग की ज़रूरत को और अधिक प्रासंगिक बना रहे हैं।