अल्बानिया से तुलना पर कांग्रेस का इनकार: 'भारत में आंदोलन गांधी के रास्ते पर ही होगा'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की एक्स पर की गई टिप्पणी — जिसमें उन्होंने अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए भारत को इससे 'सबक लेने' की बात कही — ने 20 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक बहस को तेज़ कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आंदोलन की राह गांधीवादी मार्ग से कभी नहीं भटकेगी।
कांग्रेस की सीधी प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'पूरी दुनिया में जहाँ-जहाँ भी अन्याय होगा, अत्याचार होगा, वहाँ की जनता अपने-अपने एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ खड़ी होती है। हिंदुस्तान में अलग तरीके की बात है, हमारा प्रजातंत्र अलग तरीके का है।' उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि जंतर-मंतर जैसी जगहों को बंद न किया जाए, ताकि लोग अपना रोष शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त कर सकें।
राजपूत ने आगे कहा, 'प्रतिरोध के स्वर को सुनिए, प्रतिरोध की जगहों को खत्म मत कीजिए। दुनिया में जो हो रहा है, उसको आँख खोलकर देखिए।' उनके अनुसार वैश्विक घटनाएँ परस्पर जुड़ी हुई हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ करना जोखिमभरा है।
दलवई का संदेश: भारत की विरासत अलग है
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, 'अल्बानिया की व्यवस्था अलग है और यहाँ की व्यवस्था अलग है। वहाँ महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नहीं थे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में कोई भी आंदोलन केवल गांधी के दिखाए रास्ते पर ही आगे बढ़ेगा।
दलवई ने यह भी कहा कि जो लोग जानबूझकर यह नैरेटिव फैला रहे हैं कि भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात पैदा होंगे, वे ग़लतफ़हमी में हैं। 'ऐसा यहाँ कुछ भी नहीं होने वाला है,' उन्होंने दृढ़ता से कहा।
राउत की सफाई: इरादा चेतावनी था, उकसावा नहीं
विवाद गहराने पर संजय राउत ने अपने बयान का स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, 'यह सरकार रहेगी तो अराजकता फैलेगी ही — यही मैंने कहा था और सुप्रीम कोर्ट को ध्यान देना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार तिरंगा लहराने पर भी विरोध कर रही है, वह राष्ट्रवाद के दावों से मेल नहीं खाता।
राउत ने आगे कहा, 'जब हम कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट पर हमारा विश्वास है और सुप्रीम कोर्ट ही देश को बचा सकता है, तो सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।' गौरतलब है कि उनकी टिप्पणी एक्स पर की गई थी, जिसने विपक्षी राजनीति में तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
व्यापक संदर्भ: विपक्ष में एकता और मतभेद
यह ऐसे समय में आया है जब INDIA गठबंधन के घटक दल अपनी संयुक्त रणनीति को लेकर बहस कर रहे हैं। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों गठबंधन के सहयोगी हैं, लेकिन आंदोलन की भाषा और सीमा को लेकर उनके बीच स्पष्ट वैचारिक अंतर उभरा है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया संकेत देती है कि वह किसी भी संदेश से दूरी बनाना चाहती है जिसे 'हिंसक' या 'संस्थान-विरोधी' रूप में पेश किया जा सके।
आगे की राह पर, यह देखना होगा कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस आपसी मतभेदों को गठबंधन की एकता से ऊपर आने देते हैं या नहीं — विशेषकर ऐसे समय जब लोकसभा सत्र के बाहर विपक्षी एकजुटता सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।