20 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अल्बानिया से तुलना पर कांग्रेस का इनकार: 'भारत में आंदोलन गांधी के रास्ते पर ही होगा'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अल्बानिया से तुलना पर कांग्रेस का इनकार: 'भारत में आंदोलन गांधी के रास्ते पर ही होगा'

सारांश

संजय राउत की अल्बानिया टिप्पणी ने INDIA गठबंधन के भीतर ही बहस छेड़ दी — कांग्रेस ने तुरंत कहा, 'भारत में आंदोलन गांधी के मार्ग पर ही होगा।' यह विवाद विपक्ष की एकता और संघर्ष की भाषा पर अलग-अलग सोच को उजागर करता है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने एक्स पर अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का उल्लेख कर भारत को सबक लेने की बात कही।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार को जंतर-मंतर जैसी प्रतिरोध की जगहें बंद न करने की चेतावनी दी।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि भारत में कोई भी आंदोलन केवल महात्मा गांधी के मार्ग पर चलेगा।
दलवई ने भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात बनने की किसी भी संभावना को सिरे से नकारा ।
राउत ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा केंद्र सरकार को चेतावनी देना था, न कि हिंसा को बढ़ावा देना।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की एक्स पर की गई टिप्पणी — जिसमें उन्होंने अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए भारत को इससे 'सबक लेने' की बात कही — ने 20 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक बहस को तेज़ कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और आंदोलन की राह गांधीवादी मार्ग से कभी नहीं भटकेगी।

कांग्रेस की सीधी प्रतिक्रिया

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, 'पूरी दुनिया में जहाँ-जहाँ भी अन्याय होगा, अत्याचार होगा, वहाँ की जनता अपने-अपने एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ खड़ी होती है। हिंदुस्तान में अलग तरीके की बात है, हमारा प्रजातंत्र अलग तरीके का है।' उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि जंतर-मंतर जैसी जगहों को बंद न किया जाए, ताकि लोग अपना रोष शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त कर सकें।

राजपूत ने आगे कहा, 'प्रतिरोध के स्वर को सुनिए, प्रतिरोध की जगहों को खत्म मत कीजिए। दुनिया में जो हो रहा है, उसको आँख खोलकर देखिए।' उनके अनुसार वैश्विक घटनाएँ परस्पर जुड़ी हुई हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ करना जोखिमभरा है।

दलवई का संदेश: भारत की विरासत अलग है

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, 'अल्बानिया की व्यवस्था अलग है और यहाँ की व्यवस्था अलग है। वहाँ महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर नहीं थे।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में कोई भी आंदोलन केवल गांधी के दिखाए रास्ते पर ही आगे बढ़ेगा।

दलवई ने यह भी कहा कि जो लोग जानबूझकर यह नैरेटिव फैला रहे हैं कि भारत में बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालात पैदा होंगे, वे ग़लतफ़हमी में हैं। 'ऐसा यहाँ कुछ भी नहीं होने वाला है,' उन्होंने दृढ़ता से कहा।

राउत की सफाई: इरादा चेतावनी था, उकसावा नहीं

विवाद गहराने पर संजय राउत ने अपने बयान का स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, 'यह सरकार रहेगी तो अराजकता फैलेगी ही — यही मैंने कहा था और सुप्रीम कोर्ट को ध्यान देना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार तिरंगा लहराने पर भी विरोध कर रही है, वह राष्ट्रवाद के दावों से मेल नहीं खाता।

राउत ने आगे कहा, 'जब हम कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट पर हमारा विश्वास है और सुप्रीम कोर्ट ही देश को बचा सकता है, तो सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।' गौरतलब है कि उनकी टिप्पणी एक्स पर की गई थी, जिसने विपक्षी राजनीति में तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न की।

व्यापक संदर्भ: विपक्ष में एकता और मतभेद

यह ऐसे समय में आया है जब INDIA गठबंधन के घटक दल अपनी संयुक्त रणनीति को लेकर बहस कर रहे हैं। कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) दोनों गठबंधन के सहयोगी हैं, लेकिन आंदोलन की भाषा और सीमा को लेकर उनके बीच स्पष्ट वैचारिक अंतर उभरा है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया संकेत देती है कि वह किसी भी संदेश से दूरी बनाना चाहती है जिसे 'हिंसक' या 'संस्थान-विरोधी' रूप में पेश किया जा सके।

आगे की राह पर, यह देखना होगा कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस आपसी मतभेदों को गठबंधन की एकता से ऊपर आने देते हैं या नहीं — विशेषकर ऐसे समय जब लोकसभा सत्र के बाहर विपक्षी एकजुटता सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कांग्रेस की तत्काल 'गांधी-मार्ग' वाली सफाई बताती है कि विपक्ष अपनी भाषा के प्रति कितना सतर्क है — ख़ासकर जब सत्तापक्ष इसे 'हिंसा का आह्वान' बताने की कोशिश करे। असली विरोधाभास यह है कि INDIA गठबंधन के सहयोगी एक ही मंच पर हैं, लेकिन संघर्ष की सीमा पर उनका मतभेद सार्वजनिक हो गया। जंतर-मंतर को बंद करने और प्रतिरोध की जगहों को सीमित करने पर कांग्रेस की चिंता असली है — और यह सवाल लोकतांत्रिक स्वास्थ्य के लिए उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि राउत के बयान पर बहस।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने अल्बानिया के बारे में क्या कहा था?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने एक्स पर अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए सुझाव दिया कि भारत को इस तरह की घटनाओं से सबक लेना चाहिए। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा केंद्र सरकार को चेतावनी देना था।
कांग्रेस ने राउत की टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई और प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि भारत में कोई भी आंदोलन महात्मा गांधी के रास्ते पर ही होगा। उन्होंने भारत की तुलना अल्बानिया, बांग्लादेश या नेपाल से किए जाने को ग़लत बताया।
क्या कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच मतभेद है?
दोनों पार्टियाँ INDIA गठबंधन की सहयोगी हैं, लेकिन आंदोलन की भाषा और सीमा पर इस विवाद से वैचारिक अंतर सामने आया है। कांग्रेस ने किसी भी ऐसे बयान से दूरी बनाई जिसे संस्थान-विरोधी या हिंसक रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
जंतर-मंतर को बंद करने पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सरकार को सीधी चेतावनी दी कि जंतर-मंतर जैसी जगहों को बंद न किया जाए, ताकि लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपना रोष व्यक्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की जगहों को खत्म करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
राउत के बयान का असल मतलब क्या था?
राउत ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा केंद्र सरकार को यह आगाह करना था कि मौजूदा हालात में अराजकता बढ़ सकती है। उन्होंने तिरंगा लहराने पर विरोध का मुद्दा उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से इन मसलों पर ध्यान देने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 32 मिनट पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 2 घंटे पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले