संजय राउत के 'सुप्रीम कोर्ट जलाने' वाले एक्स पोस्ट पर सियासी बवाल, भाजपा-शिवसेना ने माँगी गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई एक पोस्ट ने 20 अक्टूबर 2026 को देशभर में तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी। राउत ने अल्बानिया की राजधानी तिराना में हुए सरकार-विरोधी दंगों का हवाला देते हुए लिखा था कि वहाँ के नागरिकों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया और इन घटनाओं से सभी देशों को — 'खासकर भारत को' — सबक लेना चाहिए। इस पोस्ट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के नेताओं ने राष्ट्रविरोधी करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की माँग की।
राउत की पोस्ट में क्या था
राउत ने एक्स पर लिखा था, 'अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है। लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया है। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए, खासकर भारत को।' आलोचकों का कहना है कि इस पोस्ट में भारतीय न्यायपालिका और संस्थानों के विरुद्ध हिंसा को प्रेरित करने का निहितार्थ है, जबकि राउत के समर्थकों का तर्क है कि यह एक राजनीतिक टिप्पणी थी, न कि उकसावे का आह्वान।
भाजपा-शिवसेना की तीखी प्रतिक्रिया
गाजियाबाद के लोनी से विधायक नंद किशोर गुर्जर ने राउत की पोस्ट को राष्ट्रविरोधी बताते हुए महाराष्ट्र पुलिस से उनकी तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। उन्होंने देशभर के लोगों से दशहरे पर राउत का पुतला जलाने की अपील भी की।
गुर्जर ने कहा, 'राहुल गांधी और अखिलेश यादव सुप्रीम कोर्ट में गए, जिससे यह साफ हो गया है कि अगर हमारी सूझबूझ नहीं होती और शक्ति नहीं होती तो वे सुप्रीम कोर्ट को जलाने का प्रयास करते। संजय राउत उसी का हिस्सा हैं और वे रावण हैं। उनके बयान को भारत जैसा देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। राउत अगर दिल्ली में आते हैं, तो उनका जवाब दिया जाएगा।'
ठाणे से शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने शिवसेना (यूबीटी) पर कांग्रेस की अधीनता का आरोप लगाते हुए कहा, 'बाला साहब ठाकरे ने कहा था कि उनकी पार्टी कभी भी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। लेकिन संजय राउत कांग्रेस की चौखट के बाहर बैठे रहते हैं। पहले वे पवार साहब की गुलामी करते थे, अब गांधी परिवार की कर रहे हैं।'
भाजपा प्रवक्ता का संवैधानिक तर्क
नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा, 'भारतीय संविधान विरोध प्रदर्शन की इजाजत देता है, लेकिन विरोध में हिंसा नहीं होनी चाहिए। संविधान में हिंसा के जरिए सरकार बदलने की कोई गुंजाइश नहीं है।' कोहली ने यह भी रेखांकित किया कि इसी चुनावी प्रक्रिया, इसी चुनाव आयोग और इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन हुए हैं, जहाँ विपक्षी दल सत्ता में हैं।
विपक्ष की सधी प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद एसटी हसन ने इस विवाद पर अधिक संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'हमारा मानना है कि हिंदुस्तान को बाँटने का ख्याल लोग अपने दिलों से निकाल लें। वैचारिक रूप से मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जहाँ देश का मामला आता है, वहाँ हम एक हैं।' गौरतलब है कि अब तक शिवसेना (यूबीटी) की ओर से राउत के इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही शिवसेना के दोनों गुटों — एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राउत की शिवसेना (यूबीटी) — के बीच तनातनी का केंद्र बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि राउत की टिप्पणी महाविकास अघाड़ी की आंतरिक राजनीति और भाजपा-विरोधी मोर्चे को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है, जबकि भाजपा इसे न्यायपालिका के अपमान की श्रेणी में रखकर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, महाराष्ट्र पुलिस की ओर से गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है।