संजय राउत का BJP पर पलटवार: खड़गे का बयान आम बोलचाल, चीन-लद्दाख पर आंदोलन करे भाजपा
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन को अनावश्यक करार देते हुए कड़ा पलटवार किया। राउत ने कहा कि खड़गे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द ग्रामीण महाराष्ट्र में आम बोलचाल का हिस्सा है और इस पर इतना संवेदनशील होने की ज़रूरत नहीं। उनके अनुसार, भाजपा को एक शब्द पर आंदोलन करने के बजाय अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ, लद्दाख और मणिपुर जैसे असल राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।
खड़गे के बयान पर भाजपा बनाम विपक्ष
राउत ने कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में एक बात कही है। अब भाजपा के लोगों को कोई नया मुद्दा मिल गया है। वे पूरे देश में आंदोलन कर रहे हैं।' उन्होंने इस विरोध की तुलना विपक्षी दलों के आंदोलनों से करते हुए पूछा कि जब कांग्रेस या शिवसेना (यूबीटी) दिल्ली या मुंबई में प्रदर्शन करती है तो परमिशन लेनी पड़ती है, गिरफ़्तारियाँ होती हैं और बॉन्ड भरवाए जाते हैं — जबकि भाजपा के प्रदर्शनकारियों पर यही नियम लागू नहीं होते। राउत ने व्यंग्यात्मक स्वर में पूछा, 'भाजपा के कितने लोगों से सरकार ने बॉन्ड लिया है?'
खड़गे के अनुभव का हवाला, शब्द को सांस्कृतिक संदर्भ में रखा
राउत ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि वे 50-60 वर्षों से राजनीति में सक्रिय अत्यंत अनुभवी नेता हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में कई शब्द प्यार से और आम बातचीत में इस्तेमाल होते हैं, और मराठी साहित्य में भी ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं। 'इस बात को छोड़ देना चाहिए। पूरे देश में केवल एक शब्द पर आंदोलन करना उचित नहीं है,' राउत ने कहा।
चीन, लद्दाख और मणिपुर पर भाजपा की चुप्पी पर सवाल
राउत ने तीखे शब्दों में कहा कि कथित तौर पर चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में कई किलोमीटर अंदर तक घुस आए हैं — इस पर आंदोलन होना चाहिए। लद्दाख और मणिपुर की स्थिति पर भाजपा कोई नैरेटिव नहीं बनाती, लेकिन खड़गे के एक शब्द पर देशभर में सड़कों पर उतर आती है। यह विरोधाभास, उनके अनुसार, भाजपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं को उजागर करता है।
1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली और मीडिया सेंसरशिप का आरोप
राउत ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित विपक्षी रैली का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस तारीख को आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से लोग इस रैली में पहुँचेंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया पर सेंसरशिप का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की आलोचना से जुड़ी खबरें दिखाने नहीं दी जातीं। राउत ने नोटबंदी, जीएसटी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाइयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग खुद अपनी परेशानी स्वीकार कर रहा है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर राउत का रुख
राउत ने न्यायपालिका संबंधी हालिया टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि यह कहना उचित नहीं था कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सरकार के नियंत्रण में थे — 'यह गलत है, यह हम भी मानते हैं।' लेकिन उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज भी सर्वोच्च न्यायालय आम जनता की आख़िरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी सरकार की हर बात मानने लगे तो लोगों का न्याय में विश्वास समाप्त हो जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच महाविकास अघाड़ी और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है। राउत का यह बयान विपक्षी खेमे की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखता है, जिसमें भाजपा को 'असल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला' दल साबित किया जा रहा है।