26 अक्टूबर 2026
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संजय राउत का BJP पर पलटवार: खड़गे का बयान आम बोलचाल, चीन-लद्दाख पर आंदोलन करे भाजपा

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संजय राउत का BJP पर पलटवार: खड़गे का बयान आम बोलचाल, चीन-लद्दाख पर आंदोलन करे भाजपा

सारांश

खड़गे के विवादित बयान पर भाजपा के देशव्यापी आंदोलन को संजय राउत ने सीधे चुनौती दी — और सवाल उठाया कि चीनी घुसपैठ, लद्दाख, मणिपुर पर यही ऊर्जा क्यों नहीं? 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली से पहले विपक्ष ने 'असल बनाम नकली मुद्दे' का नया मोर्चा खोल दिया है।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के विवादित बयान पर भाजपा के आंदोलन को 'अनावश्यक' करार दिया।
राउत ने विवादित शब्द को ग्रामीण महाराष्ट्र की आम बोलचाल और मराठी साहित्य का हिस्सा बताया।
उन्होंने भाजपा से माँग की कि वह अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ, लद्दाख और मणिपुर के असल मुद्दों पर आंदोलन करे।
1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में विपक्षी रैली की घोषणा; राहुल गांधी ने तारीख तय की।
राउत ने मीडिया सेंसरशिप और व्यापारी वर्ग की परेशानियों — नोटबंदी, जीएसटी, ED कार्रवाई — का भी ज़िक्र किया।
सर्वोच्च न्यायालय की स्वतंत्रता पर राउत ने कहा — न्यायपालिका आम जनता की आख़िरी उम्मीद है।

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन को अनावश्यक करार देते हुए कड़ा पलटवार किया। राउत ने कहा कि खड़गे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द ग्रामीण महाराष्ट्र में आम बोलचाल का हिस्सा है और इस पर इतना संवेदनशील होने की ज़रूरत नहीं। उनके अनुसार, भाजपा को एक शब्द पर आंदोलन करने के बजाय अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ, लद्दाख और मणिपुर जैसे असल राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए।

खड़गे के बयान पर भाजपा बनाम विपक्ष

राउत ने कहा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में एक बात कही है। अब भाजपा के लोगों को कोई नया मुद्दा मिल गया है। वे पूरे देश में आंदोलन कर रहे हैं।' उन्होंने इस विरोध की तुलना विपक्षी दलों के आंदोलनों से करते हुए पूछा कि जब कांग्रेस या शिवसेना (यूबीटी) दिल्ली या मुंबई में प्रदर्शन करती है तो परमिशन लेनी पड़ती है, गिरफ़्तारियाँ होती हैं और बॉन्ड भरवाए जाते हैं — जबकि भाजपा के प्रदर्शनकारियों पर यही नियम लागू नहीं होते। राउत ने व्यंग्यात्मक स्वर में पूछा, 'भाजपा के कितने लोगों से सरकार ने बॉन्ड लिया है?'

खड़गे के अनुभव का हवाला, शब्द को सांस्कृतिक संदर्भ में रखा

राउत ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि वे 50-60 वर्षों से राजनीति में सक्रिय अत्यंत अनुभवी नेता हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में कई शब्द प्यार से और आम बातचीत में इस्तेमाल होते हैं, और मराठी साहित्य में भी ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं। 'इस बात को छोड़ देना चाहिए। पूरे देश में केवल एक शब्द पर आंदोलन करना उचित नहीं है,' राउत ने कहा।

चीन, लद्दाख और मणिपुर पर भाजपा की चुप्पी पर सवाल

राउत ने तीखे शब्दों में कहा कि कथित तौर पर चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में कई किलोमीटर अंदर तक घुस आए हैं — इस पर आंदोलन होना चाहिए। लद्दाख और मणिपुर की स्थिति पर भाजपा कोई नैरेटिव नहीं बनाती, लेकिन खड़गे के एक शब्द पर देशभर में सड़कों पर उतर आती है। यह विरोधाभास, उनके अनुसार, भाजपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं को उजागर करता है।

1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली और मीडिया सेंसरशिप का आरोप

राउत ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित विपक्षी रैली का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस तारीख को आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से लोग इस रैली में पहुँचेंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया पर सेंसरशिप का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की आलोचना से जुड़ी खबरें दिखाने नहीं दी जातीं। राउत ने नोटबंदी, जीएसटी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग की कार्रवाइयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग खुद अपनी परेशानी स्वीकार कर रहा है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर राउत का रुख

राउत ने न्यायपालिका संबंधी हालिया टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि यह कहना उचित नहीं था कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सरकार के नियंत्रण में थे — 'यह गलत है, यह हम भी मानते हैं।' लेकिन उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आज भी सर्वोच्च न्यायालय आम जनता की आख़िरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट भी सरकार की हर बात मानने लगे तो लोगों का न्याय में विश्वास समाप्त हो जाएगा।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच महाविकास अघाड़ी और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है। राउत का यह बयान विपक्षी खेमे की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा दिखता है, जिसमें भाजपा को 'असल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला' दल साबित किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर 1 नवंबर की रामलीला रैली से पहले। लेकिन इस रणनीति में एक अंतर्विरोध भी है: जो विपक्ष न्यायपालिका की टिप्पणियों पर खुद 'गलत' स्वीकार करता है, वही खड़गे के बयान पर किसी भी आलोचना को 'भावुकता' कह देता है। असली सवाल यह है कि क्या 'सांस्कृतिक संदर्भ' का तर्क जनता स्वीकार करेगी या विपक्ष के लिए यह रक्षात्मक स्थिति बन जाएगी? महाराष्ट्र चुनाव की आहट में दोनों पक्ष जिस तरह प्रतीकात्मक मुद्दों को तूल दे रहे हैं, वह असली नीतिगत बहस को पीछे धकेल रहा है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान का बचाव क्यों किया?
राउत ने कहा कि खड़गे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द ग्रामीण महाराष्ट्र में आम बोलचाल और मराठी साहित्य का हिस्सा है, इसलिए इस पर भावुक होने की ज़रूरत नहीं। उनके अनुसार खड़गे 50-60 वर्षों के अनुभवी नेता हैं और उनके बयान को गलत संदर्भ में नहीं लेना चाहिए।
राउत ने भाजपा के आंदोलन पर क्या सवाल उठाए?
राउत ने पूछा कि जब विपक्षी दल आंदोलन करते हैं तो परमिशन, गिरफ़्तारी और बॉन्ड की शर्त लगती है, जबकि भाजपा के प्रदर्शनकारियों पर यही नियम लागू नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि एक शब्द पर आंदोलन की बजाय चीन-अरुणाचल घुसपैठ, लद्दाख और मणिपुर पर आंदोलन होना चाहिए।
1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली क्या है?
राहुल गांधी ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी रैली की घोषणा की है। राउत के अनुसार इस रैली में पूरे देश से लोग आएंगे, हालाँकि कुछ पक्षों ने व्यापारी वर्ग के समर्थन को लेकर संदेह जताया है।
राउत ने न्यायपालिका पर क्या कहा?
राउत ने स्वीकार किया कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश पर सरकार के नियंत्रण की टिप्पणी उचित नहीं थी। साथ ही उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय आज भी जनता की आख़िरी उम्मीद है और अगर न्यायपालिका भी सरकार के आगे झुक जाए तो न्याय की उम्मीद समाप्त हो जाएगी।
राउत ने व्यापारी वर्ग की परेशानियों पर क्या कहा?
राउत ने कहा कि नोटबंदी, जीएसटी, ED और आयकर विभाग की कार्रवाइयों से व्यापारी वर्ग खुद परेशान है और आंदोलन की बात कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि असली व्यापारी कौन हैं, यह जनता जानती है।
राष्ट्र प्रेस
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