क्या दिल्ली में कांग्रेस की रैली में शेर के खिलाफ शेर बनकर लड़ना होगा?

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क्या दिल्ली में कांग्रेस की रैली में शेर के खिलाफ शेर बनकर लड़ना होगा?

सारांश

पटना के राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने दिल्ली में कांग्रेस की रैली पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक दिन की रैली से परिणाम नहीं आएंगे, विपक्ष को एकजुट होकर सड़क पर उतरना होगा। तिवारी ने धार्मिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी, यह दर्शाते हुए कि आस्था को राजनीति से अलग रखना चाहिए।

मुख्य बातें

विपक्षी एकता की आवश्यकता है।
सड़क पर उतरकर संघर्ष करना होगा।
धर्म को राजनीति से अलग रखना चाहिए।
बेरोजगारी, गरीबी के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है।

पटना, 14 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की 'वोट चोरी' के खिलाफ आयोजित रैली को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि एक दिन की रैली से कोई असर नहीं होने वाला है। यदि हमें शेर से सामना करना है, तो शेर के रूप में लड़ाई करनी होगी। सभी विपक्षी सांसदों और विधायकों को मिलकर सड़क पर आर-पार की लड़ाई का आगाज करना होगा।

पटना में राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए तिवारी ने कहा कि बिहार में 'वोट चोरी' के खिलाफ 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाली गई। राहुल गांधी को तेजस्वी यादव का समर्थन मिला। दिल्ली में भी कांग्रेस पार्टी की रैली चल रही है। यह केवल 'वोट चोरी' का मामला नहीं है, बल्कि 'वोट का अपहरण' हो रहा है। विपक्ष के सांसदों-विधायकों को अब सड़कों पर उतरना होगा। हमें जेपी आंदोलन से बड़ा आंदोलन खड़ा करना होगा। यदि अभी भी जागरूक नहीं हुए, तो वे 'वोट चोरी' कर सत्ता में आते रहेंगे। लोकतंत्र को बचाना है तो सड़कों पर आना होगा। एक दिन की रैली से कुछ नहीं होगा, आर-पार की लड़ाई लड़नी पड़ेगी।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर तिवारी ने कहा कि भारत में हिंदू पहले से ही एकजुट हैं। बार-बार 'हिंदू, हिंदू' कहने से कुछ हासिल नहीं होगा। हमें इस पर विचार करना चाहिए कि बेरोजगारी, भूख, गरीबी और महंगाई से जूझ रहे हिंदुओं का भला कैसे किया जाए।

तिवारी ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के बयान पर कहा कि उन्हें जनादेश मिला है। चाहे वह किस प्रकार से मिला हो। अब जब वे सत्ता में आ गए हैं, तो उन्हें कम से कम बिहार और लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए और जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना चाहिए। ऐसा लगता है कि उन्हें लालू यादव का फोबिया हो गया है। अब पच्चीस वर्ष हो चुके हैं, और यदि वे 2030 तक अगले पांच वर्षों तक सत्ता में रहते हैं, तो भी वे पिछले बीस वर्षों से वही बात दोहरा रहे हैं। भ्रष्ट अधिकारियों की संपत्ति पर पहले स्कूल खोलें।

उन्होंने कहा कि मंदिर किसी के लिए आस्था का विषय होना चाहिए, न कि राजनीति का। मंदिर किसी का एजेंडा नहीं हो सकता, यह आस्था का विषय है। सवाल यह है कि जो लोग मंदिर के नाम पर राजनीति करते हैं, वे अयोध्या भी हार गए। भगवान राम का भी साथ नहीं मिला। धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए। हम मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा जाते हैं। यही इस देश की खूबसूरती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मृत्युंजय तिवारी ने रैली में भाग लिया?
हाँ, मृत्युंजय तिवारी ने दिल्ली में कांग्रेस की रैली में भाग लिया और अपनी राय रखी।
राजद नेता का मुख्य संदेश क्या था?
उनका मुख्य संदेश था कि केवल एक दिन की रैली से कुछ नहीं होगा, सभी विपक्षी को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।
उन्होंने धार्मिक मुद्दों पर क्या कहा?
तिवारी ने कहा कि मंदिर आस्था का विषय होना चाहिए, न कि राजनीति का।
राष्ट्र प्रेस
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