क्या जनता भाजपा को भगाने की तैयारी कर रही है? कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना पर क्या कहा?
सारांश
Key Takeaways
- प्रमोद तिवारी ने 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना पर सवाल उठाए।
- उन्होंने भाजपा को हटाने की बात की।
- दिल्ली के पथराव को प्रशासनिक नाकामी बताया।
- भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' कहा।
- बजट में वादों को पूरा न करने की चिंता व्यक्त की।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने 'विकसित भारत- जी राम जी' योजना पर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब जनता को योजना की कमियों का पता चलेगा, तो वह भाजपा को हटाने का निर्णय लेगी।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में प्रमोद तिवारी ने कहा, "लोगों को अभी तक यह समझ में नहीं आ रहा है कि जब 60-40 का अनुपात लागू होगा, तो यह योजना वास्तव में समाप्त हो जाएगी। जनता को नहीं पता है कि गारंटी हटा दी गई है। उन्हें यह भी नहीं पता कि 'मनरेगा' में जो नया बदलाव किया गया है, उसमें इस सरकार ने केवल गांधी का नाम नहीं हटाया है, बल्कि पहले निर्णय स्थानीय स्तर पर लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार लिए जाते थे, जबकि अब ये ऊपर से तय होंगे कि कहां लागू होंगे। जब जनता को यह मालूम होगा, तो वे भारतीय जनता पार्टी को हटाने का काम करेंगी।"
प्रमोद तिवारी ने दिल्ली के तुर्कमान गेट क्षेत्र में पथराव की घटना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "यह प्रशासनिक नाकामी थी। अगर हाईकोर्ट के आदेश पर तोड़फोड़ करनी थी, तो पहले स्थानीय लोगों से बात करनी चाहिए थी।"
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन को कार्रवाई करनी थी, तो इसे दिन के उजाले में क्यों नहीं किया गया? इसे रात में क्यों शुरू किया गया? कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने खुद ऐसा माहौल बनाया जिससे गलतफहमी फैली। यह दिल्ली प्रशासन की एक ऐतिहासिक गलती है।
भारत की जीडीपी ग्रोथ पर भी कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डेड इकोनॉमी' करार दिया।
प्रमोद तिवारी ने कहा, "ऐसा (जीडीपी ग्रोथ) सामान्यतः साल की शुरुआत और अंत में होता है। मैं उनसे यह पूछना चाहता हूं कि यदि आपकी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो आपने 'मनरेगा' में 90-10 का रेशियो घटाकर 60 क्यों कर दिया?"
आने वाले बजट सत्र पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "जब बजट पेश होगा, तो उसमें राष्ट्रपति का भाषण भी शामिल होगा। बजट में जनता से जो भी वादे किए जाते हैं, वे कभी पूरे नहीं होते।"