23 अक्टूबर 2026
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हरियाणा बिजली संकट: सुरजेवाला ने सैनी सरकार पर साधा निशाना, निजी टेंडर रद्द करने की मांग

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हरियाणा बिजली संकट: सुरजेवाला ने सैनी सरकार पर साधा निशाना, निजी टेंडर रद्द करने की मांग

सारांश

हरियाणा में बिजली संकट अब राजनीतिक मोर्चे पर भी गरम हो गया है। कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने सैनी सरकार पर निजी कंपनी को वितरण व्यवस्था सौंपने का आरोप लगाया और टेंडर रद्द करने की मांग की — साथ ही HERC की नियुक्तियों पर भी सवाल खड़े किए।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 23 अक्टूबर 2026 को हरियाणा में बिजली वितरण के कथित निजीकरण पर नायब सिंह सैनी सरकार पर हमला बोला।
सुरजेवाला ने निजी कंपनी को दिए गए बिजली वितरण टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में निजीकरण प्रक्रिया को मुनाफे की संभावना के चलते तेज़ किया जा रहा है।
HERC की नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग के सदस्य BJP से जुड़े हैं और जिम्मेदारी से सरकार नहीं बच सकती।
सुरजेवाला ने बिजली अधिनियम की धारा 108 का हवाला देकर सरकार से हस्तक्षेप की माँग की।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को हरियाणा में जारी बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिजली वितरण व्यवस्था को किसी निजी कंपनी को सौंपने के लिए जारी टेंडर को तत्काल रद्द करने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

मुख्य आरोप और मांग

सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि हरियाणा बिजली और पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा, "बिजली और पानी के संकट के कारण हरियाणा के लोग बहुत परेशान हैं। लोगों के इन्वर्टर जवाब दे रहे हैं। कारोबार और उद्योग बर्बादी की कगार पर हैं। पानी और दूध जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी से परेशान लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।"

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सैनी सरकार 'अज्ञात लाभ' के लिए बिजली वितरण व्यवस्था एक ही निजी कंपनी को सौंपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किया कि इस कदम के पीछे क्या कारण है और जनता के हितों की अनदेखी क्यों की जा रही है।

गुरुग्राम और नूंह पर विशेष चिंता

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में यह निजीकरण प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ाई जा रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों में मुनाफे की अधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर कई बैठकें कर चुके हैं, जबकि सरकार लगातार स्थिति सुधारने के प्रयास करने का दावा करती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बिजली कटौती को लेकर आम नागरिकों में गहरा आक्रोश है।

एचईआरसी और सरकार की जवाबदेही पर सवाल

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुरजेवाला ने कहा, "क्या एचईआरसी ने बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने का आदेश दिया है? सभी नियुक्तियां आपने की हैं और आयोग के सदस्य भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हैं। सरकार आपकी है, नियुक्तियां आप करते हैं और आयोग भी आपके हैं।"

उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार नियामक प्राधिकरणों के फैसलों की आड़ में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर देश के कई राज्यों में सार्वजनिक विरोध का माहौल रहा है।

बिजली अधिनियम का हवाला

सुरजेवाला ने बिजली अधिनियम की धारा 108 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास इस मामले में हस्तक्षेप करने का पूरा कानूनी अधिकार है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह बिजली कर्मचारी यूनियनों को बुलाकर निजी कंपनी को दिया गया टेंडर तत्काल रद्द करे।

उन्होंने चेतावनी दी, "नायब सैनी जी, आप किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं? यदि राज्य के घरों में अंधेरा छाता है, हजारों लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते हैं या बिजली वितरण व्यवस्था को भारी नुकसान होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नायब सैनी और उनकी सरकार की होगी।"

आगे क्या होगा

फिलहाल नायब सिंह सैनी सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया पर स्पष्टता नहीं आई तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और राजनीतिक रंग पकड़ सकता है। कांग्रेस के इस हमले के बाद हरियाणा में बिजली व्यवस्था का भविष्य और निजीकरण की दिशा पर सरकार का रुख निर्णायक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि हरियाणा के उपभोक्ताओं को ठोस जवाब चाहिए।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण का विवाद क्या है?
हरियाणा में राज्य सरकार पर आरोप है कि वह बिजली वितरण व्यवस्था एक निजी कंपनी को सौंपने के लिए टेंडर जारी कर रही है। कांग्रेस नेता सुरजेवाला के अनुसार, गुरुग्राम और नूंह में यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और इसमें 'अज्ञात लाभ' की भूमिका बताई जा रही है।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सैनी सरकार से क्या माँगें की हैं?
सुरजेवाला ने मांग की है कि सरकार बिजली कर्मचारी यूनियनों को बुलाए और निजी कंपनी को दिया गया टेंडर तत्काल रद्द करे। उन्होंने बिजली अधिनियम की धारा 108 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार के पास इसके लिए पूरा कानूनी अधिकार है।
HERC यानी हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की इसमें क्या भूमिका है?
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि HERC की नियुक्तियाँ राज्य सरकार ने की हैं और आयोग के सदस्य BJP से जुड़े हैं। उनका तर्क है कि सरकार HERC के निर्णयों की आड़ में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
हरियाणा के किन क्षेत्रों में बिजली संकट सबसे गंभीर बताया जा रहा है?
कांग्रेस नेता के अनुसार गुरुग्राम और नूंह में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। इन क्षेत्रों में कथित तौर पर निजीकरण की प्रक्रिया इसलिए तेज़ की जा रही है क्योंकि यहाँ मुनाफे की संभावनाएं अधिक हैं।
नायब सिंह सैनी सरकार ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
23 अक्टूबर 2026 तक सैनी सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का दावा रहा है कि वह बिजली स्थिति सुधारने के प्रयास कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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