उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कोझिकोड में 'नवरात्रि सरगोत्सव 2026' का उद्घाटन किया
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को केरल के कोझिकोड में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव 'नवरात्रि सरगोत्सव 2026' का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम की तस्वीरें भी साझा कीं। राधाकृष्णन ने आशा जताई कि यह उत्सव भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्सव का महत्व और उपराष्ट्रपति का संदेश
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में कला, परंपरा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने का कार्य करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'नवरात्रि सरगोत्सव' नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का एक बेहतर मंच उपलब्ध कराएगा।
एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने जोर दिया कि नवाचार को अपनाते हुए परंपराओं का संरक्षण आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने इस आयोजन के सफल संचालन के लिए 'केसरी वीकली' को बधाई दी और मलयालम पत्रकारिता के क्षेत्र में उसके योगदान की सराहना की।
केसरी वीकली की भूमिका की प्रशंसा
उपराष्ट्रपति ने केसरी वीकली की विशेष तारीफ करते हुए कहा कि इस पत्रिका ने लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के प्रसार में मीडिया संस्थानों के योगदान को भी रेखांकित किया।
आईएनएस समर्थक का शुभारंभ — रक्षा क्षेत्र में मील का पत्थर
इससे पहले उसी दिन, राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक का शुभारंभ किया। यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आईएनएस समर्थक भारत की औद्योगिक, प्रौद्योगिकीय और जहाज निर्माण क्षमताओं की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अब केवल एक आकांक्षा नहीं बल्कि एक उभरती हुई वास्तविकता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है।
समृद्ध समुद्री विरासत का स्मरण
कारवार में राधाकृष्णन ने भारत की समुद्री विरासत को याद करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज और चोल वंश की नौसैनिक परंपराओं का उल्लेख किया, जिन्होंने हिंद महासागर और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के समुद्री प्रभाव का विस्तार किया था। यह ऐतिहासिक संदर्भ उस दिन के उद्घाटन को एक व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है। आने वाले दिनों में 'नवरात्रि सरगोत्सव' के तहत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की उम्मीद है।