उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने किया सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क का उद्घाटन, जबरन धर्मांतरण पर जताई कड़ी आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार, 31 मई 2026 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्थंगडी में सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क का विधिवत उद्घाटन किया। धर्मस्थल स्थित इस समारोह में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सभ्यता की परंपरा सभी धर्मों के प्रति समान आदर की रही है और किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने सिरी संस्था को ग्रामीण भारत के समृद्धि के सपने को साकार करने वाला एक अनुकरणीय मॉडल बताया।
सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क की विशेषताएँ
नवउद्घाटित सिरी मातृश्री औद्योगिक पार्क में महिला कर्मचारियों के लिए छात्रावास सुविधाएँ, आवासीय क्वार्टर, बाल देखभाल सहायता प्रणाली, स्वच्छ रसोईघर, परिवहन सुविधाएँ और अन्य कल्याणकारी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। उपराष्ट्रपति ने इस मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की विशेष सराहना करते हुए कहा कि सिरी ने पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है। उन्होंने इस पार्क को उद्योग के सामाजिक रूप से जिम्मेदार, महिला-केंद्रित और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का जीवंत उदाहरण बताया।
सभी धर्मों के सम्मान और धर्मांतरण पर उपराष्ट्रपति की टिप्पणी
श्री क्षेत्र धर्मस्थल के मूल्यों पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भक्ति, धर्म और सामाजिक सद्भाव से ही नैतिक शक्ति को बल मिलता है। उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की भावना को संरक्षित करने पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि सभी धर्मों के साथ समान सम्मान और गरिमा का व्यवहार होना चाहिए, जबकि किसी भी प्रकार के जबरन धर्मांतरण को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश में धर्मांतरण से जुड़े विवाद समय-समय पर राजनीतिक बहस का केंद्र बनते रहे हैं।
डॉ. डी वीरेंद्र हेगड़े और हेमावती हेगड़े की सराहना
उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा सांसद और सिरी के अध्यक्ष डॉ. डी वीरेंद्र हेगड़े की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उनके जीवन को समाज के लिए एक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि लगभग छह दशकों से डॉ. हेगड़े ने यह प्रदर्शित किया है कि आध्यात्मिकता किस प्रकार रचनात्मक सामाजिक परिवर्तन की एक शक्तिशाली शक्ति बन सकती है। उपराष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में हेमावती वी. हेगड़े के योगदान की भी सराहना की और कहा कि किसी भी सामाजिक कार्य की सफलता जीवनसाथी के सहयोग और प्रतिबद्धता से ही संभव होती है।
आम जनता और महिलाओं पर असर
सिरी संस्था वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से 3,000 से अधिक व्यक्तियों और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से अधिक लोगों की आजीविका का आधार है, जिनमें अधिकांश वंचित पृष्ठभूमि की महिलाएँ हैं। उपराष्ट्रपति ने इसे सच्चे अर्थों में सामाजिक परिवर्तन की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सच्चा विकास वही है जो मानव जीवन को स्पर्श करे और समाज के हर वर्ग में गरिमा, अवसर तथा आत्मविश्वास का सृजन करे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में समावेशी विकास को मूलमंत्र माना गया है, जिसका उल्लेख उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में किया।
धर्मस्थल मंदिर दर्शन और सामुदायिक सेवा
औद्योगिक पार्क के उद्घाटन से पहले उपराष्ट्रपति ने धर्मस्थल स्थित श्री मंजुनाथ स्वामी मंदिर का दौरा कर प्रार्थना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने अन्नपूर्णा प्रसाद निलय का भी भ्रमण किया, जहाँ भक्तों से बातचीत की और मंदिर की निशुल्क सामूहिक भोजन की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि करुणा, समानता और भक्ति पर आधारित यह सामुदायिक सेवा की अटूट परंपरा भारतीय समाज की विशेषता है। आगे उन्होंने आशा व्यक्त की कि इसी प्रकार के ग्रामीण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र पूरे देश में विकसित होंगे और 'लोकल वोकल' तथा 'आत्मनिर्भर भारत' की भावना राष्ट्र के विकास पथ का मार्गदर्शन करती रहेगी।