पटना में CPI(M)-DYFI-SFI मार्च पर रोक, चुनाव आयोग घेराव से पहले आर-ब्लॉक पर बैरिकेड
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 16 अक्टूबर 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)], डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने राज्य चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने आर-ब्लॉक पर बैरिकेड लगाकर विफल कर दिया। प्रदर्शनकारियों की योजना जीपीओ गोलंबर से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालने की थी, लेकिन प्रशासन ने पहले ही पूरे शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
सुरक्षा बलों ने आर-ब्लॉक, जीपीओ गोलंबर, चुनाव आयोग कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास के आसपास भारी तैनाती की। प्रस्तावित मार्च-मार्ग पर पुलिस की बड़ी टुकड़ी को पहले ही स्थानापन्न कर दिया गया था। मौके पर वॉटर कैनन वाहन भी खड़े किए गए, जो स्थिति बिगड़ने पर इस्तेमाल के लिए तैयार रहे।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में पार्टी के झंडे थे और ऐसे प्लेकार्ड थे जिन पर चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के विरुद्ध नारे अंकित थे। वे भारत निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार और दिल्ली में छात्र संगठनों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ भी आवाज़ उठा रहे थे।
प्रदर्शनकारियों की माँगें
विपक्षी दलों और इन संगठनों की प्रमुख माँग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। इसके साथ ही, उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को पुनः शामिल करने की माँग की है।
कथित तौर पर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग पर 'वोट चोरी' का आरोप लगाया है। CPI(M) और उससे जुड़े युवा व छात्र संगठनों ने इन कथित अनियमितताओं के विरोध में यह मार्च आयोजित किया था।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पटना प्रशासन ने मार्च की पूर्व-सूचना मिलते ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। आर-ब्लॉक पर लगाए गए बैरिकेड के कारण प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर तक किसी गिरफ्तारी, झड़प या यातायात बाधित होने की पुष्टि नहीं हुई थी।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ जब देशभर में विपक्षी दल और विभिन्न संगठन SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची संशोधन को लेकर सड़कों पर हैं। गौरतलब है कि बिहार में आगामी चुनावी गतिविधियों की पृष्ठभूमि में यह विरोध और अधिक राजनीतिक महत्व रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
आगे की स्थिति
आर-ब्लॉक पर पुलिस के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। आने वाले घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CPI(M) और उसके सहयोगी संगठन अपने आंदोलन को किस दिशा में ले जाते हैं।