दिल्ली में ₹128 करोड़ का फर्जी GST रैकेट ध्वस्त, EOW ने 6 आरोपी दबोचे; 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क उजागर
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 15 मई 2026 को दिल्ली-एनसीआर में समन्वित छापेमारी कर एक संगठित फर्जी GST इनवॉइसिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया और 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी GST लेनदेन किए और लगभग ₹10 करोड़ का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा।
मामले की पृष्ठभूमि
इस प्रकरण में 24 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 66/2026 दर्ज की गई थी। जाँच में सामने आया कि किसी अनजान व्यक्ति के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी। पीड़ित को इस फर्म के अस्तित्व की कोई जानकारी नहीं थी। इसी फर्म की आड़ में ₹128 करोड़ से अधिक के लेनदेन किए गए।
रैकेट का तरीका
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों और चुराई हुई पहचान के आधार पर शेल कंपनियाँ बनाता था और उन्हें वैध कारोबार के रूप में पेश करता था। इन कंपनियों के ज़रिए बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी GST बिल तैयार किए जाते थे। बैंकिंग चैनलों से पैसे घुमाए जाते थे, नकद के बदले फर्जी एंट्री दी जाती थी और अवैध रूप से ITC का लाभ उठाया जाता था। जाँच में करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान की गई है जो इस रैकेट में सक्रिय थीं।
गिरफ्तार आरोपी और मास्टरमाइंड
तकनीकी निगरानी, GST रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित को इस रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता पाया गया। राज कुमार दीक्षित को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर करीब 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया था। इनके अलावा अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद भी फर्जी कंपनियों के संचालन, बैंक खाते खोलने और ऑनलाइन लेनदेन में सक्रिय रूप से शामिल थे।
छापेमारी और बरामदगी
EOW की विभिन्न टीमों ने एसीपी वीरेंद्र कादयान के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने ₹51.12 लाख नकद, फर्जी दस्तावेज और स्टांप, बड़ी संख्या में फर्जी इनवॉइस, 15 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, दो लैपटॉप और दो कारें बरामद कीं।
आगे की जाँच
अधिकारियों का कहना है कि पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और संबंधित संस्थाओं की पहचान में जुटी है। जाँच आगे बढ़ने के साथ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार फर्जी GST पंजीकरण और ITC धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए अभियान चला रही है।