दिल्ली में ₹128 करोड़ का फर्जी GST रैकेट ध्वस्त, EOW ने 6 आरोपी दबोचे; 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क उजागर

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दिल्ली में ₹128 करोड़ का फर्जी GST रैकेट ध्वस्त, EOW ने 6 आरोपी दबोचे; 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क उजागर

सारांश

दिल्ली EOW ने ₹128 करोड़ के फर्जी GST रैकेट का पर्दाफाश किया — जिसमें चुराई पहचान, 250 शेल कंपनियाँ और ₹10 करोड़ का अवैध ITC शामिल है। मास्टरमाइंड राज कुमार दीक्षित सहित 6 गिरफ्तार, जाँच जारी।

मुख्य बातें

दिल्ली EOW ने 15 मई 2026 को दिल्ली-एनसीआर में छापेमारी कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरोह ने ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी GST लेनदेन किए और ₹10 करोड़ का अवैध ITC हासिल किया।
मास्टरमाइंड राज कुमार दीक्षित ने कथित तौर पर करीब 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क बनाया था।
पीड़ित की पहचान का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम की फर्जी फर्म बनाई गई।
बरामदगी में ₹51.12 लाख नकद , 15 मोबाइल फोन , 2 लैपटॉप , फर्जी दस्तावेज और 2 कारें शामिल।
जाँच में अब तक करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान; और खुलासों की संभावना।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 15 मई 2026 को दिल्ली-एनसीआर में समन्वित छापेमारी कर एक संगठित फर्जी GST इनवॉइसिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया और 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी GST लेनदेन किए और लगभग ₹10 करोड़ का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा।

मामले की पृष्ठभूमि

इस प्रकरण में 24 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 66/2026 दर्ज की गई थी। जाँच में सामने आया कि किसी अनजान व्यक्ति के आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर सितंबर 2025 में मेसर्स आरके एंटरप्राइजेज नाम से एक फर्जी फर्म बनाई गई थी। पीड़ित को इस फर्म के अस्तित्व की कोई जानकारी नहीं थी। इसी फर्म की आड़ में ₹128 करोड़ से अधिक के लेनदेन किए गए।

रैकेट का तरीका

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों और चुराई हुई पहचान के आधार पर शेल कंपनियाँ बनाता था और उन्हें वैध कारोबार के रूप में पेश करता था। इन कंपनियों के ज़रिए बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति के फर्जी GST बिल तैयार किए जाते थे। बैंकिंग चैनलों से पैसे घुमाए जाते थे, नकद के बदले फर्जी एंट्री दी जाती थी और अवैध रूप से ITC का लाभ उठाया जाता था। जाँच में करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान की गई है जो इस रैकेट में सक्रिय थीं।

गिरफ्तार आरोपी और मास्टरमाइंड

तकनीकी निगरानी, GST रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर दिलीप कुमार और राज कुमार दीक्षित को इस रैकेट का मुख्य साजिशकर्ता पाया गया। राज कुमार दीक्षित को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर करीब 250 शेल कंपनियों का नेटवर्क खड़ा किया था। इनके अलावा अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद भी फर्जी कंपनियों के संचालन, बैंक खाते खोलने और ऑनलाइन लेनदेन में सक्रिय रूप से शामिल थे।

छापेमारी और बरामदगी

EOW की विभिन्न टीमों ने एसीपी वीरेंद्र कादयान के नेतृत्व में दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने ₹51.12 लाख नकद, फर्जी दस्तावेज और स्टांप, बड़ी संख्या में फर्जी इनवॉइस, 15 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, दो लैपटॉप और दो कारें बरामद कीं।

आगे की जाँच

अधिकारियों का कहना है कि पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और संबंधित संस्थाओं की पहचान में जुटी है। जाँच आगे बढ़ने के साथ और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार फर्जी GST पंजीकरण और ITC धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए अभियान चला रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी GST खुफिया तंत्र को इसकी भनक नहीं लगी। असली सवाल यह है कि इन कंपनियों को ITC क्लेम पास करने वाले सिस्टम में क्या खामियाँ थीं, और क्या अन्य लाभार्थी — जिन्होंने फर्जी बिल खरीदे — भी जाँच के दायरे में आएँगे।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली का ₹128 करोड़ का फर्जी GST रैकेट क्या है?
यह एक संगठित धोखाधड़ी का मामला है जिसमें गिरोह ने चुराई हुई पहचान से शेल कंपनियाँ बनाकर बिना किसी वास्तविक माल या सेवा के ₹128 करोड़ से अधिक के फर्जी GST इनवॉइस तैयार किए और ₹10 करोड़ का अवैध ITC हासिल किया। दिल्ली EOW ने 15 मई 2026 को 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया है?
गिरफ्तार आरोपियों में राज कुमार दीक्षित (कथित मास्टरमाइंड), दिलीप कुमार, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद शामिल हैं। इन सभी पर फर्जी कंपनियाँ चलाने, बैंक खाते संचालित करने और अवैध लेनदेन में शामिल होने के आरोप हैं।
गिरोह ने GST धोखाधड़ी किस तरह अंजाम दी?
गिरोह ने किसी अनजान व्यक्ति के आधार, पैन और बायोमेट्रिक विवरण का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाई, फिर शेल कंपनियों के ज़रिए बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के फर्जी GST बिल जारी किए। बैंकिंग चैनलों से पैसे घुमाए गए और अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया।
छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने ₹51.12 लाख नकद, फर्जी दस्तावेज और स्टांप, बड़ी संख्या में फर्जी इनवॉइस, 15 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, दो लैपटॉप और दो कारें बरामद कीं। जाँच में अब तक करीब 50 शेल कंपनियों की पहचान की गई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और संबंधित संस्थाओं की पहचान कर रही है। अधिकारियों के अनुसार जाँच आगे बढ़ने के साथ और बड़े खुलासे हो सकते हैं, और यह भी देखा जाएगा कि किन व्यवसायों ने इन फर्जी बिलों का उपयोग ITC क्लेम के लिए किया।
राष्ट्र प्रेस
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