दिल्ली हाई कोर्ट ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया

Click to start listening
दिल्ली हाई कोर्ट ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया

सारांश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है, जिसमें 'रेलवे में जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले में दस्तावेजों के अस्वीकार पर सवाल उठाए गए हैं। क्या यह मामला न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है?

Key Takeaways

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया।
  • ट्रायल कोर्ट ने दस्तावेजों की आपूर्ति की मांग को खारिज किया।
  • यह मामला 'रेलवे में जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार से संबंधित है।
  • लालू प्रसाद यादव पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया।
  • आरोपियों ने अपने खिलाफ सभी आरोपों से इनकार किया है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया है। इस याचिका में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 'रेलवे में जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा जिन दस्तावेजों को अनुचित माना गया था, उन्हें उपलब्ध कराने से इन्कार किया गया था।

मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद, जस्टिस मनोज जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ ने सीबीआई को जवाब देने के लिए कहा और मामले को 1 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। राबड़ी देवी ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने उन दस्तावेजों तक पहुंच की अनुमति नहीं दी, जिन पर भरोसा नहीं किया गया था, और दिल्ली उच्च न्यायालय से उचित राहत की मांग की है।

यह मामला तब सामने आया जब दिल्ली की एक अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों द्वारा सीबीआई द्वारा दायर मामले में उन दस्तावेजों की आपूर्ति की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 91 के तहत दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए यह माना कि उनके द्वारा मांगे गए दस्तावेजों की मांग असंगत थी और आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया के खिलाफ थी।

ट्रायल कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया है, उनकी मांग अधिकार के तौर पर नहीं की जा सकती और उन्हें केवल मुकदमे के उचित चरण पर ही मांगा जा सकता है, जब बचाव पक्ष के सबूत पेश किए जा रहे हों। अदालत ने आगे कहा कि आरोपियों को उन दस्तावेजों की सूची पाने का अधिकार है, लेकिन वे अभियोजन पक्ष के सबूतों की शुरुआत में उन सभी दस्तावेजों की मांग तब तक नहीं कर सकते, जब तक कि वे उनकी आवश्यकता और प्रासंगिकता को साबित न कर दें।

सभी 1,675 दस्तावेजों की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के अनुरोध से मुकदमा बाधित होगा और वैधानिक प्रक्रिया उलट जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह प्रार्थना शुरू में ही मुकदमे को एक उलझन भरे जाल में फंसाने के इरादे से की गई प्रतीत होती है और चेतावनी दी कि ऐसे अनुरोधों को स्वीकार करने से 'कभी न खत्म होने वाली जिरह' शुरू हो सकती है।

यह मामला उन आरोपों से संबंधित है कि 2004 और 2009 के बीच रेल मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रेलवे में नियुक्तियां कीं, जिसके बदले में उनके परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं को जमीन के टुकड़े हस्तांतरित किए गए।

सीबीआई के अनुसार, उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बाजार दर से कम कीमतों पर जमीन हस्तांतरित की, जो विभिन्न रेलवे जोन में नौकरियों के बदले में दी गई थी। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है। उन्होंने कहा है कि वे इस मामले को इसके गुण-दोष के आधार पर लड़ेंगे। इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस महीने की शुरुआत में सीबीआई को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर याचिका पर दिया गया था, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें इस मामले में आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।

जनवरी में ट्रायल कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे। कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक आपराधिक गिरोह के हिस्से के तौर पर काम कर रहे थे और कथित तौर पर सरकारी नौकरी को अचल संपत्तियां हासिल करने का एक जरिया बना रहे थे।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायपालिका की भूमिका इन मामलों में कितनी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव डाल सकते हैं।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को क्यों नोटिस जारी किया?
दिल्ली हाई कोर्ट ने राबड़ी देवी की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया है, जिसमें 'रेलवे में जमीन के बदले नौकरी' भ्रष्टाचार मामले के दस्तावेजों के अस्वीकार पर सवाल उठाए गए हैं।
राबड़ी देवी ने किस आदेश को चुनौती दी है?
राबड़ी देवी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अभियोजन पक्ष द्वारा जिन दस्तावेजों पर भरोसा नहीं किया गया, उन्हें उपलब्ध कराने से इनकार किया गया था।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को होगी।
क्या लालू प्रसाद यादव पर आरोप हैं?
हाँ, लालू प्रसाद यादव पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रेलवे में नियुक्तियां कीं।
क्या आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है?
हाँ, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों ने इन आरोपों से इनकार किया है और खुद को निर्दोष बताया है।
Nation Press