क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने की याचिका पर केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा है।
- केंद्र सरकार ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के लिए आमने-सामने की आवश्यकता बताई है।
- अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।
- याचिका में एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग की गई है।
- सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति पर इस याचिका का प्रभाव पड़ सकता है।
नई दिल्ली, 26 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। एयर प्यूरीफायर पर लगाए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को कम करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र को 10 दिनों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी घटाने या समाप्त करने के लिए जीएसटी काउंसिल की बैठक केवल आमने-सामने हो सकती है, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नहीं।
जस्टिस विकास महाजन और जस्टिस विनोद कुमार की विशेष बेंच ने केंद्र को काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एन. वेंकटरमन ने एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर विस्तृत जवाब देने के लिए समय मांगा।
जस्टिस महाजन की बेंच ने आदेश में कहा, "केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एन. वेंकटरमन ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठक अगर होनी है तो वह केवल आमने-सामने ही संभव है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक नहीं हो सकती।"
उन्होंने कहा कि एक विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल करने की आवश्यकता है और याचिकाकर्ता को इसके बाद जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई।
सुनवाई के दौरान वेंकटरमन ने वकील कपिल मदान द्वारा दायर जनहित याचिका की वैधता पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क किया कि याचिका पक्षपातपूर्ण थी और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति को प्रभावित करने वाले निर्देशों की मांग करने के बावजूद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पक्षकार बनाए बिना दायर की गई थी।
केंद्र सरकार के कानून अधिकारी ने कहा, "कल हमारी एक आपातकालीन बैठक हुई थी। हमें इस पीआईएल से चिंता है। हमें नहीं पता कि इस याचिका के पीछे कौन है। यह पीआईएल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग तो पार्टी भी नहीं है।"
انہوں نے مزید کہا کہ जीएसटी میں کمی کا حکم دینا "پینڈورا باکس" کھول سکتا ہے۔
केंद्र सरकार के कानून अधिकारी ने कहा, "संसदीय समिति ने कुछ सिफारिश की है। एक प्रक्रिया है। हम अभी कुछ नहीं कह रहे हैं।" यह सुझाव देते हुए कि जनहित याचिका को जीएसटी काउंसिल के सामने एक प्रतिनिधित्व के रूप में माना जा सकता है।
दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए केंद्र की आपत्तियों का जवाब दिया और कहा कि एयर प्यूरीफायर पर गलत जीएसटी स्लैब के तहत टैक्स लगाया जा रहा है। वकील मदन ने कहा, "नोटिफिकेशन को पढ़ने से साफ है कि वे एक अलग शेड्यूल के तहत आते हैं और उन पर गलत तरीके से टैक्स लगाया जा रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी देरी से राष्ट्रीय राजधानी में रहने वालों की परेशानी और बढ़ेगी। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि काउंटर एफिडेविट मंगवाए बिना वह इस मामले में अंतिम निर्देश जारी नहीं कर सकता। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी।