दिल्ली लक्ष्मी योजना: 2.65 लाख महिलाओं ने कराया पंजीकरण, 52,175 ने जमा किए अंतिम आवेदन
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली लक्ष्मी योजना को 4 अगस्त 2026 को मंगलवार दोपहर तक जबरदस्त जनसमर्थन मिला — 2.65 लाख से अधिक महिलाओं ने पंजीकरण कराया और 52,175 महिलाओं ने अपने अंतिम आवेदन पोर्टल पर जमा कर दिए। अधिकारियों के अनुसार यह आँकड़ा दोपहर 2 बजे IST तक का है।
पंजीकरण की रफ्तार
सुबह 7 बजे तक पंजीकरणों की कुल संख्या 2.38 लाख थी और 38,076 महिलाएँ अंतिम आवेदन जमा कर चुकी थीं। यानी महज सात घंटों में 27,000 से अधिक नए पंजीकरण दर्ज हुए। गौरतलब है कि योजना का ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के पहले 12 घंटों में ही 33,730 से अधिक पंजीकरण हो गए थे और उस दौरान 1,940 अंतिम आवेदन जमा किए गए थे।
योजना की संरचना और वित्तीय विकल्प
इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह ₹2,500 की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि लाभार्थियों को दो विकल्पों में से एक चुनने की सुविधा होगी।
पहले विकल्प में ₹1,000 प्रतिमाह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) वॉलेट में जमा होंगे — रोज़मर्रा के खर्च के लिए — और शेष ₹1,500 आरडी/एफडी खाते में जाएंगे। दूसरे विकल्प में पूरे ₹2,500 आरडी/एफडी में जमा किए जाएंगे, जिससे ब्याज सहित दीर्घकालिक बचत का अवसर मिलेगा।
सीबीडीसी वॉलेट पर प्रतिबंध
मुख्यमंत्री गुप्ता ने स्पष्ट किया कि CBDC वॉलेट में जमा राशि का उपयोग शराब, तंबाकू, मादक पदार्थ, लॉटरी टिकट, जुआ या सट्टेबाजी पर नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए एक डिजिटल नेगेटिव लिस्ट लागू की जाएगी, ताकि सरकारी सहायता केवल आवश्यक घरेलू ज़रूरतों पर खर्च हो।
योजना का उद्देश्य और दायरा
यह योजना शुरू में तीन वर्षों के लिए लागू होगी और इससे लगभग 17 लाख महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली मंत्रिमंडल ने इसे मूलतः महिला समृद्धि योजना के नाम से मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में इसे दिल्ली लक्ष्मी योजना नाम दिया गया, ताकि महिलाओं की गरिमा, समृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण की व्यापक भावना को बेहतर ढंग से व्यक्त किया जा सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता से परे जाकर इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को बचत, डिजिटल वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता से जोड़ना है, जिससे यह देश में एक अभिनव मॉडल बन गया है।"
आगे क्या
पंजीकरण की यह रफ्तार बताती है कि योजना की माँग लक्षित 17 लाख लाभार्थियों की संख्या को जल्द छू सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाएँ राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनी हुई हैं। योजना का क्रियान्वयन और CBDC के व्यावहारिक उपयोग का अनुभव आने वाले महीनों में इसकी वास्तविक सफलता का पैमाना तय करेगा।