क्या बसंत पंचमी पर दिल्ली की मस्जिदें भी पीले फूलों से सजती हैं?

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क्या बसंत पंचमी पर दिल्ली की मस्जिदें भी पीले फूलों से सजती हैं?

सारांश

दिल्ली की मस्जिदों में बसंत पंचमी पर होने वाले भव्य आयोजन को जानें, जहां हर धर्म के लोग मिलकर मनाते हैं। ये परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इस दिन पीले फूलों और वस्त्रों के साथ खुशियों का उत्सव मनाया जाता है।

Key Takeaways

  • बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा होती है।
  • दिल्ली की मस्जिदों में पीले फूलों से सजावट की जाती है।
  • यह आयोजन गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण है।
  • हर धर्म के लोग इसमें भाग लेते हैं।
  • यह 700 साल पुरानी परंपरा है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के फूल और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं।

पूरे देश में 23 जनवरी को मां की अराधना की जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की मस्जिद भी इस दिन पीले रंग में रंग जाती है और गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है?

बसंत पंचमी के अवसर पर दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह को पीले रंग से सजाया जाता है। सभी धर्मों के लोग पीले वस्त्र पहनकर उत्सव मनाते हैं। यह खुशी मां सरस्वती के पूजन के लिए नहीं, बल्कि एक शिष्य द्वारा अपने गुरु की खुशी के लिए होती है। 700 साल पुरानी यह परंपरा आज भी जीवित है। इस दिन दरगाह में सूफी बसंत का आयोजन होता है और लोग पीली चादर चढ़ाते हैं।

इस परंपरा के इतिहास में कहा जाता है कि 13वीं-14वीं शताब्दी के दौरान हजरत निजामुद्दीन औलिया अपने प्रिय भतीजे के निधन से शोक में थे। उन्होंने न तो किसी से बात की और न ही ठीक से खाया। इस स्थिति का समाधान अमीर खुसरो नहीं निकाल पा रहे थे। बसंत पंचमी के दिन उन्होंने कुछ महिलाओं को पीले वस्त्र और पीले फूल लिए देखा। पूछने पर महिलाओं ने बताया कि वे इनका इस्तेमाल अपनी देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए करती हैं।

यह सुनकर अमीर खुसरो ने सोचा कि पीले फूल देखकर उनके गुरु खुश हो जाएंगे। उन्होंने पीली पोशाक पहनकर हाथ में सरसों के फूल लेकर गुरु के सामने गए। अमीर खुसरो का यह पहनावा देखकर हजरत निजामुद्दीन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसी दिन से हर वर्ष बसंत पंचमी के दिन दरगाह में सूफी बसंत मनाया जाता है।

खास बात यह है कि सूफी बसंत का हिस्सा केवल एक विशेष धर्म के लोग नहीं होते, बल्कि ईसाई, सिख और हिंदू भी सहभागी होते हैं। यही कारण है कि सूफी बसंत को भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

Point of View

बल्कि समाज में भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।
NationPress
22/01/2026

Frequently Asked Questions

बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है?
बसंत पंचमी का पर्व मां सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है।
दिल्ली में बसंत पंचमी का आयोजन कैसे होता है?
दिल्ली की मस्जिदों में इस दिन पीले फूलों और वस्त्रों से सजावट की जाती है।
सूफी बसंत का क्या महत्व है?
यह आयोजन विभिन्न धर्मों के लोगों को एक साथ लाता है और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
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