क्या दिल्ली को 'कैंसर कैपिटल' बनाने और कूड़े के नए पहाड़ खड़े करने का काम सरकार कर रही है?

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क्या दिल्ली को 'कैंसर कैपिटल' बनाने और कूड़े के नए पहाड़ खड़े करने का काम सरकार कर रही है?

सारांश

दिल्ली में कूड़े के निस्तारण को लेकर आम आदमी पार्टी के सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली को जानबूझकर कूड़े के पहाड़ों से भरकर इसे 'कैंसर कैपिटल' बनाया जा रहा है। क्या यह सच है?

Key Takeaways

  • दिल्ली में कूड़े का प्रबंधन एक गंभीर समस्या है।
  • कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
  • भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़े का निस्तारण हो रहा है।
  • स्थानीय निवासियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
  • सरकार को ठोस योजना की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राजधानी में कूड़े के निस्तारण को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिल्ली को जानबूझकर कूड़े के नए-नए पहाड़ देकर इसे भारत की 'कैंसर कैपिटल' बनाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भलस्वा लैंडफिल साइट का कूड़ा किराड़ी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में डाला जा रहा है, जिससे वहां रहने वाले गरीब और पूर्वांचली समुदाय के लोगों को कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है।

सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि प्लास्टिक और केमिकल युक्त कूड़ा धीरे-धीरे पूरे इलाके की जमीन, हवा और भूजल को प्रदूषित कर रहा है। यह कूड़ा ट्यूबवेल के पानी को जहरीला बनाने के लिए काफी है और इसके दुष्प्रभाव आने वाले वर्षों में और गंभीर होंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़ा कम दिखाने के लिए यह फर्जीवाड़ा कर रही है और कूड़े को दूसरी जगहों पर स्थानांतरित कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में करीब 15 वर्षों तक एमसीडी में भाजपा का शासन रहा और इसी दौरान कूड़े के तीन बड़े पहाड़ खड़े हुए, जो आज दिल्ली के लिए कलंक बन चुके हैं।

उन्होंने सीएम रेखा गुप्ता को भी इस स्थिति का जिम्मेदार बताते हुए कहा कि वह स्वयं कई बार भाजपा की पार्षद रह चुकी हैं और उस समय पूरी एमसीडी पर भाजपा का नियंत्रण था। बिना किसी वैज्ञानिक योजना के वर्षों तक कूड़ा जमा किया गया, जिसका खामियाजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है। उन्होंने हाल ही में किराड़ी क्षेत्र के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हजारों ट्रक कूड़ा डंप किया गया है। इलाके में भयंकर बदबू, उड़ती धूल और प्रदूषण का ऐसा हाल है कि कुछ देर रुकने पर ही आंखों में जलन और गले में परेशानी होने लगती है। स्थानीय लोगों के लिए वहां रहना तक मुश्किल हो गया है।

सौरभ भारद्वाज ने चेतावनी दी कि बरसात के मौसम में इस कूड़े से निकलने वाला ‘लीचेट’ भूजल में मिलकर उसे स्थायी रूप से प्रदूषित कर देगा। किराड़ी जैसे इलाकों में लोग बड़ी संख्या में ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर हैं, और ऐसे में यह स्थिति भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दे सकती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह कूड़ा इतना ही सुरक्षित है, तो मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल या अन्य बड़े अधिकारियों के आवासों के आसपास क्यों नहीं डाला जाता। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ आंकड़ों और प्रचार के लिए काम कर रही है, जबकि असल में वह दिल्ली के लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है। आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर आगे भी खुलासे करने की बात कही है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि दिल्ली में कूड़े का सही प्रबंधन न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि नागरिकों की सेहत के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक ठोस योजना की आवश्यकता है जिससे भविष्य में इस समस्या का समाधान हो सके।
NationPress
06/02/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली में कूड़े की समस्या क्यों बढ़ रही है?
दिल्ली में कूड़े की समस्या बढ़ने का मुख्य कारण उचित निस्तारण की कमी और जनसंख्या वृद्धि है।
कूड़े के पहाड़ों से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
कूड़े के पहाड़ों से वायु, जल और मिट्टी में प्रदूषण होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
सरकार इस समस्या के समाधान के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने कुछ योजनाएं बनाई हैं, लेकिन कार्यान्वयन की कमी के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
स्थानीय निवासियों की स्थिति क्या है?
स्थानीय निवासियों को कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दैनिक जिंदगी प्रभावित हो रही है।
क्या आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कुछ कर रही है?
हाँ, आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर आवाज उठाई है और आगे भी खुलासे करने का आश्वासन दिया है।
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