दिल्ली शराब नीति मामले में ईडी का हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने का प्रयास
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियाँ हटाने की मांग की।
- यह मामला अरविंद केजरीवाल से संबंधित है।
- सीबीआई ने आरोप लगाया कि नीति में भ्रष्टाचार था।
- दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई मंगलवार को होगी।
- निचली अदालत ने साजिश के सिद्धांत को खारिज किया।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली शराब नीति से संबंधित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का सहारा लिया है। यह मामला आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा अन्य आरोपियों से जुड़े सीबीआई केस में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपमुक्त किए जाने के दौरान की टिप्पणियों से संबंधित है।
ईडी ने अपनी याचिका में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने जब आदेश जारी किया, तब एजेंसी के प्रति जो टिप्पणियाँ की गईं, वे अनुचित हैं। एजेंसी का कहना है कि इन टिप्पणियों को बिना किसी उचित सुनवाई के और मात्र कयासों के आधार पर लिखा गया है, जिससे उनकी जांच प्रक्रिया और प्रतिष्ठा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ईडी ने अदालत से निवेदन किया है कि इन टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाए, क्योंकि एजेंसी को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया था। इस याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच मंगलवार को सुनवाई करेगी। अदालत इस मामले में दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई का निर्धारण करेगी।
गौरतलब है कि यह मामला तत्कालीन आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा लागू की गई दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से जुड़ा है, जिसे बाद में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों के चलते रद्द किया गया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया था कि यह नीति कुछ निजी शराब कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, जिसके बदले में कथित तौर पर चुनावी उद्देश्यों के लिए अग्रिम रिश्वत ली गई थी, जिसमें साउथ ग्रुप भी शामिल था। सीबीआई ने यह भी कहा कि नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में अनियमितताएँ थीं, जिसके कारण लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ मिला और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। हालांकि, निचली अदालत ने एजेंसी के व्यापक साजिश के सिद्धांत को खारिज कर दिया और कहा कि उस समय के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि यह नीति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परामर्श और विचार-विमर्श के पश्चात तैयार की गई थी।