दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान जून में जारी, प्रदूषण नियंत्रण के लिए नवंबर से पहले तैयारी शुरू
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 19 जून 2026 को सर्दियों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रोडक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क अधिसूचित कर दिया है — यह पहली बार है जब यह ढाँचा नवंबर से महीनों पहले, जून में ही जारी किया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में जारी इस योजना का मकसद नागरिकों, उद्योगों, निर्माण एजेंसियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को पर्याप्त तैयारी का समय देना है, ताकि सर्दियों में दिल्लीवासियों को अनावश्यक असुविधा न हो।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) दिल्ली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह व्यवस्था सामान्यतः हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ लागू रहेगी। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में यह योजना अक्सर अक्टूबर-नवंबर में ही घोषित होती थी, जिससे संबंधित पक्षों को तैयारी के लिए बेहद कम समय मिलता था।
वाहन और यातायात संबंधी नियम
नई व्यवस्था के तहत केवल वैध पीयूसीसी (प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र) वाले वाहनों को ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन मिलेगा। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस फोर कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालाँकि, सीएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), आपातकालीन सेवाओं और सरकारी कार्यों से जुड़े वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा — जो निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने की नीति का हिस्सा है।
निर्माण कार्य और धूल नियंत्रण
1 नवंबर से 31 जनवरी तक सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा। 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच, यदि आवश्यकता पड़ी, तो निर्माण कार्यों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे। बड़े निर्माण स्थलों और ऊँची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर निगरानी के लिए ड्रोन और फील्ड मॉनिटरिंग का उपयोग किया जाएगा।
कार्यालय और कार्यस्थल संबंधी व्यवस्था
आवश्यकता पड़ने पर सरकारी और निजी कार्यालयों के समय में बदलाव किया जा सकेगा। इसके साथ ही दोनों क्षेत्रों में 50 प्रतिशत तक कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने की व्यवस्था लागू की जा सकेगी — यानी बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे। यह कदम सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाकर यातायात-जनित प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से उठाया जाएगा।
आगे क्या होगा
सीएमओ की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रदूषण से लड़ाई का सबसे कारगर तरीका समय रहते तैयारी है, और दिल्ली सरकार इसी संकल्प के साथ मिशन मोड में काम कर रही है। यह ढाँचा GRAP के साथ समन्वित रूप से लागू होगा, जिसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) संचालित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जून में ही इस योजना की अधिसूचना जारी करना एक सकारात्मक कदम है, बशर्ते जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन उतनी ही तत्परता से हो।