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क्या ढाका विश्वविद्यालय चुनावों में कट्टरपंथी जमात की छात्र इकाई की जीत ने नया इतिहास रच दिया?

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क्या ढाका विश्वविद्यालय चुनावों में कट्टरपंथी जमात की छात्र इकाई की जीत ने नया इतिहास रच दिया?

सारांश

ढाका विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा की जीत ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान ने इसे 'नया इतिहास' बताया है। क्या यह जीत बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का उभार है?

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ने 28 पदों के लिए चुनाव लड़ा।
पाकिस्तान ने इसे 'नया इतिहास' बताया।
चुनाव में 471 उम्मीदवारों ने भाग लिया।
हिंसा समर्थक कट्टरपंथियों को तरजीह मिल रही है।
डीयूसीएसयू चुनाव में धांधली के आरोप लगे हैं।

ढाका, 10 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान ने ढाका विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव (डीयूसीएसयू) में बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) की छात्र शाखा की जीत पर ख़ुशी व्यक्त की है। परिणाम बुधवार को घोषित किए गए।

कुल 28 पदों के लिए 471 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, जिनमें इस्लामी छात्र शिबिर (आईसीएस) पैनल के अबू शादिक कायम, एस एम फरहाद और मोहिउद्दीन खान क्रमशः उपाध्यक्ष, महासचिव और सहायक महासचिव पद के लिए चुने गए।

चुनावों में जीत के तुरंत बाद, स्थानीय मीडिया ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान ने भी डीयूसीएसयू चुनाव जीतने पर आईसीएस को बधाई दी और कहा कि बांग्लादेश में "नया इतिहास" रचा गया है।

पिछले साल जुलाई-अगस्त में हुए विरोध प्रदर्शनों में हिंदुओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और गैर-इस्लामी सांस्कृतिक संस्थानों के धार्मिक स्थलों पर भीड़ ने हमला कर कलाकृतियों को तहस नहस कर छात्र एकता को आकार दिया था। हिंसा का यह दौर अब भी जारी है और यही बात डीयूसीएसयू चुनाव में आईसीएस की सफलता में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को देखते हुए, विश्लेषकों का मानना ​​है कि ये नतीजे यह भी दर्शाते हैं कि बांग्लादेश की राजनीति, हिंसा समर्थक कट्टरपंथियों को तरजीह दे रही है। आईसीएस द्वारा डीयूसीएसयू चुनाव जीतने के साथ ही जमात-ए-इस्लामी का हेरफेर या साजिश के जरिए एकीकरण शुरू हो गया है।

डीयूसीएसयू के इतिहास में यह पहली बार है कि जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ने खुले तौर पर पूरे पैनल के साथ चुनाव लड़ा, जिसका मुख्य कारण मुहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन के तहत हुए चुनाव और प्रमुख अवामी लीग की बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध है।

आईसीएस पिछले साल सितंबर में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के चौंकाने वाले इस्तीफे के एक महीने बाद सार्वजनिक रूप से फिर से सामने आया, और इसने ढाका विश्वविद्यालय में बांग्लादेश छात्र लीग के 15 साल लंबे वर्चस्व को भी समाप्त कर दिया।

अपने पुनरुत्थान के एक साल बाद, इस कट्टरपंथी छात्र संगठन ने मदरसों (धार्मिक इस्लामी स्कूलों) के छात्रों का पर्याप्त समर्थन हासिल करने में कामयाबी हासिल की।

इस बीच, अबिदुल और उमा ने डीयूसीएसयू चुनाव परिणामों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उनमें धांधली हुई थी और वो एक "तमाशा" था।

उन्होंने आरोप लगाया कि ढाका विश्वविद्यालय प्रशासन ने देश को शर्मसार किया है क्योंकि पूरा प्रशासन शिबिर के वफादार चला रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि ढाका विश्वविद्यालय के चुनाव परिणाम बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों की बढ़ती स्थिति को दर्शाते हैं। हमें इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि यह देश की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ने कितने पदों पर चुनाव लड़ा?
जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा ने कुल 28 पदों पर चुनाव लड़ा।
पाकिस्तान ने इस जीत पर क्या प्रतिक्रिया दी?
पाकिस्तान ने इस जीत पर खुशी व्यक्त की और इसे 'नया इतिहास' बताया।
चुनाव में कितने उम्मीदवार थे?
चुनाव में कुल 471 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।
इस चुनाव का क्या महत्व है?
यह चुनाव बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों के उभार को दर्शाता है।
क्या चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे?
हाँ, चुनाव में धांधली के आरोप लगे थे।
राष्ट्र प्रेस
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