13 अक्टूबर 2026
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दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'बाहरी वोटरों से जीतने की राजनीति अब नहीं चलेगी'

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दिलीप घोष का ममता पर हमला: 'बाहरी वोटरों से जीतने की राजनीति अब नहीं चलेगी'

सारांश

कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष ने न्यूटाउन में सीधा हमला बोला — ममता बनर्जी की 'बाहरी वोटर' वाली रणनीति का समय खत्म। वोटर सूची विवाद, चुनाव आयुक्त विरोध और इमरजेंसी की याद दिलाते हुए BJP ने बंगाल में अगली लड़ाई का सुर तय कर दिया।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 13 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के न्यूटाउन में मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी और TMC पर तीखा हमला बोला।
घोष ने आरोप लगाया कि TMC बाहरी लोगों को वोटर बनाकर चुनाव जीतने की 'पुरानी राजनीति' पर निर्भर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम वोटर सूची से नहीं हटाया जाएगा — सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ममता के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को घोष ने 'पुरानी आदत' बताया।
विपक्ष के लोकतंत्र खत्म करने के आरोप पर घोष ने इमरजेंसी की याद दिलाते हुए पलटवार किया।

केंद्रीय कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष ने 13 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के न्यूटाउन में मीडिया से बात करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोप लगाया कि वह बाहरी लोगों को मतदाता बनाकर चुनाव जीतने की 'पुरानी राजनीति' पर टिकी है, जो अब देश में नहीं चलेगी। घोष की यह प्रतिक्रिया ममता बनर्जी की पुरानी वोटर सूची से चुनाव कराने की माँग के संदर्भ में आई है।

घोष ने क्या कहा

दिलीप घोष ने न्यूटाउन में पत्रकारों से कहा, 'उनकी वोटर लिस्ट, उनकी पुलिस और उनका अधिकारी रहेगा, तभी वो जीतेंगी क्या? 15 साल तक बंगाल की जनता ने उन्हें मौका दिया। उन्होंने अपनी मर्जी से काम किया और बंगाल को बर्बाद कर दिया।' उन्होंने आगे कहा कि बाहरी लोगों को लाकर मतदाता बनाना और उनसे वोट डलवाना — इस तरह की राजनीति अब देश में नहीं चलेगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में वोटर सूची की समीक्षा और नामों के कथित विलोपन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। TMC और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच इस मुद्दे पर टकराव लगातार बढ़ रहा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन पर निशाना

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ममता बनर्जी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर घोष ने कहा कि यह उनकी पुरानी आदत है और इसी वजह से उन्हें सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि TMC 'अब खत्म होने की कगार पर है' और जनता सब देख रही है।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाना नया नहीं है — परंतु किसी मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन की योजना राजनीतिक रूप से असाधारण कदम माना जा रहा है।

वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोपों पर सफाई

वोटर सूची से नाम काटे जाने के आरोपों पर दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा, 'किसी भी असली वोटर का नाम नहीं हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा है और प्रक्रिया चल रही है।' घोष ने यह भी कहा कि जाँच के अंतर्गत जो नाम हैं उन्हें स्पष्ट किया जाए — जो योग्य हों उन्हें शामिल किया जाए और जो अयोग्य हों उन्हें हटाया जाए।

आलोचकों का कहना है कि वोटर सूची की यह समीक्षा प्रक्रिया राज्य में अल्पसंख्यक और प्रवासी मतदाताओं को असंगत रूप से प्रभावित कर सकती है — हालाँकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है।

लोकतंत्र पर विपक्ष के आरोपों का जवाब

विपक्ष के लोकतंत्र खत्म करने के आरोप पर घोष ने पलटवार करते हुए कहा, 'लोकतंत्र की वजह से ही आप ऐसे बयान दे पा रहे हैं और विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर पा रहे हैं। जिन लोगों के साथ आप जुड़े हैं, उन्हीं लोगों ने इमरजेंसी लगाई थी।' उन्होंने विपक्ष को चेताया कि जनता सब देख रही है और वही तय करेगी कि आगे क्या करना है।

इमरजेंसी का यह संदर्भ BJP नेताओं द्वारा कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के खिलाफ अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला राजनीतिक तर्क है। पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह बयानबाज़ी आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि वोटर सूची सफाई के वास्तविक आँकड़े अभी सार्वजनिक नहीं हुए — और बिना पारदर्शी डेटा के, दोनों पक्षों के दावे केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस बाहरी लोगों को मतदाता बनाकर चुनाव जीतने की 'पुरानी राजनीति' पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि यह तरीका अब देश में नहीं चलेगा और जनता सब देख रही है।
वोटर लिस्ट विवाद क्या है और इसमें सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका है?
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की समीक्षा के दौरान नाम हटाए जाने के आरोप उठे हैं, जिसे TMC राजनीतिक षड्यंत्र बता रही है। दिलीप घोष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा और इसी के अनुसार प्रक्रिया चल रही है।
ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन क्यों करना चाहती हैं?
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है, जो कथित तौर पर वोटर सूची की समीक्षा प्रक्रिया पर उनकी आपत्तियों से जुड़ी है। दिलीप घोष ने इसे ममता की 'पुरानी आदत' बताते हुए खारिज किया।
दिलीप घोष ने इमरजेंसी का ज़िक्र क्यों किया?
विपक्ष के लोकतंत्र खत्म करने के आरोप के जवाब में घोष ने कांग्रेस द्वारा लगाई गई आपातकाल (इमरजेंसी) की याद दिलाई। यह BJP नेताओं का परिचित राजनीतिक तर्क है, जिससे वे विपक्ष की लोकतांत्रिक साख पर सवाल उठाते हैं।
इस विवाद का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
वोटर सूची, बाहरी मतदाताओं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर यह टकराव आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि तय कर रहा है। BJP और TMC दोनों इस मुद्दे को अपने-अपने आधार मतदाताओं को एकजुट करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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