पटियाला में गिरफ्तार हुए बर्खास्त AIG राजजीत सिंह हुंदल, 2023 से थे फरार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पुलिस के बर्खास्त असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल (AIG) राजजीत सिंह हुंदल को गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को पटियाला में गिरफ्तार कर लिया गया। वह कथित मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अप्रैल 2023 से फरार चल रहे थे। एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की एक विशेष टीम ने तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद यह कार्रवाई की।
गिरफ्तारी की पूरी कहानी
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने मीडिया को बताया कि तकनीकी निगरानी और वित्तीय जांच के आधार पर ANTF की टीम ने हुंदल को पटियाला में दबोचा। पुलिस उनके विरुद्ध दर्ज मामलों की जांच के लिए अदालत से रिमांड मांगेगी। गौरतलब है कि 10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उनके वरिष्ठ वकील अमित रावल ने अदालत को बताया था कि हुंदल सरेंडर करने को तैयार हैं। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने उन्हें सरेंडर के निर्देश दिए थे और मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर तक स्थगित की थी।
मामलों का विवरण
हुंदल के खिलाफ आरोपों की जड़ें बर्खास्त पुलिस इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े ड्रग केस और पुलिस-ड्रग तस्करी गठजोड़ के गंभीर आरोपों में हैं। राजजीत सिंह हुंदल उस समय तरनतारन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के पद पर तैनात थे, जबकि इंद्रजीत सिंह जिला पुलिस में कार्यरत थे।
इसके अतिरिक्त, उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक अलग मामला और विजिलेंस ब्यूरो की ओर से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला भी दर्ज है।
बर्खास्तगी और भगोड़ा घोषित होने की पृष्ठभूमि
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित विशेष जांच दलों (SIT) की रिपोर्टों के आधार पर पंजाब सरकार ने अप्रैल 2023 में उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त किया था। बर्खास्तगी के बाद वह फरार हो गए और मोहाली की एक अदालत ने उन्हें अदालत में पेश न होने के कारण भगोड़ा घोषित कर दिया था। यह उन दुर्लभ मामलों में से एक है जहाँ एक वरिष्ठ IPS-स्तर के अधिकारी पर ड्रग तस्करी नेटवर्क से सांठगांठ के इतने गंभीर आरोप लगे हों।
कानूनी चुनौती और आगे की राह
हुंदल ने इस पूरी कार्रवाई को न्यायिक स्तर पर चुनौती दी है और जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की माँग की है। उनका तर्क है कि पंजाब पुलिस से उन्हें निष्पक्ष जांच नहीं मिल सकती। उनकी यह कानूनी याचिका सुप्रीम कोर्ट में अभी भी लंबित है। 1 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस याचिका पर अदालत का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।