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DRDO के 'नेत्र' को मिली पूर्ण परिचालन स्वीकृति, वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता हुई और मजबूत

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DRDO के 'नेत्र' को मिली पूर्ण परिचालन स्वीकृति, वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता हुई और मजबूत

सारांश

भारतीय वायुसेना को 25 जून को DRDO की स्वदेशी 'नेत्र' AEW&C प्रणाली की पूर्ण परिचालन स्वीकृति मिली — जो 2017 की IOC के आठ साल बाद आई है। ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट में परखी जा चुकी यह प्रणाली आत्मनिर्भर भारत की रक्षा तकनीक में एक निर्णायक छलाँग है।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना को 25 जून 2025 को बेंगलुरु में आयोजित समारोह में स्वदेशी 'नेत्र' AEW&C प्रणाली की फुल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) प्रदान की गई।
यह प्रमाणपत्र वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की उपस्थिति में सौंपा गया।
'नेत्र' को वर्ष 2017 में प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (IOC) मिली थी; आठ वर्षों के परीक्षण के बाद FOC मिली।
प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट स्ट्राइक के दौरान अपनी विश्वसनीयता सिद्ध की।
इसे DRDO , भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है।
स्वदेशी होने के कारण सशस्त्र बल इसमें बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार उन्नयन कर सकते हैं।

भारतीय वायुसेना को 25 जून 2025 को स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली 'नेत्र' के लिए फुल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) प्रदान की गई, जो देश की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव है। बेंगलुरु में आयोजित एक आधिकारिक समारोह में वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की उपस्थिति में यह प्रमाणपत्र सौंपा गया। इस उपलब्धि से भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र प्रबंधन और शत्रु की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नज़र रखने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

क्या है 'नेत्र' प्रणाली

'नेत्र' एक अत्याधुनिक हवाई निगरानी प्रणाली है जिसे विशेष विमान पर स्थापित किया जाता है। उड़ान के दौरान यह प्रणाली सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है। इसके ज़रिए शत्रु के लड़ाकू विमानों, ड्रोनों और अन्य खतरों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 'नेत्र' भारतीय वायुसेना की 'आँख और कान' की तरह कार्य करता है — आसमान में रहकर निरंतर निगरानी करता है और कमांड सेंटर को वास्तविक समय में सटीक सूचनाएँ उपलब्ध कराता है।

विकास की यात्रा और तकनीकी चुनौतियाँ

इस प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के घनिष्ठ सहयोग से विकसित किया गया है। वर्ष 2017 में इसे प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (IOC) मिली थी, और अब आठ वर्षों के व्यापक परीक्षण के बाद FOC प्रदान की गई है।

DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि परियोजना के दौरान कई तकनीकी चुनौतियाँ सामने आईं, किंतु उन्नत सिस्टम इंजीनियरिंग, बेहतर योजना और व्यापक उड़ान परीक्षणों की बदौलत इसे सफलतापूर्वक परिचालन सेवा के लिए तैयार किया गया।

ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट में साबित हुई विश्वसनीयता

एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने स्पष्ट किया कि 'नेत्र' प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता सिद्ध की है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वदेशी तकनीक होने के कारण भारतीय सशस्त्र बल बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार इसमें आवश्यक सुधार और उन्नयन आसानी से कर सकते हैं — जो आयातित प्रणालियों में संभव नहीं होता।

आत्मनिर्भर भारत की रक्षा में मील का पत्थर

रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि को भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा प्रणाली विकास क्षमताओं का प्रमाण बताया है। यह परियोजना वैज्ञानिक संस्थाओं, सैन्य बलों और रक्षा उद्योगों के बीच सफल समन्वय का उदाहरण भी है।

गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को विदेशी निर्भरता से मुक्त करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। 'नेत्र' की FOC न केवल वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाती है, बल्कि भविष्य में इसी तकनीक पर आधारित उन्नत संस्करण विकसित करने की संभावनाएँ भी खोलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब इज़राइल और रूस से ऐसी प्रणालियाँ खरीदना आसान विकल्प था। ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट में इसकी वास्तविक युद्ध उपयोगिता ने प्रयोगशाला के दावों को मैदान में परखा है — जो अधिकांश स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं को नसीब नहीं होता। हालाँकि, IOC से FOC तक के आठ साल यह भी याद दिलाते हैं कि जटिल रक्षा प्रणालियों में समयसीमा का पालन अभी भी एक चुनौती है। असली कसौटी अब यह होगी कि क्या DRDO इसी गति से अगली पीढ़ी के उन्नत संस्करण को समयबद्ध तरीके से विकसित कर पाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नेत्र' AEW&C प्रणाली क्या है और यह कैसे काम करती है?
'नेत्र' DRDO द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली है, जिसे विशेष विमान पर स्थापित किया जाता है। यह उड़ान के दौरान सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों पर नज़र रखती है और कमांड सेंटर को वास्तविक समय में सूचनाएँ भेजती है।
फुल ऑपरेशनल क्लियरेंस (FOC) का क्या मतलब है?
FOC का अर्थ है कि प्रणाली ने सभी तकनीकी, परिचालन और सुरक्षा परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं और अब यह पूरी क्षमता के साथ सेवा में तैनात की जा सकती है। 'नेत्र' को 2017 में IOC मिली थी, और 25 जून 2025 को FOC प्रदान की गई।
क्या 'नेत्र' का उपयोग वास्तविक अभियानों में हो चुका है?
हाँ, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती के अनुसार 'नेत्र' ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता सिद्ध की है।
स्वदेशी 'नेत्र' आयातित प्रणालियों से बेहतर क्यों है?
स्वदेशी होने के कारण भारतीय सशस्त्र बल बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार इसमें आवश्यक सुधार और उन्नयन स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं, जो विदेशी प्रणालियों में तकनीकी हस्तांतरण प्रतिबंधों के कारण संभव नहीं होता। यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी मज़बूत करती है।
'नेत्र' परियोजना किसने और कैसे विकसित की?
इस परियोजना को DRDO, भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के संयुक्त सहयोग से विकसित किया गया है। DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार, उन्नत सिस्टम इंजीनियरिंग और व्यापक उड़ान परीक्षणों की बदौलत कई तकनीकी चुनौतियों को पार करते हुए इसे परिचालन सेवा के लिए तैयार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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